एसआईआर के विरोध में झारखंड विधानसभा में प्रस्ताव पारित करना वोट बैंक की राजनीति: मरांडी
अविनाश
- 27 Aug 2025, 07:13 PM
- Updated: 07:13 PM
रांची, 27 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की झारखंड इकाई के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने बुधवार को झामुमो के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं के अपने ‘वोट बैंक’ को बचाने के लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करने का आरोप लगाया।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता मरांडी ने रांची में भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया, ‘‘सरकार ने केवल वोट बैंक की राजनीति को साधने के लिए राज्य विधानसभा में एसआईआर के विरोध में प्रस्ताव पारित किया। एसआईआर का विरोध करते हुए, झामुमो, कांग्रेस और राजद की गठबंधन सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि वे न केवल बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को झारखंड में बसाना चाहते हैं, बल्कि उन्हें मतदाता भी बनाना चाहते हैं।’’
एसआईआर के विरोध में एक प्रस्ताव मंगलवार को विधानसभा में पारित किया गया। यह प्रस्ताव संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर का उद्देश्य केंद्र में सत्तारूढ़ सरकार को सीधे लाभ पहुंचाना है।
मरांडी ने कहा, ‘‘झारखंड में एक तरह की चिंताजनक स्थिति है, जहां बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं के आने से राज्य की जनसांख्यिकी बदल रही है। इसका असर न केवल राज्य में, बल्कि पूरे देश में महसूस किया जाएगा। हालांकि, इसका सबसे ज्यादा असर आदिवासियों पर पड़ेगा।’’
उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेशी घुसपैठिए संथाल परगना के कई इलाकों में बस गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘वे आदिवासी लड़कियों से शादी कर रहे हैं और मुखिया और जिला परिषद सदस्य बन रहे हैं। भविष्य में, वे विधायक और सांसद भी बनेंगे।’’
मरांडी ने दावा किया कि 1951 में राज्य में आदिवासी आबादी 35.38 प्रतिशत थी, जबकि मुस्लिम आबादी 8.9 प्रतिशत थी। 2011 में, आदिवासी आबादी घटकर 26.20 प्रतिशत रह गई, जबकि मुस्लिम आबादी बढ़कर 14.53 प्रतिशत हो गई।
उन्होंने दावा किया कि 1951 में झारखंड में आदिवासियों सहित सनातनियों की कुल जनसंख्या 87.79 प्रतिशत थी, जो 2011 में घटकर 81.17 प्रतिशत रह गई। मरांडी ने कहा कि यह अंतर 2014 से मतदाता सूची में भी दिखाई देता है।
उदाहरण देते हुए, मरांडी ने दावा किया कि 2014 और 2019 के बीच देश भर में मतदाताओं की संख्या में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि झारखंड में इस अवधि के दौरान यह वृद्धि 6.2 प्रतिशत रही।
उन्होंने कहा, ‘‘2019 से 2024 के बीच देश में मतदाताओं की संख्या में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि झारखंड में यह वृद्धि 16.7 प्रतिशत दर्ज की गई। यह स्पष्ट है कि यह वृद्धि झारखंड में झामुमो, कांग्रेस और राजद की गठबंधन सरकार के शासनकाल में हुई।’’
भाजपा नेता ने कहा कि भाजपा ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सुरक्षित 22 विधानसभा क्षेत्रों में एक सर्वेक्षण किया और मतदाता सूची का मूल्यांकन किया।
सिमडेगा विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2019 से 2024 के बीच इस क्षेत्र में मतदाताओं की कुल संख्या में 10.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इस अवधि के दौरान मुस्लिम मतदाताओं की संख्या में 78.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इसी प्रकार, जगन्नाथ विधानसभा क्षेत्र में 2019 से 2024 तक कुल मतदाताओं की संख्या में 15.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि मुस्लिम मतदाताओं की संख्या में 52.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली सरकार का इरादा ऐसे घुसपैठियों के लिए वोटर कार्ड, राशन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र बनाना, उन्हें जमीन मुहैया कराना और उन्हें बसाना है ताकि वे वोट प्राप्त कर सकें।
मरांडी ने कहा, ‘‘अब, जब निर्वाचन आयोग विदेशी मतदाताओं को हटाने के लिए काम कर रहा है, झारखंड सरकार घुसपैठियों की सुरक्षा के लिए विधानसभा में प्रस्ताव लाती है। भाजपा इसका विरोध करेगी और निर्वाचन आयोग से झारखंड में एसआईआर कराने का आग्रह करेगी।’’
भाषा वैभव