सीएए के खिलाफ पूर्वोत्तर क्षेत्र में विरोध-प्रदर्शन जारी
खारी सुरेश
- 13 Mar 2024, 09:43 PM
- Updated: 09:43 PM
गुवाहाटी, 13 मार्च (मार्च) पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के छात्र संघों की शीर्ष संस्था नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स आर्गेनाइजेशन (एनईएसओ) ने बुधवार को पूरे क्षेत्र में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के नियमों की प्रतियां जलाईं और कानून को तत्काल रद्द करने की मांग की।
रायजोर दल, वीर लचित सेना और कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) के कार्यकर्ताओं ने शिवसागर में एक विरोध मार्च निकाला, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिससे इस दौरान मामूली झड़प भी हो गई। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से इनके नेताओं को हिरासत में ले लिया।
एनईएसओ के मुख्य सलाहकार समुज्जल कुमार भट्टाचार्य ने कहा कि संगठनों के सदस्यों ने विवादास्पद अधिनियम के कार्यान्वयन के विरोध में मंगलवार को भी कानून की प्रतियां जलाई थीं।
उन्होंने कहा, ‘‘एनईएसओ ने पूरे पूर्वोत्तर में विरोध-प्रदर्शन किया और सीएए को तत्काल रद्द करने की मांग की। कानून के खिलाफ हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।’’
कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने कहा कि राज्य लंबे समय से आप्रवासन की समस्या को झेल रहा है, इसीलिए सीएए के खिलाफ ‘‘सड़कों, अदालतों और मतपत्रों’’ पर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य पर विदेशियों का और अधिक बोझ नहीं बढ़ाया जा सकता। हम सभी ने असम समझौते को स्वीकार कर लिया है और राज्य में आने वाले सभी लोगों को भारतीय नागरिकता देने की समयसीमा 24 मार्च 1971 है। इसके बाद आने वाले व्यक्ति को निर्वासित करना होगा।’’
बोरा ने दावा किया कि भाजपा ने 2016 में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य से सभी अवैध अप्रवासियों को निर्वासित करने का वादा किया था, लेकिन अब वोट बैंक की राजनीति के लिए अपने वादे से मुकर गई है।
राज्य में पिछले तीन दिनों से कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों द्वारा सीएए के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा है।
विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के छात्रों ने भी अपने-अपने परिसरों के सामने केंद्रीय कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया।
छात्र संगठन के एक नेता ने कहा कि ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) ने भी दिन में सभी जिला मुख्यालयों में ‘सत्याग्रह’ किया।
छात्र संगठन ने मंगलवार शाम राज्य के कई हिस्सों में मशाल जुलूस भी निकाला।
वहीं, मंगलवार को एएएसयू का एक प्रतिनिधिमंडल उच्चतम न्यायालय में सीएए के खिलाफ याचिका दायर करने के लिए नयी दिल्ली गया था, वहीं असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने उच्चतम न्यायालय में सीएए पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आवेदन दायर किया।
असम में विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ-साथ कई छात्र और गैर-राजनीतिक संगठन सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि यह कानून 1985 के असम समझौते के प्रावधान का उल्लंघन करता है।
असम समझौता 1985 के तहत, 24 मार्च 1971 के बाद बांग्लादेश से असम में आने वाले लोगों का पता लगाने और उन्हें कानून के अनुसार देश से निष्काषित करने पर सहमति जताई गई थी।
केंद्र सरकार द्वारा सीएए के अधिसूचित नियमों के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से प्रताड़ित होकर 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आये हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता दी जाएगी।
कांग्रेस, रायजोर दल, असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद (एजेवाईसीपी), वामपंथी दलों और अन्य ने यह घोषणा की है कि वे सीएए के खिलाफ शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।
तृणमूल कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रिपुन बोरा ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता बृहस्पतिवार को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में अधिनियम और नियमों की प्रतियां जलाएंगे।
सोलह-सदस्यीय ‘यूनाइटेड अपोजिशन फोरम, असम’ (यूओएफए) ने मंगलवार को सीएए के खिलाफ विरोध जताने के लिए 12 घंटे की हड़ताल का आह्वान किया था, लेकिन इसका ज्यादा असर देखने को नहीं मिला।
असम पुलिस ने विपक्षी दलों को नोटिस जारी कर सीएए के कार्यान्वयन पर हड़ताल वापस लेने के लिए कहा था और चेतावनी दी थी कि यदि वे निर्देश का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ ‘‘कानूनी कार्रवाई’’ की जाएगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बीच, संवेदनशील इलाकों में कमांडो सहित पुलिसकर्मियों की अतिरिक्त तैनाती के साथ राज्य भर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, जबकि सभी पुलिस थानों को सतर्क कर दिया गया है।
गश्त बढ़ा दी गई है और राज्य के लगभग सभी शहरों और कस्बों में प्रमुख मार्गों पर जांच चौकी स्थापित की गई हैं।
भाषा खारी