महाराष्ट्र ओबीसी समिति ने जाति प्रमाणपत्रों की सख्त जांच के आदेश दिये
जितेंद्र दिलीप
- 16 Sep 2025, 10:10 PM
- Updated: 10:10 PM
मुंबई, 16 सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) पर नवगठित कैबिनेट उप-समिति ने मंगलवार को प्रशासन को फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र जारी करने पर रोक लगाने के लिए दस्तावेजों का सख्त सत्यापन करने का निर्देश दिया और 15 दिनों के भीतर 2,933 करोड़ रुपये की लंबित राशि जारी करने का आदेश दिया। दक्षिण मुंबई स्थित मंत्रालय में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में उप-समिति की बैठक में ये निर्देश दिए गए।
बावनकुले ने जोर देकर कहा कि फर्जी कागजों के आधार पर कोई भी हलफनामा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए और पात्र आवेदकों को जाति प्रमाण पत्र जारी करने से पहले अधिकारियों द्वारा सभी दस्तावेजों की कड़ी जांच की जानी चाहिए।
एक सरकारी प्रस्ताव के तहत, कुनबी (एक कृषक जाति) वंश के मराठा समुदाय के सदस्य ओबीसी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिससे वे नौकरियों और शिक्षा में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण का लाभ पाने के पात्र हो जाएंगे।
बैठक के बाद जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री और ओबीसी नेता छगन भुजबल ने अपने कैबिनेट सहयोगी के विचारों का समर्थन करते हुए जोर दिया कि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल गंभीर चिंता का विषय है, जिसके लिए कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
भुजबल समिति के सदस्य भी हैं।
विज्ञप्ति के अनुसार, उप-समिति ने वित्तीय मामलों पर निर्णय लिया कि ओबीसी कल्याण योजनाओं के लिए लंबित 2,933 करोड़ रुपये 15 दिनों के भीतर वितरित किए जाएं और मंत्रियों को साप्ताहिक समीक्षा प्रस्तुत की जाए।
उप-समिति ने महाराष्ट्र के सभी 36 जिलों में ओबीसी विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों के निर्माण में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की।
विज्ञप्ति में बताया गया कि 16 जिलों में छात्रावासों के लिए भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता होगी, जिसके लिए एक अलग एजेंसी की नियुक्ति पर विचार किया जा रहा है।
बावनकुले ने आश्वासन दिया कि विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति की बकाया राशि का जल्द ही भुगतान कर दिया जाएगा।
कैबिनेट मंत्री पंकजा मुंडे (पर्यावरण), अतुल सावे (ओबीसी कल्याण), गणेश नाइक (वन) और दत्तात्रेय भारणे (कृषि) भी उप-समिति के सदस्य हैं।
समिति का गठन सितंबर के पहले सप्ताह में मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे द्वारा मुंबई में आंदोलन के बीच किया गया था।
भाषा जितेंद्र