आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने का मोदी का वादा क्या जुमला था : कांग्रेस
धीरज मनीषा
- 06 May 2024, 05:59 PM
- Updated: 05:59 PM
नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि केंद्र की नरेन्द मोदी सरकार आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने का वादा पूरा करने में ‘लगातार असफल’ रही है।
पार्टी ने रेखांकित किया कि उसने अपने घोषणा पत्र में राज्य को विशेष दर्जा देने के वादे की पुष्टि की है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आंध्र प्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी की रैली से पहले उनपर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा क्या जुमला था? क्यों प्रधानमंत्री विशाखापत्तनम इस्पात कारखाना अपने मित्रों को बेचने के लिए आतुर हैं? मोदी सरकार क्यों पोलावरम सिंचाई परियोजना को रोक रही है? ’’
रमेश ने कहा कि जो कहा वह ‘‘जुमला विवरण‘‘ था। उन्होंने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि 20 फरवरी 2014 को राज्यसभा में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पांच साल की अवधि के लिए आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा किया था।
कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘तब के भाजपा नेता एम. वेंकैया नायडू ने कहा था, ‘‘केवल पांच साल क्यों, भाजपा सरकार यह दर्जा 10 साल के लिए देगी। इसके कुछ सप्ताह बाद माननीय मोदी ने 30 अप्रैल 2014 को तिरुपति शहर में आयोजित जनसभा में स्वयं आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने का वादा किया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने अपने अनोखे झूठ से भगवान वेंकटेश्वर को भी नहीं बख्शा। 2014 के बाद से, उनकी सरकार इस वादे को पूरा करने में लगातार विफल रही है। प्रधानमंत्री मोदी आंध्र प्रदेश के लोगों से किए गए इस गंभीर वादे को पूरा करने में क्यों विफल रहे हैं ?’’
रमेश ने कहा कि कांग्रेस का ‘न्याय पत्र’ आंध्र प्रदेश को पांच साल के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने के वादे को दोहराता है जैसा कि मनमोहन सिंह ने वादा किया था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के उस भाषण का अंश साझा किया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर राज्य को विशेष दर्जा देने की बात की थी और सवाल किया, ‘‘क्या वह इसी तरह का (कांग्रेस की तरह) वादा कर सकते हैं। ’’
रमेश ने कहा, ‘‘यह वही वीडियो है जिसे उनके सहयोगी माननीय चंद्रबाबू नायडू 2018-19 में प्रधानमंत्री के दोहरे रवैये को रेखांकित करने के लिए प्रसारित करते थे।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश की औद्योगिक समृद्धि मोदी सरकार की पूंजीवादी प्रवृत्ति की वजह से खतरे में है।
रमेश ने कहा, ‘‘ प्रधानमंत्री द्वारा सलेम, भद्रावती और बस्तर इस्पात कारखानों के निजीकरण को आगे बढ़ाए जाए के बाद भाजपा सरकार ने अब राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आईएनएल), जिसे ‘विशाखापत्तनम इस्पात कारखाना’ के नाम से जाना जाता है, प्रधानमंत्री के दोस्तों को बेचने का प्रस्ताव किया है। एक लाख से अधिक लोग जीविकोपार्जन के लिए विशाखापत्तनम इस्पात कारखाना पर निर्भर हैं।’’
उन्होंने दावा किया कि आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने जनवरी 2021 में आरआईएनएल, उसके संयुक्त प्रतिष्ठनों और अनुषांगियों के शत प्रतिशत निजीकरण को मंजूरी दी थी और गत तीन साल से आरआईएनएल के कर्मचारी संघ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं।
रमेश ने कहा, ‘‘ इस्पात कारखाना के कर्मचारियों ने जानकारी दी है कि सरकार जानबूझकर संयंत्र को नजर अंदाज कर रही है ताकि एक समय फल-फूल रहे इस कारखाने का घाटा बढ़ता जाए। इसके विपरीत कांग्रेस सरकार ने ‘विशाखापत्तनम घोषणा पत्र’ जारी किया है जिसमें आरआईएनएल के निजीकरण को रोकने का वादा किया गया है।’’
उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस से उसके वादों का लिखित आश्वासन देने की मांग कर रहे प्रधानमंत्री क्या लिखित में देंगे कि सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों को वह अपने उद्योगपति दोस्तों को नहीं बेचेंगे।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के दौरान पोलावरम सिंचाई परियोजना रूक गयी है। उन्होंने कहा, ‘‘परियोजना पूरी होने पर 7.20 लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होगी, 28 लाख लोगों को पेयजल मिलेगा और 960 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा एवं राज्य के सभी 26 जिलों को लाभ होगा। लेकिन केंद्र ने परियोजना को पूरा करने के लिए जरूरी राशि देने से इनकार कर दिया है।’’
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने 2013-14 में परियोजना की लागत की सीमा 29,027 करोड़ रुपये तय की थी जो 2017-18 में संशोधित लागत 47,725 करोड़ रुपये से कहीं कम है।
रमेश ने कहा, ‘‘बढ़ी हुई लागत को पूरा करने के लिए केंद्र से अतिरिक्त राशि जारी नहीं होने से यह चिंता बढ़ गई है कि हो सकता है कि यह परियोजना 2026 के तय लक्ष्य तक पूरी न हो।’’
उन्होंने सवाल किया कि मोदी सरकार ने इस अहम परियोजना को क्यों नजर अंदाज किया। कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से अपनी ‘चुप्पी’ तोड़ने की मांग की।
भाषा धीरज