धूम्रपान निषेध दिवस: सरकार से होटलों और हवाई अड्डों पर निर्धारित स्थान हटाने का अनुरोध
जोहेब सुरेश
- 13 Mar 2024, 08:53 PM
- Updated: 08:53 PM
नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) धूम्रपान निषेध दिवस के मौके पर चिकित्सकों, कैंसर पीड़ितों और होटल संघों ने सरकार से होटलों, रेस्तरां और हवाई अड्डों पर निर्धारित धूम्रपान स्थानों को हटाने का अनुरोध किया है।
सीओटीपीए 2003 में संशोधन की प्रक्रिया शुरू करने और भारत को 100 प्रतिशत धूम्रपान मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित करने के लिए सरकार की सराहना करते हुए, उन्होंने धूम्रपान क्षेत्रों की अनुमति देने वाले मौजूदा प्रावधान को तत्काल हटाने की अपील की।
‘मैक्स इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर केयर’ के अध्यक्ष डॉ. हरित चतुर्वेदी ने कहा, “धूम्रपान फेफड़ों की कार्यक्षमता को खराब करता है और प्रतिरक्षा को कमजोर करता है। शत-प्रतिशत धूम्रपान-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के लिए होटलों, रेस्तरां और यहां तक कि हवाई अड्डों पर भी सभी निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्रों को समाप्त किया जाना चाहिए।”
भारत में, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय और वितरण का विनियमन) अधिनियम (सीओटीपीए), 2003 के अनुसार, सभी सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध है। इस अधिनियम की धारा-चार के तहत आम लोगों की मौजूदगी वाले सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना प्रतिबंधित है।
हालांकि, सीओटीपीए 2003 के तहत फिलहाल रेस्तरां, होटल और हवाई अड्डों जैसे कुछ सार्वजनिक स्थानों के निर्दिष्ट धूम्रपान क्षेत्रों में धूम्रपान की अनुमति है।
धूम्रपान के कारण समस्याओं का सामना कर चुकीं स्वास्थ्य कार्यकर्ता नलिनी सत्यनारायण ने कहा, “चूंकि सिगरेट का धुआं धूम्रपान क्षेत्रों से सामान्य क्षेत्रों तक पहुंच जाता है, इसलिए किसी भी परिसर में धूम्रपान पर रोक लगाने के लिए सीओटीपीए में संशोधन की आवश्यकता है। सार्वजनिक स्वास्थ्य के सर्वोत्तम हित में सभी स्थानों को पूरी तरह से धूम्रपान-मुक्त किया जाना चाहिए।”
‘हॉस्पिटैलिटी एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश’ के अध्यक्ष जी पी शर्मा ने कहा, “हम देख रहे हैं कि परिवार उन होटलों में रहना पसंद करते हैं, जहां धूम्रपान की अनुमति नहीं है। हमें खुशी है कि सरकार आतिथ्य क्षेत्र को पूरी तरह से धूम्रपान-मुक्त बनाने के लिए सीओटीपीए प्रावधानों को मजबूत कर रही है। हम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सरकार की पहल का समर्थन करते हैं।”
डॉक्टर चतुर्वेदी के अनुसार, भारत में 26 करोड़ 80 लाख के आसपास लोग तंबाकू का सेवन करते हैं और इस मामले में भारत दुनियाभर में दूसरे स्थान पर है।
उन्होंने कहा कि इनमें से हर साल कम से कम 12 लाख लोग तंबाकू संबंधी बीमारियों से मरते हैं।
उन्होंने कहा कि 10 लाख लोगों की मौत धूम्रपान के कारण होती है, जबकि दो लाख से अधिक लोग किसी और के धूम्रपान करने से निकले धुएं के कारण जान गंवाते हैं, जबकि 35,000 से अधिक लोगों की मौत धुआं-रहित तंबाकू के सेवन के कारण होती है।
उन्होंने कहा कि भारत में कैंसर के जितने मामले सामने आते हैं, उनमें से 27 प्रतिशत तंबाकू के उपयोग के कारण होते हैं।
भाषा जोहेब