‘‘न्याय के लिए 27 साल इंतजार किया’’: बिजली छूट ‘घोटाला’ मामले में बरी हुए मंत्री मौविन गोडिन्हो
प्रीति अविनाश
- 25 Aug 2025, 07:33 PM
- Updated: 07:33 PM
पणजी, 25 अगस्त (भाषा) गोवा की एक विशेष अदालत ने राज्य के परिवहन एवं पंचायती राज मंत्री मौविन गोडिन्हो को 1998 के बिजली छूट ‘घोटाला’ मामले में सोमवार को बरी कर दिया, जिससे 27 साल से जारी कानूनी लड़ाई का अंत हो गया।
विशेष न्यायाधीश इरशाद आगा ने खुली अदालत में फैसला सुनाते हुए गोडिन्हो को कथित घोटाले से संबंधित सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। वह प्रतापसिंह राणे के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार का हिस्सा थे।
अदालत ने सह-आरोपी और बिजली विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता टी नागराजन को भी बरी कर दिया है।
अदालत के विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा है।
इस फैसले के दौरान गोडिन्हो अदालत में मौजूद थे। उनके खिलाफ तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता दिवंगत मनोहर पर्रिकर ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें यह आरोप लगाया था कि बिजली मंत्री के पद पर रहते हुए गोडिन्हो ने औद्योगिक इकाइयों को बिजली बिलों में 25 प्रतिशत की छूट दी, जिससे राज्य सरकार को 4.52 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
पर्रिकर ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि 27 जून 1998 को अधिसूचना के माध्यम से जारी की गई छूट राज्य मंत्रिमंडल से उचित परामर्श के बिना प्रदान की गई थी।
गोडिन्हो ने अदालत कक्ष के बाहर संवाददाताओं से कहा कि वह ‘‘वास्तव में खुश हैं कि अंततः न्याय हुआ” और उन्होंने लंबी कानूनी प्रक्रिया को ‘अभियोजन’ नहीं बल्कि शुरू से ही ‘राजनीतिक उत्पीड़न’ करार दिया।
गोडिन्हो सात बार से विधायक हैं। वह 2016 में भाजपा में शामिल हुए थे।
आरोप पत्र के अनुसार, 27 जून 1998 की अधिसूचना के तहत औद्योगिक इकाइयों को बिजली दरों पर 25 प्रतिशत की छूट दी गई थी, जिसके तहत बिजली आपूर्ति शुरू होने के समय से ही रियायतें दी जाने लगी थीं।
मामले की जांच करने वाली गोवा अपराध शाखा ने मई 2001 में गोडिन्हो को बिजली विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता टी. नागराजन के साथ गिरफ्तार किया था।
वर्ष 2006 में विशेष अदालत ने गोडिन्हो के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं और भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत आरोप तय किये थे।
मंत्री ने आरोपपत्र के खिलाफ मुंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ में अपील की थी।
वर्ष 2007 में उच्च न्यायालय ने माना कि मुकदमा जारी रखने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री मौजूद है।
उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2018 में गोडिन्हो की याचिका खारिज कर दी और उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा।
उच्च न्यायालय ने बाद में जनवरी 2022 में निचली अदालत को कार्यवाही में तेजी लाने और उस वर्ष 15 जनवरी तक साक्ष्य दर्ज करने का निर्देश दिया।
गोडिन्हो और सह-अभियुक्त ने मई 2022 में विशेष अदालत में कार्यवाही रोकने के लिए याचिका दायर की, जिसमें तर्क दिया गया कि बिना उचित प्रक्रिया के दोबारा जांच करना गैरकानूनी है। अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
एक विशेष न्यायाधीश ने जुलाई 2022 में मुकदमे को आगे बढ़ाने का आदेश दिया।
भाषा प्रीति