क्या होता है जब सांस्कृतिक 'सुरक्षा' का प्रगतिशील विचार स्वयं पर ही हावी हो जाता है?

क्या होता है जब सांस्कृतिक 'सुरक्षा' का प्रगतिशील विचार स्वयं पर ही हावी हो जाता है?