एएनएससीबीएल की प्रबंध समिति ने एनपीए संबंधी विवरणों को 'गलत तरीके से प्रस्तुत' किया: पुलिस अधिकारी
देवेंद्र पवनेश
- 05 Sep 2025, 04:18 PM
- Updated: 04:18 PM
(सुजीत नाथ)
पोर्ट ब्लेयर, पांच सितंबर (भाषा) अंडमान और निकोबार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड (एएनएससीबीएल) के ऋण घोटाले की जांच से पता चला है कि कांग्रेस के पूर्व सांसद कुलदीप राय शर्मा की अध्यक्षता वाली पिछली प्रबंध समिति ने गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) से जुड़े विवरणों को ‘‘गलत तरीके से’’ प्रस्तुत किया और बैंक को बेहतर स्थिति में दिखाने का ‘‘झूठा’’ प्रयास किया। एक पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अंडमान और निकोबार पुलिस ने 15 मई 2025 को एएनएससीबीएल ऋण घोटाले के संबंध में शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमें मार्च 2018 का एक दस्तावेज मिला है, जिससे पता चला है कि बैंक की प्रबंध समिति ने एनपीए सूचियों में किस तरह से हेरफेर किया। बैंक विवरण के अनुसार, उन्होंने दावा किया कि 31 मार्च 2018 तक एनपीए 18.42 प्रतिशत था। लेकिन लेखा परीक्षकों द्वारा निकाला गया वास्तविक सकल एनपीए 46.33 प्रतिशत था, जिससे पता चला कि बैंक सात साल से अधिक समय से खराब स्थिति में था, जब तक कि इस साल हमारे द्वारा कई गिरफ्तारियां नहीं की गईं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2017-18 की लेखा परीक्षा रिपोर्ट में कुल 1,434 एनपीए खातों का खुलासा हुआ है, जिनकी राशि 105,73,09,766 रुपये (लगभग) है, जबकि 31 मार्च, 2018 तक ऑडिट रिपोर्ट में वास्तविक एनपीए 266,00,72,825 रुपये (लगभग) बताया गया। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने 31 मार्च, 2018 तक कुल एनपीए से 160,27,63,059 रुपये (लगभग) की राशि वाले 651 एनपीए खातों को बाहर कर दिया।’’
शर्मा के अलावा प्राथमिकी में सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष, बोर्ड के सदस्य और बैंक के निदेशक/अधिकारी तथा कई लाभार्थियों के नाम भी शामिल हैं।
अधिकारी ने कहा, ‘‘हमने पाया कि बैंकों ने वाणिज्यिक आवास, होटल, रिसॉर्ट, नौवहन क्षेत्र समेत परियोजनाओं के लिए अंधाधुंध ऋण स्वीकृत करने में जानबूझकर गड़बड़ी की है और वाणिज्यिक प्रस्तावों के मूल्यांकन के लिए उचित प्रयास किए बिना इकाइयों और कंपनियों को नकद ऋण/ओवरड्राफ्ट सीमा प्रदान की है, जिसके परिणामस्वरूप एनपीए में तेजी से वृद्धि हुई है। दुर्भाग्यवश, सुधारात्मक उपाय करने के बजाय, उन्होंने बैंक की बिगड़ती स्थिति को छिपाने की कोशिश की।’’
सीआईडी ने 18 जुलाई 2025 को ऋण अनियमितता मामले में शर्मा (एएनएससीबीएल के पूर्व अध्यक्ष) को गिरफ्तार कर लिया था।
यह गिरफ्तारी सहकारी समितियों के उप रजिस्ट्रार (मुख्यालय) की शिकायत के बाद की गई, जिसमें ऋणदाता द्वारा विभिन्न लोगों को ऋण स्वीकृत करने में घोर अनियमितताएं बरतने का आरोप लगाया गया था।
बाद में, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी समानांतर जांच शुरू की। ईडी ने गत 31 जुलाई को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अपना पहला तलाशी अभियान चलाया। पिछले दो सप्ताह में, उसने (ईडी) पूछताछ के लिए 10 से अधिक लोगों को तलब किया है।
तलाशी अभियान के दौरान, ईडी अधिकारियों ने साक्ष्य एकत्र किए, जिनसे पता चला कि 100 से अधिक ऋण खातों के माध्यम से 500 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण राशि धोखाधड़ी से प्राप्त की गई थी।
गत 25 जून से अब तक इस घोटाले के सिलसिले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एएनएससीबीएल के प्रबंध निदेशक के मुरुगन, बैंक कर्मचारी कलैवानन, के सुब्रमण्यन (एएनएससीबीएल निदेशक) और अन्य शामिल हैं।
भाषा
देवेंद्र