राजकोषीय घाटा जुलाई के अंत तक पूरे साल के लक्ष्य का 29.9 प्रतिशत पर
पाण्डेय रमण
- 29 Aug 2025, 07:02 PM
- Updated: 07:02 PM
नयी दिल्ली, 29 अगस्त (भाषा) केंद्र का राजकोषीय घाटा जुलाई के अंत तक पूरे साल के लक्ष्य का 29.9 प्रतिशत पहुंच गया। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह कहा।
पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के पहले चार महीनों में यह बजट अनुमान (बीई) का 17.2 प्रतिशत था।
इससे पहले पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के अंत तक घाटा पूरे वर्ष के लक्ष्य का 17.9 प्रतिशत था।
वास्तविक राजकोषीय घाटा या सरकार के व्यय और राजस्व के बीच का अंतर वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जुलाई अवधि में 4,68,416 करोड़ रुपये था।
केंद्र का अनुमान है कि 2025-26 के दौरान राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 4.4 प्रतिशत यानी 15.69 लाख करोड़ रुपये होगा।
सीजीए के आंकड़ों के मुताबिक सरकार को जुलाई 2025 तक 10.95 लाख करोड़ रुपये (बजट अनुमान 2025-26 की कुल प्राप्तियों का 31.3 प्रतिशत) मिले।
इसमें 6.61 लाख करोड़ रुपये का कर राजस्व (शुद्ध रूप से केंद्र को), 4.03 लाख करोड़ रुपये का गैर-कर राजस्व और 29,789 करोड़ रुपये की गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां शामिल थीं।
इस दौरान भारत सरकार द्वारा करों के हस्तांतरण के रूप में राज्य सरकारों को 4.28 लाख करोड़ रुपये दिए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 61,914 करोड़ रुपये अधिक है।
केंद्र का कुल व्यय 15.63 लाख करोड़ रुपये था, जो 2025-26 के बजट अनुमान का 30.9 प्रतिशत है। इसमें 12,16,699 करोड़ रुपये राजस्व खाते में और 3.46 लाख करोड़ रुपये पूंजी खाते में थे।
कुल राजस्व व्यय में 4.46 लाख करोड़ रुपये ब्याज भुगतान और 1.13 लाख करोड़ रुपये प्रमुख सब्सिडी के लिए थे।
इक्रा लिमिटेड की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि कर दाखिल करने की समय सीमा बढ़ाने और प्रतिकूल आधार के कारण जुलाई 2025 में व्यक्तिगत आयकर संग्रह में कमी ने सकल कर राजस्व को प्रभावित किया, जबकि राज्यों को हस्तांतरण में तेज गति बनी रही। इस कारण शुद्ध कर राजस्व का आंकड़ा और घट गया।
उन्होंने कहा कि राजस्व व्यय में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पूंजीगत व्यय सालाना आधार पर 33 प्रतिशत बढ़ा।
नायर ने कहा कि प्रस्तावित जीएसटी बदलावों के राजस्व पर पड़ने वाले प्रभावों के कारण राजकोषीय गुंजाइश कम हो सकती है, लेकिन इस पर और स्पष्टता की प्रतीक्षा है।
भाषा पाण्डेय