हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल किया
रंजन रंजन सुरेश
- 13 Mar 2024, 09:16 PM
- Updated: 09:16 PM
चंडीगढ़, 13 मार्च (भाषा) हरियाणा की नायब सिंह सैनी की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने बुधवार को विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया।
सदन ने करीब दो घंटे तक हुई चर्चा के बाद ध्वनि मत से विश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया। सैनी ने एक दिन पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
जननायक जनता पार्टी (जजपा) के विधायक विश्वास मत पर मतदान से पहले सदन से बाहर चले गये। पार्टी ने अपने सभी 10 विधायकों को व्हिप जारी कर विश्वास मत पर मतदान के दौरान सदन से अनुपस्थित रहने के लिए कहा था।
विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने विश्वास मत प्रस्ताव को ध्वनि मत से मतदान के लिए रखा, जिसे सैनी सरकार ने हासिल कर लिया।
सदन में राज्य के पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल विज मौजूद थे।
ध्वनि मत के दौरान जजपा के 10 विधायकों के अलावा इंडियन नेशनल लोकदल के एक मात्र विधायक भी सदन में मौजूद नहीं थे।
कांग्रेस सदस्यों ने अध्यक्ष से गुप्त मतदान का अनुरोध किया, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इससे इनकार कर दिया कि नियमों में इसके लिए कोई प्रावधान नहीं है।
इससे पहले, सैनी ने विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के लिए विश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिस पर दो घंटे तक चर्चा हुई।
सदन को संबोधित करते हुए सैनी ने कहा, ‘‘हमारी सरकार को न सिर्फ विधायकों का विश्वास प्राप्त है, बल्कि हमें हरियाणा की जनता का भी विश्वास हासिल है।’’
हरियाणा विधानसभा में सदस्यों की संख्या 90 है। भाजपा के 41 सदस्य हैं, जबकि उसे छह निर्दलीय तथा हरियाणा लोकहित पार्टी के एकमात्र विधायक गोपाल कांडा का भी समर्थन प्राप्त है।
विधानसभा में जजपा के दस विधायक हैं, जबकि मुख्य विपक्षी कांग्रेस के 30 विधायक है ।
सैनी ने अपने उन दिनों को भी याद किया जब वह 2014-2019 के दौरान सदन के सदस्य थे। उन्होंने कहा, ‘‘उस दौरान मुझसे कहा गया था कि मुझे लोकसभा चुनाव लड़ना है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उस समय मैं हरियाणा सरकार में मंत्री था, जब पार्टी की इच्छा थी कि मैं लोकसभा चुनाव लड़ूं तो मैंने उसका पालन किया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब पार्टी ने मुझे नई जिम्मेदारी सौंपी, तो मैं नवीनतम कार्यभार संभालने के लिए यहां हूं।’’
खट्टर की प्रशंसा करते हुए सैनी ने कहा कि उन्होंने उनसे बहुत कुछ सीखा है।
मुख्यमंत्री द्वारा विश्वास प्रस्ताव पेश करने से पहले, कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष गुप्ता से विधानसभा सत्र बुलाने की तात्कालिकता के बारे में जानना चाहा।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा, ‘‘कोई आपातकाल नहीं था’’ और दावा किया कि विधायकों को उचित समय नहीं दिया गया।
पार्टी विधायक बी. बी. बत्रा ने पूछा, ‘‘सत्र बुलाने की इतनी जल्दी क्या थी।’’
हुड्डा ने विधानसभा अध्यक्ष से सत्र को कम से कम एक घंटे के लिए स्थगित करने को कहा, ताकि विधायक विधानसभा पहुंच सकें।
इस पर अध्यक्ष ने कहा कि सदन में समय पर पहुंचना सदस्यों का कर्तव्य है।
चर्चा में भाग लेते हुए हुड्डा ने कहा कि 2019 में भाजपा ने जजपा के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई थी।
उन्होंने आरोप लगाया, लेकिन भाजपा-जजपा सरकार सभी मोर्चों पर विफल रही और पार्टी को अपना मुख्यमंत्री बदलना पड़ा।
भाषा रंजन रंजन