भारत के विभिन्न भागों में बारिश और अचानक आई बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त, राहत कार्य धीमा
रंजन माधव
- 28 Aug 2025, 10:39 PM
- Updated: 10:39 PM
नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) देश के विभिन्न भागों में बृहस्पतिवार को बारिश और नदियों में उफान के कारण सामान्य जनजीवन बुरी तरह से अस्तव्यस्त हो गया, कई सड़कें और पुल बह गये और कई गांव जलमग्न हो गये तथा बचावकर्मियों को बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
उत्तर में हिमाचल प्रदेश से लेकर दक्षिण में केरल तक, बारिश के कारण नदियों और बांधों का जलस्तर बढ़ गया और रिहायशी इलाकों एवं कृषि क्षेत्रों में पानी भर गया।
हालांकि, कश्मीर में दो दिनों के बाद बारिश में कमी आने से बाढ़ का खतरा कम हो गया है, जिससे राहत मिली है।
हिमाचल प्रदेश में, अधिकारियों ने बताया कि रावी नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण कांगड़ा जिले के सुदूर बड़ा बंगाल गांव में कई सरकारी इमारतें बह गयीं।
उन्होंने बताया कि इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
बैजनाथ के उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) संकल्प गौतम ने बृहस्पतिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, "निचले बड़ा बंगाल में मंगलवार को एक प्राथमिक और उच्च विद्यालय, पंचायत घर, एक आयुर्वेदिक औषधालय और एक नागरिक आपूर्ति भंडार बह गए। नागरिक आपूर्ति भंडार में लगभग 70 क्विंटल राशन रखा था। दो पुलों के बह जाने से गांव राज्य के बाकी हिस्सों से कट गया है।"
उन्होंने बताया कि संचार व्यवस्था बहुत बुरी तरह प्रभावित हुई है।
एसडीएम ने कहा, "निचले बड़ा बंगाल में रावी नदी के किनारे स्थित मकानों को एहतियात के तौर पर खाली करा दिया गया है। लगभग 180 क्विंटल राशन गांव पहुंचाया जा रहा है, लेकिन सड़कें अवरुद्ध हैं। जरूरत पड़ने पर हवाई जहाज़ से आवश्यक वस्तुएं और दवाइयां पहुंचाई जाएंगी।"
बृहस्पतिवार को चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग, पंडोह के पास कांची मोड़ पर सड़क का एक हिस्सा धंस जाने के बाद अवरुद्ध हो गया, जिसके परिणामस्वरूप, दोनों तरफ कई वाहन फंस गए।
उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ की एक टीम ने कांगड़ा जिले के इंदौरा में अरनी विश्वविद्यालय परिसर में फंसे लगभग 425 छात्रों और शिक्षकों को बचाया।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, राज्य के 12 में से 11 ज़िलों में कुल 536 सड़कें बंद हैं। चंबा जिले में संचार नेटवर्क ठप होने के कारण वहां से रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
बंद सड़कों में से 217 मंडी जबकि 167 कुल्लू ज़िले में हैं।
एसईओसी के अनुसार, 20 जून से 26 अगस्त के बीच हिमाचल प्रदेश में बारिश से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 158 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 38 लोग लापता हैं। राज्य में अब तक अचानक बाढ़ आने की 90, बादल फटने की 42 और बड़े भूस्खलन की 85 घटनाएं हुई हैं। एसईओसी के आंकड़ों के अनुसार, बारिश से जुड़ी घटनाओं में राज्य को 2,623 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
कश्मीर में बाढ़ का खतरा बृहस्पतिवार को कम हो गया है क्योंकि मौसम में सुधार के साथ ही झेलम नदी एवं अन्य जलाशयों में जलस्तर कम होने लगा है। अधिकारियों ने बताया कि पिछले 12 घंटों में कश्मीर घाटी में बहुत कम बारिश हुई है।
उन्होंने बताया कि बारिश कम होने के कारण, दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के संगम पर झेलम नदी बाढ़ की चेतावनी के स्तर से नीचे आ गई है।
उन्होंने बताया कि हालांकि श्रीनगर में नदी का जलस्तर अब भी खतरे के स्तर से ऊपर है, लेकिन जलस्तर कम होना शुरू हो गया है।
नदी की सहायक नदियां भी बाढ़ की चेतावनी के स्तर से नीचे बह रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, बुधवार को जलमग्न हुए इलाकों में भी पानी कम होने लगा है। हालांकि, विभिन्न विभागों द्वारा निगरानी जारी है और टीमें अलर्ट पर हैं।
इस बीच कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ‘‘जल स्तर घट रहा है, संगम और राम मुंशीबाग में जल स्तर घट रहा है और अगले कुछ दिनों तक मौसम का पूर्वानुमान ऐसा ही रहेगा।’’
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह कुछ दिनों में अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और यह समझेंगे कि 2014 की भीषण बाढ़ के बाद बाढ़ से निपटने के लिए क्या उपाय किए गए थे और जहाँ भी केंद्र शासित प्रदेश में स्थिति खराब होगी, वहां सुधारात्मक कदम उठाए जायेंगे।
पंजाब के विभिन्न जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एवं राहत अभियान बृहस्पतिवार को जारी रहा, हालांकि कई गांव तथा निचले इलाके अब भी जलमग्न हैं।
जिला प्रशासन ने सेना, राष्ट्रीय आपदा राहत बल, सीमा सुरक्षा बल और राज्य एजेंसियों की मदद से बचाव अभियान जारी रखा लेकिन स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।
अमृतसर जिला प्रशासन ने रामदास क्षेत्र के जलमग्न गांवों में फंसी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों सहित कई लोगों को निकाला।
रावी नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण क्षेत्र में फंसे लोगों को बचाने के लिए नौकाओं और अन्य वाहनों को तैनात किया गया हे।
एक अधिकारी ने बताया कि अमृतसर की उपायुक्त साक्षी साहनी ने जालंधर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (देहात) मनिंदर सिंह और अतिरिक्त उपायुक्त रोहित गुप्ता के साथ बचाव अभियान की निगरानी की।
अधिकारी ने बताया कि बचाए गए लोगों को राहत सामग्री और भोजन दिया गया तथा सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया।
हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू कश्मीर में भारी बारिश के कारण सतलुज, ब्यास और रावी नदियों समेत बरसाती नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे नदियों के किनारे बसे कई गांव और कृषि भूमि जलमग्न हैं।
पठानकोट, गुरदासपुर, फाजिल्का, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, होशियारपुर और अमृतसर जिलों के गांव बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सभी मंत्रियों को स्थिति नियंत्रण में नहीं आ जाने तक क्षेत्र में रहने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि 15 राहत शिविर चलाए जा रहे हैं और इनमें 413 लोग रह रहे हैं, जिनमें से 280 लोग पिछले 16 घंटों में स्थानांतरित हुए हैं। बाढ़ ने अब तक जिले में 5,287 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने बताया कि इस मानसून में 17 कच्चे घर ढह गए हैं, पांच को गंभीर क्षति हुई है और एक आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है।
मान ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे मंत्रिमंडल और आम आदमी पार्टी (आप) के सभी विधायकों के साथ मिलकर राज्य में बाढ़ राहत प्रयासों के लिए अपना एक महीने का वेतन दान करने का फैसला किया है।
उत्तर प्रदेश में गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण उत्तर प्रदेश के वाराणसी के घाटों पर दैनिक आरती और दाह संस्कार सहित सामान्य गतिविधियां बाधित हुईं।
अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में मामूली गिरावट के बाद, गंगा नदी में जल स्तर बृहस्पतिवार की सुबह 70.262 मीटर के चेतावनी के निशान को पार कर 70.91 मीटर पर पहुंच गया, जो खतरे के निशान 71.262 मीटर के करीब है।
राजस्थान में मानसून की बारिश का दौर जारी है, जहां बीते 24 घंटे में कई जगह मध्यम से भारी बारिश हुई।
राजस्थान के जयपुर स्थित मौसम केंद्र ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह तक 24 घंटे में लगभग पूरे राजस्थान में बारिश हुई, पूर्वी राजस्थान में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई जबकि सर्वाधिक 90 मिलीमीटर वर्षा वेजा (डूंगरपुर) में हुई।
बूंदी जिले के नैनवां, कापरेन और केशोरायपाटन इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी जैसे-जैसे कम हो रहा है, ग्रामीण जीवन की टूटी हुई कड़ियों को फिर से जोड़कर उसे पटरी पर लाने में जुट गए हैं। वे अपने भीगे हुए घरेलू सामान, गीले कपड़ों और अनाज को सुखा रहे हैं तथा अपने अपने घरों और दुकानों में बाढ़ के कारण जमा गाद को बाहर निकाल रहे हैं।
नैनवां ब्लॉक में पैबलापुरा बांध के नीचे की ओर स्थित 1,500 से अधिक आबादी वाला डोकुन गांव और पड़ोसी देवरिया गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। शुक्रवार और शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश के दौरान बांध का पानी उफनकर अचानक घरों और दुकानों में घुस गया था।
महाराष्ट्र के नांदेड़ और लातूर जिलों में भारी बारिश के बीच 2200 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि मुखेड़, कंधार और नयागांव के 17 राजस्व क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। सबसे अधिक बारिश नांदेड़ के बिलोली और नरसी क्षेत्रों में दर्ज की गई, जहां 115 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि लातूर के 29 क्षेत्रों में 65 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई।
एक स्थानीय अधिकारी ने बताया, ‘‘नांदेड़ में धर्माबाद, नयागांव और कंधार में आज सुबह कई घरों में पानी घुस जाने के बाद राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम को देगलूर के गांवों में भेजा गया। बारिश के कारण गोनार, जकेपुर, रुई और कंधारेवाड़ी गांवों के सड़क संपर्क प्रभावित हुए हैं।’’
अधिकारी ने बताया, ‘‘नांदेड़ प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सांगवी उमर, मेदंकल्लूर, शेलगांव और तामलूर गांवों के 871 घरों के 2236 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। फिलहाल नांदेड़ के आठ बांधों से 3.63 लाख क्यूसेक (घन फुट प्रति सेकंड) पानी छोड़ा जा रहा है। इनमें विष्णुपुरी, येलदारी और सिद्धेश्वर बांध शामिल हैं।’’
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि लातूर में 60 राजस्व क्षेत्रों में से 29 में अत्यधिक वर्षा हुई, यानी एक ही दिन में 65 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई।
उन्होंने बताया कि भारी बारिश के कारण औसा, निलंगा, लातूर और उदगीर तालुकाओं में कई पुल जलमग्न हो गए हैं और 41 सड़कें बंद कर दी गई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘आज सुबह आठ बजे तक पिछले 24 घंटे की अवधि में लातूर जिले में 62.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जलकोट तालुका में सबसे अधिक 77.9 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि निलंगा में सबसे कम 50 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।’’
अधिकारी ने बताया कि अहमदपुर के थोडगा और हसरानी गांवों के साथ-साथ निलंगा के बेलसांगवी में भी घरों में पानी घुस गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘तिरु परियोजना में जलस्तर बढ़ रहा है। शिरूर-अनंतपाल में नदी के किनारे बने शेड में फंसे तीन लोगों को बचा लिया गया है...।’’
केरल में बृहस्पतिवार को भारी बारिश से कई इलाके जलमग्न हो गए, बांधों का जलस्तर बढ़ गया और भूस्खलन की घटनाएं हुईं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दिन के लिए छह जिलों में ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी किया है।
आईएमडी ने राज्य के एर्नाकुलम, त्रिशूर, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी किया है।
पांच जिलों, पथनमथिट्टा, इडुक्की, पलक्कड़ और मलप्पुरम में भी आज के लिए ‘येलो’ अलर्ट जारी किया गया है।
ऑरेंज’ अलर्ट का मतलब 11 सेंटीमीटर से 20 सेंटीमीटर तक बहुत भारी बारिश तथा ‘येलो’ अलर्ट का मतलब छह सेंटीमीटर से 11 सेंटीमीटर तक की भारी बारिश है।
वायनाड में भारी बारिश के कारण थमारास्सेरी दर्रे पर भारी भूस्खलन हुआ, जिससे वहां यातायात पूरी तरह अवरुद्ध हो गया।
तेलंगाना में वर्षाजनित घटनाओं के कारण कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, तेलंगाना के कामारेड्डी, निज़ामाबाद और करीमनगर ज़िलों में भारी बारिश जारी है।
तेलंगाना विकास योजना सोसाइटी ने बताया कि कामारेड्डी ज़िले के रामारेड्डी गाँव में सुबह 8.30 बजे से शाम 4 बजे तक 171.3 मिमी बारिश हुई, जबकि निज़ामाबाद ज़िले के कलदुर्की में 163.8 मिमी बारिश हुई।
दक्षिण मध्य रेलवे ने बताया कि हैदराबाद मंडल में विभिन्न स्थानों पर पटरियां जलमग्न होने के कारण 69 ट्रेनें रद्द कर दी गईं।
कर्नाटक के कई हिस्सों में बृहस्पतिवार सुबह भारी बारिश हुई, जिसके बाद आईएमडी ने कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किए।
इसके अलावा शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी कर दी गई है और कई जिलों में अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाए हैं।
बीदर जिले में, औरद तालुक में बीती रात हुई बारिश के कारण भालकी तालुक के बादलगांव-चोंडिमुखेड में दादागी पुल समेत कई पुलों पर पानी भर गया, जिससे यातायात पूरी तरह से बंद हो गया। औरद तालुक के नारायणपुर गांव में एक बरसाती नाले के उफान पर होने की भी खबर है।
बीदर की उपायुक्त शिल्पा शर्मा ने सुरक्षा उपाय के तहत प्रभावित इलाकों के स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी।
भाषा रंजन