घर में बैठ कर दूसरों को खेलते देखना काफी मुश्किल था: नायर
आनन्द मोना
- 13 Mar 2024, 07:51 PM
- Updated: 07:51 PM
मुंबई, 13 मार्च (भाषा) ‘ प्रिय क्रिकेट, मुझे एक और मौका दो’ यह बातें भारत के लिए टेस्ट में तिहरा शतक जड़ने वाले करुण नायर ने उस समय कही थी जब उनकी घरेलू टीम कर्नाटक ने उन्हें 2022-23 सत्र में बाहर का रास्ता दिखा था।
एक सत्र तक खेल से दूर रहने के बाद नायर को विदर्भ ने मौका दिया और दायें हाथ के मध्यक्रम के इस बल्लेबाज ने हर प्रारूप में रन बनाकर अपनी नयी टीम को निराश नहीं किया।
रणजी ट्रॉफी फाइनल में बुधवार को चौथे दिन के खेल के दौरान 220 गेंद में 74 रन की जुझारू पारी खेलने के बाद भावुक हुए नायर ने कहा कि ‘घर में बैठ कर दूसरे खिलाड़ियों को खेलते देखना’ उनके लिए काफी मुश्किल था।
नायर मौजूदा सत्र में दो बार की चैम्पियन टीम के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी है। उन्होंने दिन का खेल खत्म होने के बाद कहा, ‘‘मुझे लगता है कि मैंने काफी अच्छी बल्लेबाजी की है। मैंने सभी प्रारूपों में रन बनाए हैं। इस सत्र में काउंटी चैंपियनशिप में भी कुछ मैच खेलकर काफी रन बनाए हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ जब मैंने वहां (काउंटी क्रिकेट) रन बनना शुरू किया तो इससे मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा। मैंने ओवल मैदान में बल्लेबाजी के लिए मुश्किल परिस्थितियों में 150 रन की पारी खेली थी। इससे से सत्र से पहले मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ मैं एक सत्र तक खेल से दूर रहा। मुझे नहीं पता इसे कैसे कहना चाहिए लेकिन घर में बैठ कर दूसरों को खेलते देखना कठिन था।’’
वीरेंद्र सहवाग के बाद टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए तिहरा शतक जड़ने वाले सिर्फ दूसरे बल्लेबाज बने नायर ने कहा उन्होंने अब भी भारतीय टीम में वापसी की उम्मीद है।
इस 32 साल के बल्लेबाज ने कहा, ‘‘ शत प्रतिशत, मैं वापसी कर सकता हूं। अगर ऐसा नहीं होता तो मैं इतनी मेहनत कर के घरेलू क्रिकेट में वापसी नहीं करता। मुझे लगता है कि मैं फिर से भारत के लिए खेल सकता हूं। यह अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाये रखने के बारे में है।’’
विदर्भ ने जीत के लिए 538 रन का पीछा करते हुए पांच विकेट पर 248 रन बना लिये है। उसके सामने और 290 रन बनाने का पहाड़ जैसा लक्ष्य है लेकिन नायर को मैच के आखिरी दिन चमत्कार की उम्मीद है।
उन्होंने कहा,‘‘ हमें उम्मीद बनाये रखने की जरूरत है। यह एक कठिन काम है। लेकिन अगर मैं इस टीम के बारे में कुछ कह सकता हूं, तो वह यह है कि वे कभी हार नहीं मानते । जब भी ऐसा मौका आता है तो वे जज्बा दिखाते हुए डट कर सामना करते हैं।’’
मुंबई के तेज गेंदबाज तुषार देशपांडे ने बुधवार को विदर्भ को आउट करने में विफल रहने पर कहा कि यह उनकी टीम के लिए निराशाजनक नहीं है क्योंकि परिस्थितियां बल्लेबाजी के लिए अनुकूल थी और प्रतिद्वंद्वी टीम के बल्लेबाजों ने लचर शॉट नहीं खेले।
उन्होंने कहा, ‘‘नहीं, हम बिल्कुल भी निराश नहीं थे। हम बस चाहते थे कि हमारे गेंदबाज अच्छे क्षेत्रों में गेंदबाजी करें क्योंकि विकेट से टर्न और उछाल मिल रहा था। वे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे थे और ऐसे में हमारे लिए धैर्य रखना जरूरी था। विदर्भ के बल्लेबाजों ने वास्तव में बहुत अच्छी बल्लेबाजी की।’’
भाषा आनन्द