इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसला सुनाने में देरी पर शीर्ष अदालत ने नाराजगी जताई
आशीष वैभव
- 26 Aug 2025, 10:47 PM
- Updated: 10:47 PM
नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को अपने मुख्य न्यायाधीशों को उन फैसलों के बारे में ब्यौरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है, जिन्हें तीन महीने तक सुरक्षित रखा गया है लेकिन सुनाया नहीं गया है।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिसंबर 2021 में एक आपराधिक अपील की सुनवाई पूरी कर लेने के बावजूद उस पर फैसला सुनाने में विफल रहने पर चिंता व्यक्त की।
पीठ ने कहा, "यह बेहद चौंकाने वाला और आश्चर्यजनक है कि अपील की सुनवाई की तारीख से लगभग एक साल तक फैसला नहीं सुनाया गया। इस अदालत को बार-बार ऐसे ही मामलों का सामना करना पड़ता है जिनमें उच्च न्यायालय में कार्यवाही तीन महीने से ज़्यादा समय तक लंबित रहती है, कुछ मामलों में छह महीने या सालों से भी ज़्यादा समय तक, जहां मामले की सुनवाई के बाद भी फैसला नहीं सुनाया जाता।"
आदेश लिखने वाले न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि ज्यादातर उच्च न्यायालयों में ऐसी व्यवस्था का अभाव है, जिससे कोई वादी संबंधित पीठ या मुख्य न्यायाधीश के पास जा सके और देरी के मुद्दे को उनके संज्ञान में ला सके।
पीठ ने कहा, "ऐसी स्थिति में, वादी न्यायिक प्रक्रिया में अपना विश्वास खो देता है और न्याय का उद्देश्य विफल हो जाता है।"
वर्ष 2001 में अनिल राय बनाम बिहार राज्य मामले में अपने फैसले का हवाला देते हुए, पीठ ने कहा कि वह समय पर फैसले सुनाए जा सकें, इसके लिए उस समय जारी किए गए विस्तृत दिशानिर्देशों को दोहरा रही है।
पीठ ने कहा, ‘‘हम निर्देशों को दोहराते हैं और प्रत्येक उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश देते हैं कि वे अपने मुख्य न्यायाधीश को उन मामलों की सूची प्रस्तुत करें जिनमें सुरक्षित रखे गए निर्णय उस महीने की शेष अवधि के भीतर नहीं सुनाए गए हैं और इसे तीन महीने तक दोहराते रहें।’’
पीठ ने कहा कि यदि तीन महीने के भीतर फैसला नहीं सुनाया गया तो रजिस्ट्रार जनरल को आदेश के लिए मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने कहा कि इसके बाद मुख्य न्यायाधीश इसे संबंधित पीठ के संज्ञान में लाएंगे ताकि वह दो सप्ताह के भीतर आदेश सुना सकें, ऐसा न करने पर मामला किसी अन्य पीठ को सौंप दिया जाएगा।
पीठ रवींद्र प्रताप शाही की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अपीलकर्ता ने आरोप लगाया कि बार-बार अनुरोध और शीघ्र सुनवाई के लिए नौ अलग-अलग अर्जियों के बावजूद, प्रतिवादी द्वारा दायर अपील बिना किसी निर्णय के लंबित रही।
भाषा आशीष