मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए पैनल गठित, जरांगे ने अनशन समाप्त किया
शोभना नरेश
- 02 Sep 2025, 09:50 PM
- Updated: 09:50 PM
मुंबई, दो सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को एक समिति गठित करने की घोषणा की ताकि मराठा समुदाय के लोगों को उनकी कुनबी विरासत के ऐतिहासिक साक्ष्य पेश करने पर कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी किए जा सकें।
सरकार ने एक आदेश में यह घोषणा की। इसके पहले राज्य के मंत्रियों और मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के बीच गहन वार्ता हुई। जरांगे मराठों के लिए ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर मुंबई के आज़ाद मैदान में भूख हड़ताल पर थे। बाद में उन्होंने अपना अनशन समाप्त कर दिया।
सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश (जीआर) में हैदराबाद गजट को लागू करने का भी उल्लेख किया गया है।
जीआर में कहा गया, ‘‘ हैदराबाद गजट में निहित ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार दस्तावेजों को सत्यापित करने और कुनबी जाति प्रमाणपत्र के लिए मराठा समुदाय के व्यक्तियों की पात्रता स्थापित करने के लिए एक समर्पित जांच प्रक्रिया अपनायी जाएगी। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक दावे का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से मूल्यांकन किया जाए।’’
जरांगे लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए, यह एक कृषि जाति है जो राज्य में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में शामिल है। मराठों को कुनबी के रूप में वर्गीकृत करने से वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के पात्र हो जायेंगे।
सरकारी आदेश के अनुसार इस पैनल में ग्राम सेवक, तलाठी (राजस्व अधिकारी) और सहायक कृषि अधिकारी सदस्य होंगे। ये अधिकारी मराठा समुदाय के आवेदकों के दस्तावेज़ी दावों का सत्यापन करेंगे और सक्षम प्राधिकारी को इसकी जानकारी देंगे।
इसमें कहा गया है,‘‘ सरकार का इरादा उन सभी मराठा दावेदारों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र प्रदान करना है जो आधिकारिक दस्तावेजों के माध्यम से अपनी वंशावली प्रदर्शित कर सकें। इससे वे कानूनी रूप से आरक्षण का लाभ उठा सकेंगे।’’
सरकारी आदेश में निर्देश दिया गया था कि मराठा समुदाय के वे लोग जिनके या जिनके पूर्वजों के पास 21 नवंबर, 1961 या उससे पहले कृषि भूमि थी उन्हें पुराने भूमि अभिलेखों या संबंधित रजिस्टरों के अंश जैसे साक्ष्य पेश करने होंगे। इन अभिलेखों के आधार पर, नामित समिति स्थानीय स्तर पर जांच करेगी और तदनुसार दावेदारों को प्रमाणित करेगी।
जुलाई 2023 में सरकार ने महाराष्ट्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जनजाति, खानाबदोश जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और विशेष पिछड़ा वर्ग (जारी करने और सत्यापन का विनियमन) जाति प्रमाण पत्र नियम, 2012 में संशोधन किया था।
हैदराबाद गजट या राजपत्र, हैदराबाद की तत्कालीन निजाम सरकार द्वारा 1918 में जारी एक आदेश को संदर्भित करता है जिसमें मध्य महाराष्ट्र के वर्तमान मराठवाड़ा क्षेत्र के कुछ हिस्से शामिल थे। यह गजट पूर्ववर्ती हैदराबाद राज्य के कुछ मराठा समुदाय समूहों सहित कुछ समुदायों को कुनबी के रूप में वर्गीकृत करता है जिन्हें महाराष्ट्र में ओबीसी श्रेणी में शामिल किया गया है।
हैदराबाद गजट के कार्यान्वयन से मराठवाड़ा क्षेत्र के मराठों को प्रभावी रूप से कुनबी का दर्जा मिलेगा जिससे वे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के पात्र हो जाएंगे।
भाषा शोभना