सीजेआई गवई उच्चतम न्यायालय के नये न्यायाधीशों को 29 अगस्त को शपथ दिलाएंगे
पारुल सुरेश
- 28 Aug 2025, 09:42 PM
- Updated: 09:42 PM
नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विपुल मनुभाई पंचोली को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पद की शपथ दिलाएंगे।
न्यायमूर्ति अराधे और न्यायमूर्ति पंचोली को 27 अगस्त को शीर्ष अदालत में पदोन्नत किया गया था। उनके शपथ ग्रहण के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश सहित 34 न्यायाधीशों की पूर्ण कार्यशील संख्या पुनः प्राप्त हो जाएगी।
न्यायमूर्ति पंचोली, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची के दो अक्टूबर 2031 को सेवानिवृत्त होने के बाद प्रधान न्यायाधीश बनने की कतार में होंगे। वह तीन अक्टूबर 2031 को प्रधान न्यायाधीश का पदभार ग्रहण करेंगे और 27 मई 2033 को सेवानिवृत्त होंगे।
उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति अराधे और न्यायमूर्ति पंचोली को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त करने के लिए 25 अगस्त को केंद्र को उनके नामों की सिफारिश की थी।
हालांकि, कॉलेजियम सदस्य एवं उच्चतम न्यायालय की न्यायाधीश बीवी नागरत्ना ने न्यायमूर्ति पंचोली को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने की कॉलेजियम की सिफारिश पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि उनकी नियुक्ति न्यायपालिका के लिए “प्रतिकूल” होगी।
शीर्ष अदालत में एकमात्र महिला न्यायाधीश नागरत्ना ने विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी असहमति दर्ज कराई थी।
मामले से वाकिफ सूत्रों ने बताया कि न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि न्यायमूर्ति पंचोली की नियुक्ति की सिफारिश आगे बढ़ाने से “कॉलेजियम प्रणाली की जो भी विश्वसनीयता बची है, वह खत्म हो सकती है।”
तेरह अप्रैल 1964 को जन्मे न्यायमूर्ति अराधे को 29 दिसंबर 2009 को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वह 15 फरवरी 2011 को स्थायी न्यायाधीश बनाए गए थे। सितंबर 2016 में उन्हें जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति अराधे को 11 मई 2018 को जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। बाद में उन्हें कर्नाटक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उन्होंने 17 नवंबर 2018 को न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।
न्यायमूर्ति अराधे ने तीन जुलाई 2022 को कर्नाटक उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण किया और 14 अक्टूबर 2022 तक इस पद पर सेवाएं दीं। उन्नीस जुलाई 2023 को उन्हें तेलंगाना उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
इसके बाद न्यायमूर्ति अराधे को बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित किया गया और उन्होंने 21 जनवरी 2025 को पदभार ग्रहण किया।
न्यायमूर्ति अराधे ने 12 जुलाई 1988 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया था। उन्होंने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में दीवानी एवं संवैधानिक, मध्यस्थता और कंपनी मामलों में वकालत की। अप्रैल 2007 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था।
वहीं, 28 मई 1968 को अहमदाबाद में जन्मे न्यायमूर्ति पंचोली को एक अक्टूबर 2014 को गुजरात उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था। दस जून 2016 को गुजरात उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति की पुष्टि की गई थी।
इसके बाद न्यायमूर्ति पंचोली को पटना उच्च न्यायालय स्थानांतरित कर दिया गया और उन्होंने 24 जुलाई 2023 को वहां के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वह 21 जुलाई 2025 को पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए।
न्यायमूर्ति पंचोली सितंबर 1991 में बार में शामिल हुए थे और गुजरात उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में वकालत शुरू की थी।
उन्होंने गुजरात उच्च न्यायालय में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के रूप में मार्च 2006 तक कार्य किया।
न्यायमूर्ति पंचोली ने दिसंबर 1993 से लगभग 21 वर्षों तक सर एलए शाह लॉ कॉलेज, अहमदाबाद में अतिथि शिक्षक के रूप में भी काम किया।
भाषा पारुल