कांग्रेस पार्टी से जुड़ी कर मांग के आईटीएटी के आदेश को उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा
आशीष अविनाश
- 13 Mar 2024, 09:04 PM
- Updated: 09:04 PM
नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें 100 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया कर की वसूली के लिए कांग्रेस पार्टी को आयकर विभाग की ओर से जारी नोटिस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने पार्टी को तब नये स्थगन आवेदन के साथ आईटीएटी का रुख करने की स्वतंत्रता दी जब उसके ध्यान में लाया गया कि बैंक ड्राफ्ट के नकदीकरण के बाद आयकर विभाग द्वारा 65.94 करोड़ रुपये की राशि पहले ही वसूल की जा चुकी है।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा और न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने कहा, ‘‘आईटीएटी के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। हम याचिकाकर्ता को नए स्थगन आवेदन के माध्यम से आईटीएटी का रुख करने की स्वतंत्रता देते हुए रिट याचिका का निपटारा करते हैं। यदि कोई आवेदन प्रस्तुत किया जाता है तो आईटीएटी द्वारा शीघ्रता से उस पर विचार किया जा सकता है।’’
पीठ ने कहा कि 65.94 करोड़ रुपये बकाया मांग का लगभग 48 प्रतिशत है और यह बदली हुई परिस्थिति में एक ऐसा पहलू है जिस पर आईटीएटी द्वारा विचार किया जाएगा यदि कांग्रेस स्थगन के लिए नया आवेदन करने का विकल्प चुनती है।
पीठ ने गत मंगलवार को कांग्रेस और आयकर विभाग की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
कांग्रेस ने आयकर विभाग की ओर से 13 फरवरी को जारी वसूली नोटिस पर आईटीएटी द्वारा रोक लगाने से इनकार करने के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया था।
आकलन अधिकारी के मुताबिक 2018-19 के लिए पार्टी की आय 199 करोड़ रुपये से अधिक थी और इसके आधार पर 100 करोड़ रुपये से अधिक कर की मांग की।
कांग्रेस के वकील ने अदालत से आग्रह किया था कि उसे राहत दी जाए अन्यथा पार्टी धराशायी हो जाएगी।
आयकर विभाग के वकील ने अदालत को सूचित किया था कि मूल कर मांग 102 करोड़ रुपये थी और ब्याज सहित यह बढ़कर 135.06 करोड़ रुपये हो गई। उन्होंने कहा कि अब तक 65.94 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है।
न्यायाधिकरण ने स्थगन आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था, ‘‘... हमें नहीं लगता कि अधिनियम की धारा 226 (3) के तहत 13 फरवरी, 2024 को मूल्यांकन अधिकारी द्वारा जारी वसूली नोटिस में तथ्यों की कमी है, जिससे हमें हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है।’’
पार्टी ने इससे पहले कहा था कि आयकर न्यायाधिकरण द्वारा लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उसके खातों से लेनदेन पर रोक लगाना ‘‘ लोकतंत्र पर हमला’’ है।
भाषा आशीष