‘भ्रष्टाचार के यार’ राजनीति में नैतिकता स्थापित करने की कोशिश का कर रहे हैं विरोध : भाजपा
धीरज अविनाश
- 25 Aug 2025, 07:47 PM
- Updated: 07:47 PM
नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने संबंधी तीन विधेयकों पर विपक्ष की आपत्ति की आलोचना करते हुए सोमवार को कहा कि ‘‘भ्रष्टाचार के यार’’ राजनीति में नैतिकता लाने के सरकार के प्रयास का विरोध कर रहे हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन विधेयकों का उद्देश्य ‘‘नैतिकता, स्वच्छ राजनीति और सुशासन’’ लाना है।
उन्होंने कहा कि ये राजनीति में भ्रष्टाचार और अपराधीकरण के खिलाफ प्रभावी ढंग से लड़ाई के लिए एक ‘‘हथियार या उपकरण’’ के रूप में काम कर सकते हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया, ‘‘पूरा देश इन विधेयकों का स्वागत कर रहा है। मुट्ठी भर विपक्षी दल कह रहे हैं कि वे नैतिकता के साथ नहीं, बल्कि बेशर्मी के साथ हैं। वे कह रहे हैं कि वे अपने परिवार के साथ हैं, राजनीति में मर्यादा और सिद्धांतों के साथ नहीं... ये ‘‘भ्रष्टाचार के यार’’ विधेयकों का विरोध कर रहे हैं।’’
पूनावाला ने विधेयकों के खिलाफ विपक्षी दलों के रुख की आलोचना करते हुए उन्हें ‘‘भ्रष्टाचारियों का समूह’’ बताया और आरोप लगाया कि वे लोकतंत्र और संविधान को बचाने के नाम पर ‘‘भ्रष्टाचार’’ को बचाने के लिए एक साथ आए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘आप (विपक्षी नेता) लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर रहे हैं। आप अपने परिवार द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को बचा रहे हैं।’’
भाजपा प्रवक्ता ने उक्त विधेयकों की समीक्षा के लिए गठित की जाने वाली संयुक्त संसदीय समिति की कार्यवाही का बहिष्कार करने के लिए तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और आम आदमी पार्टी (आप) की आलोचना की और कहा कि यह उनकी ‘‘भ्रष्टाचार समर्थक मानसिकता’’ को दर्शाता है।
उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया, ‘‘कोविड महामारी के दौरान, हर कोई घर से काम कर रहा था। क्या अब देश में ‘जेल से काम’ की अवधारणा देखने को मिलेगी? क्या मुख्यमंत्री जेल के अंदर से काम करेंगे? क्या मंत्रिमंडल की बैठकें जेल परिसर में होंगी?’’
पूनावाला ने कहा कि नैतिकता का सिद्धांत संविधान सभा के दृष्टिकोण से उपजा है, जब केएम मुंशी जैसे दिग्गजों ने आशा व्यक्त की थी कि राजनीति हमेशा नैतिकता की नींव पर खड़ी रहेगी।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ‘‘उनका (दिग्गज नेताओं का) मानना था कि नेता लाल बहादुर शास्त्री के उदाहरण का अनुसरण करेंगे, जिन्होंने केवल एक आरोप के आधार पर इस्तीफा दे दिया था, या लाल कृष्ण आडवाणी और मदन लाल खुराना जैसे नेताओं का, जिन्होंने मामूली आरोपों का सामना होने पर भी पद छोड़ दिया था या केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की तरह, जिन्होंने जेल भेजे जाने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था।’’
पूनावाला ने मांग की कि विपक्षी दल देश की जनता के समक्ष अपना रुख स्पष्ट करें कि वे नैतिकता के किस पक्ष में खड़े हैं।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या वे लाल बहादुर शास्त्री जी और लाल कृष्ण आडवाणी जी की अटूट निष्ठा और ईमानदारी के साथ खड़े हैं, या सेंथिल बालाजी (तमिलनाडु के पूर्व मंत्री) और अरविंद केजरीवाल की बेशर्मी के साथ खड़े हैं, जिनके पास तिहाड़ से 150 दिनों तक (दिल्ली) सरकार चलाने का अनूठा रिकॉर्ड है?’’
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच लोकसभा में गत बुधवार को ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’, ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’ पेश किए। बाद में उनके प्रस्ताव पर सदन ने तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया।
विपक्षी दल तीन विधेयकों का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को आरोप लगाया कि ‘वोट चोरी’ के बाद, भाजपा अब ‘सत्ता चोरी’ में लगी हुई है, क्योंकि वह ‘‘30 दिनों के भीतर विपक्षी सरकारों को गिराने’’ और गिरफ्तारी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करके लोकतंत्र को ‘‘अस्थिर’’ करने के लिए मसौदा विधेयक ला रही है।
तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पहले ही कह चुकी हैं कि वे इन विधेयकों की समीक्षा के लिए गठित संयुक्त समिति में अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी को नामित नहीं करेंगी। आम आदमी पार्टी ने भी रविवार को घोषणा की कि वह भी समिति की बैठकों में भाग नहीं लेगी।
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘‘ये वही लोग हैं जो आपातकाल के सियासी वारिस होने के बावजूद देश को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाने का दावा करते हैं। ये लोकतंत्र की रक्षा की बात तो करते हैं, लेकिन इनका असली इरादा अपने बच्चों का नाम और राजनीतिक भविष्य बचाना है।’’
उन्होंने कहा कि पचास साल पहले, कांग्रेस सरकार ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को बचाने के लिए संविधान में संशोधन किया था, क्योंकि उन्हें ‘चुनावी धोखाधड़ी’ का दोषी ठहराया गया था।
पूनावाला ने कहा, ‘‘ इसके उलट, मोदी सरकार का मानना है कि अगर प्रधानमंत्री के खिलाफ आरोप लगाए गए और उन्हें 30 दिन जेल में बिताने पड़े तो उन्हें भी पद छोड़ना होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस की बेशर्मी और मोदी जी की ईमानदारी में यही अंतर है।’’
भाजपा प्रवक्ता ने संसद की संयुक्त समिति का बहिष्कार करने के लिए तृणमूल कांग्रेस, आप और सपा पर निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और अपराध का बहिष्कार करने के बजाय इन दलों के नेता राष्ट्र के सम्मान और गरिमा से जुड़ी हर चीज का बहिष्कार करने में व्यस्त हैं।
भाषा धीरज