असम : कांग्रेस उम्मीदवार दीप बायन बरपेटा लोकसभा सीट जीतने को लेकर आश्वस्त
शुभम मनीषा
- 06 May 2024, 01:45 PM
- Updated: 01:45 PM
(त्रिदीप लहकार)
सुकमानह (असम), छह अप्रैल (भाषा) बरपेटा लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार दीप बायन ने चुनाव जीतने का भरोसा जताया और दावा किया कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एम) और तृणमूल कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों के उम्मीदवारों की मौजूदगी से उनकी राह में बाधक नहीं बनेगी।
बरपेटा सीट पर सात मई को मतदान होना है। इस सीट पर बायन के आलावा सत्तारूढ़ गठबंधन असम गण परिषद (एजीपी) के फणी भूषण चौधरी, भाकपा (एम) के मनोरंजन तालुकदार और तृणमूल कांग्रेस के अबुल कलाम आजाद चुनाव मैदान में हैं। असम गण परिषद भाजपा की सहयोगी है।
चुनाव प्रचार के दौरान ही यहां पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में बयान ने आरोप लगाया कि तालुकदार और उनके समर्थक निर्वाचन क्षेत्र में फर्जी खबरें फैला रहे हैं जिससे राजग विरोधी मत विभाजित होंगे।
राज्य सेवा दल के प्रमुख बायन ने कहा, "वे (तालुकदार और उनके समर्थक) हर दिन फर्जी खबरें फैला रहे हैं... जनता भी सवाल कर रही है कि तालुकदार किसकी मदद कर रहे हैं। वोटों को विभाजित करके वह किसकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं?"
उन्होंने कहा कि सोरभोग निर्वाचन क्षेत्र से एकमात्र भाकपा (एम) विधायक तालुकदार ने 2021 में विधानसभा चुनाव केवल कांग्रेस के साथ गठबंधन के कारण जीता था।
तालुकदार को 2021 में 96,134 वोट मिले थे। तब माकपा (एम) ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के घटक के रूप में चुनाव लड़ा था। 2016 के विधानसभा चुनाव में उन्हें केवल 29,082 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे। तब विपक्षी दलों के बीच कोई गठबंधन नहीं था।
बायन ने दावा किया, "जनता अब सवाल कर रही है कि क्या मनोरंजन तालुकदार भाजपा की मदद के लिए यह चुनाव लड़ रहे हैं। भाकपा (एम) भ्रामक जानकारी फैला रही है।"
उन्होंने कहा, "बरपेटा लोकसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी पार्टी कौन है? यह कांग्रेस है, जिसके पास मौजूदा सांसद, विधानसभा क्षेत्रों में पांच विधायक हैं। पार्टी यहां पंचायतों, जिला परिषद पर नियंत्रण रखती है और बूथ स्तर पर उसके कार्यकर्ता हैं।”
उन्होंने कहा कि न तो तालुकदार और न ही चौधरी उनकी जीत में कोई समस्या पैदा कर पाएंगे। उन्होंने भारी अंतर से चुनाव जीतने का दावा किया।
बरपेटा में लगभग 19.8 लाख मतदाता हैं। इनमें से 12 लाख से अधिक हिंदू और लगभग सात लाख मुस्लिम मतदाता हैं।
भाषा
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