मुख्यमंत्री सुक्खू ने आपदा प्रभावित हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्र से विशेष राहत पैकेज की मांग की
दिलीप संतोष
- 09 Sep 2025, 11:18 PM
- Updated: 11:18 PM
शिमला, नौ सितंबर (भाषा) मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को केंद्र से इस मानसून में कई आपदाओं से प्रभावित हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य के संसाधन राहत और पुनर्वास के लिए अपर्याप्त हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को राज्य का दौरा किया और बाढ़ तथा भूस्खलन की स्थिति का जायजा लिया। प्रधानमंत्री को जानकारी देते हुए सुक्खू ने उनसे दो प्रतिशत अतिरिक्त उधार सीमा की अनुमति देने का आग्रह किया, ताकि आपदा प्रभावित परिवारों को और अधिक राहत दी जा सके।
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को बारिश प्रभावित हिमाचल प्रदेश के लिए 1,500 करोड़ रुपये की तत्काल राहत की घोषणा की और मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि की भी घोषणा की।
हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद, मोदी ने कांगड़ा हवाई अड्डे पर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
बीस जून को मानसून की शुरुआत के बाद से हिमाचल प्रदेश को 4,156 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और बारिश से संबंधित घटनाओं और सड़क दुर्घटनाओं में 378 लोगों की मौत हो चुकी है।
समीक्षा बैठक में, मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रधानमंत्री को बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद, राज्य सरकार प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है और उसे केंद्र सरकार से तत्काल अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में 68 प्रतिशत भूमि वन भूमि है और उन्होंने विस्थापित परिवारों को ऐसी भूमि पर पुनर्वास की अनुमति देने के लिए वन संरक्षण अधिनियम के तहत छूट की मांग की।
क्षतिग्रस्त सरकारी परियोजनाओं के लिए अपर्याप्त सहायता पर प्रकाश डालते हुए, मुख्यमंत्री ने मौजूदा मानदंडों में संशोधन की मांग की और कहा कि क्षतिग्रस्त परियोजनाओं को बहाल करने में अक्सर नई परियोजनाएं स्थापित करने की तुलना में अधिक खर्च आता है।
सुक्खू ने कहा, ‘‘अब तक हमें जो सहायता मिल रही है वह बहुत कम और बहुत देर से मिल रही है।’’
समीक्षा बैठक में, सुक्खू ने कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) परियोजनाओं के तहत बारहमासी सुरंगों के निर्माण और प्रतिकूल मौसम के दौरान संपर्क सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक पर्वतीय मार्गों के विकास के लिए केंद्र से सहयोग मांगा।
भाषा दिलीप