केवल आधार से कोई मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हो सकता: भाजपा
राजकुमार संतोष
- 24 Aug 2025, 04:44 PM
- Updated: 04:44 PM
नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को विपक्ष पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद दुष्प्रचार करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि शीर्ष अदालत ने यह नहीं कहा कि सिर्फ आधार ही मतदान का अधिकार पाने के लिए वैध दस्तावेज हो सकता है।
उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि बिहार में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बाहर किए गए मतदाता अन्य दस्तावेजों के साथ आधार जमा कर सकते हैं।
भाजपा के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि आधार केवल पहचान और निवास का प्रमाण है, परंतु यह नागरिकता स्थापित नहीं करता।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहीं भी यह नहीं कहा कि इसे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए वैध दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया जाए।
उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर दुष्प्रचार कर रहा है।
मालवीय ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम कहता है यदि कोई व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है, किसी सक्षम न्यायालय द्वारा उसे मानसिक रूप से विक्षिप्त घोषित किया गया है या चुनाव में भ्रष्ट आचरण या अपराधों से संबंधित कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया है, तो उसे मतदाता सूची में पंजीकरण से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आधार अधिनियम कहता है कि यह केवल पहचान और निवास का प्रमाण है, न कि यह नागरिकता स्थापित करता।
मालवीय ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग से आधार को स्वचालित मतदाता नामांकन के लिए एक दस्तावेज के रूप में शामिल करने का अनुरोध करना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 16 और आधार अधिनियम को निरर्थक बनाता है। असल में, इसी पीठ ने 12 अगस्त को यह व्यवस्था दी थी कि आधार नागरिकता साबित करने के लिए कोई कानूनी दस्तावेज नहीं है।’’
उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने जो नहीं कहा है उसे उसके द्वारा कही गयी बात बताना उसकी अवमानना करना है।
उन्होंने कहा, ‘‘सच्चाई स्पष्ट है: एसआईआर बरकरार है, केवल आधार ही आपका नाम सूची में शामिल नहीं करवा सकता, फर्जी, बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों के साथ मृतकों के नाम हटा दिए जाएंगे तथा अगली सरकार केवल भारतीय नागरिक ही चुनेंगे - विदेशी नहीं।’’
मालवीय ने यह भी दावा किया कि बिहार में मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए 65 लाख नामों में फर्जी, मृत, बांग्लादेशी और रोहिंग्या नाम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने हटाये गये नामों की सूची प्रकाशित करने को कहा ताकि प्रभावित व्यक्ति फिर से आवेदन कर सकें, लेकिन अब तक केवल 84,305 आपत्तियां दर्ज की गई हैं, जो कुल हटाए गए नामों का मुश्किल से 1.3 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि यह त्रुटि की सीमा के निर्धारित मानक से काफी कम है।
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘स्पष्ट रूप से, 'वोट चोरी' का रोना मनगढ़ंत है।’’
भाषा
राजकुमार