सरकार ने आरओडीटीईपी,आरओएससीटीएल योजनाओं में अधिसूचित दरों की समीक्षा के लिए समिति गठित की
निहारिका मनीषा
- 29 Oct 2025, 01:37 PM
- Updated: 01:37 PM
नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर (भाषा) सरकार ने निर्यातकों के लिए दो योजनाओं आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल के तहत अधिसूचित दरों की समीक्षा के लिए पूर्व सचिव नीरज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है।
निर्यातित उत्पादों पर शुल्क एवं कर की छूट योजना (आरओडीटीईपी) उन कर, व शुल्क को लौटाने (रिफंड) का प्रावधान करती है जो निर्यातकों द्वारा वस्तुओं के विनिर्माण एवं वितरण की प्रक्रिया में खर्च किए जाते हैं जिनकी प्रतिपूर्ति केंद्र, राज्य या स्थानीय स्तर पर किसी अन्य तंत्र के तहत नहीं की जाती है।
इस योजना को मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है। वर्तमान आरओडीटीईपी दरें 0.3 से 4.3 प्रतिशत के बीच हैं।
परिधान निर्यातकों के लिए 2021 में राज्य एवं केंद्रीय कर एवं शुल्क में छूट (आरओएससीटीएल) योजना की घोषणा की गई थी। इसके तहत उन्हें अपने निर्यात पर केंद्रीय एवं राज्य करों में छूट मिलती है।
आरओएससीटीएल योजना के तहत, परिधानों के लिए छूट की अधिकतम दर 6.05 प्रतिशत है जबकि सिले हुए (मेड-अप) कपड़ों के लिए यह 8.2 प्रतिशत तक है। परिधान और सिले हुए कपड़े जैसे घरेलू वस्त्र इस योजना के अंतर्गत आते हैं।
सरकारी आदेश के अनुसार, समिति के दो सदस्य सीमा शुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क के पूर्व प्रधान मुख्य आयुक्त एस.आर. बरुआ और केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के पूर्व सदस्य विवेक रंजन हैं।
इसमें कहा गया कि समिति प्रशासनिक मंत्रालयों, निर्यात संवर्धन परिषदों, जिंस बोर्ड, व्यापार निकायों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत करेगी ताकि आरओएससीटीएल और आरओडीटीईपी दरों पर उनके विचार हासिल किए जा सकें।
वे निर्यातित उत्पाद पर लगने वाले केंद्रीय, राज्य व स्थानीय स्तर पर शुल्क/कर/उपकर की गणना के लिए तौर-तरीके तय करेगी जिसमें निर्यातित उत्पाद के उत्पादन में प्रयुक्त वस्तुओं एवं सेवाओं पर पूर्व चरण के संचयी अप्रत्यक्ष कर भी शामिल होंगे।
इसमें कहा गया है कि समिति घरेलू शुल्क क्षेत्रों, विशेष आर्थिक क्षेत्रों और अग्रिम प्राधिकरण धारकों से निर्यात के लिए आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल योजनाओं के तहत अधिकतम दरों की सिफारिश करेगी।
सरकारी आदेशानुसान, ‘‘समिति अपनी मुख्य रिपोर्ट 31 मार्च 2026 तक सरकार को सौंप देगी।’’
स्थानीय कर के वापस मिलने (रिफंड) से वैश्विक बाजारों में भारतीय कारोबार की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलती है।
इस वर्ष अप्रैल-सितंबर के दौरान निर्यात 3.02 प्रतिशत बढ़कर 220.12 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया जबकि आयात 4.53 प्रतिशत बढ़कर 375.11 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इससे व्यापार घाटा 154.99 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।
भाषा निहारिका