जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने जेईआई से संबद्ध स्कूलों को सरकारी नियंत्रण में लेने की आलोचना की
राजकुमार देवेंद्र
- 23 Aug 2025, 09:35 PM
- Updated: 09:35 PM
श्रीनगर, 23 अगस्त (भाषा) जम्मू-कश्मीर के कई राजनीतिक दलों ने प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) से संबद्ध 215 स्कूलों का प्रबंधन सरकार द्वारा अपने हाथ में लिये जाने की शनिवार को कड़ी आलोचना करते हुए इस आदेश को वापस लेने की मांग की।
हालांकि भाजपा ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रहित में इस कदम की बड़ी जरूरत थी।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) पर ‘भाजपा का एजेंडा लागू करने’ और ‘एक स्थापित शिक्षा प्रणाली को विनाश की कगार पर धकेलने’ का आरोप लगाया।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सत्तारूढ़ पार्टी ‘अपने ही लोगों के खिलाफ जा रही है और भाजपा का एजेंडा लागू कर रही है।’
मुफ्ती ने कहा, ‘‘स्कूलों को सरकारी नियंत्रण में क्यों लिया जा रहा है? जब उपराज्यपाल के शासन में उन्हें सरकारी नियंत्रण में नहीं लिया गया तो अब लोकप्रिय सरकार में क्यों? अगर मंत्री कह रही हैं कि भ्रम की स्थिति है, तो आदेश रद्द कर देना चाहिए। मुझे लगता है कि लोगों की जिंदगी और ख़ासकर शिक्षा व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करना बहुत बुरा है।’’
पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शिक्षा मंत्री सकीना इटू से अपने लोगों के लिए खड़े होने की अपील की।
उन्होंने कहा, ‘‘यह जमात-ए-इस्लामी या एफएटी का मामला नहीं है। आपने आज दिल्ली के लोगों के लिए यह किया है, कल वे आपसे कुछ और करने के लिए कहेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि वे (नेकां) भाजपा के साथ एक ही पाले में हैं।’’
प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के सदस्यों द्वारा गठित न्याय एवं विकास मोर्चा (जेडीएफ) जम्मू-कश्मीर ने सरकार के इस कदम की निंदा करते हुए कहा कि यह एक ‘प्रशासनिक अतिक्रमण’ है और नेकां के ‘विश्वासघात के इतिहास’ की ‘दर्दनाक याद दिलाता है।’
इस संगठन और कुछ अन्य लोगों ने दावा किया कि इन स्कूलों पर ‘प्रतिबंध’ लगा दिया गया है, लेकिन शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने इससे इनकार किया और कहा कि नयी प्रबंधन समितियों के गठन तक स्कूलों की देखभाल सरकार द्वारा ही की जाएगी।
उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि कोई भी स्कूल सरकार द्वारा स्थायी रूप से अपने नियंत्रण में नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘प्रबंध समिति बनने के बाद, स्कूल उन्हें सौंप दिए जाएंगे।’’
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख एवं हंदवाड़ा के विधायक सज्जाद लोन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर सरकार ने 215 स्कूलों को जबरन अपने अधीन ले लिया है। और अनुमान लगाना मुश्किल नहीं कि यह आदेश चुनी हुई सरकार ने ही जारी किया है। शर्म और बेशर्मी ने इस सरकार में नए मायने हासिल कर लिए हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वे अब दासता में नए मापदंड स्थापित कर रहे हैं। और याद दिलाना चाहता हूं कि यह वही पार्टी है, जिसने अपने विरोधियों के खिलाफ कई फरमान जारी किए थे।’’
उन्होंने लोगों से कहा कि वे ‘‘किसी भी भ्रम में न रहें,’’ क्योंकि चुनी हुई सरकार ‘‘सभी कामों में शामिल रही है।’’
लोन ने कहा, ‘‘चाहे मेल भेजना हो या कर्मचारियों की बर्खास्तगी, वे समान रूप से भागीदार हैं। वे अतीत में भी समान भागीदार रहे हैं। और भविष्य में भी समान भागीदार रहेंगे। यह ‘ए’ टीम है। यह हमेशा से ‘ए’ टीम रही है।’’
अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने कहा कि यह बेहद खेदजनक है कि निर्वाचित सरकार ने फलाह-ए-आम ट्रस्ट (एफएटी) के स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की घोषणा करके उन पर ‘प्रतिबंध लागू’ कर दिया है।
बुखारी ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘हालांकि जमात-ए-इस्लामी पर 2019 से प्रतिबंध लगा हुआ है, लेकिन उपराज्यपाल प्रशासन ने एफएटी स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने से परहेज किया है। फिर भी, निर्वाचित सरकार ने, एक मजबूत जनादेश प्राप्त होने के बावजूद, ऐसा करने का फैसला किया है।’’
उन्होंने कहा कि सीधे नियंत्रण लेने के बजाय, सरकार इन संस्थानों में नामांकित छात्रों के शैक्षणिक भविष्य की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियम बनाकर अपने अधिकार का प्रयोग कर सकती थी।
उन्होंने कहा, ‘‘इन स्कूलों का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के संदर्भ में प्रतिबंध लगाना न तो आवश्यक था और न ही उचित।’’
अपनी पार्टी प्रमुख ने मांग की कि सरकार तुरंत अपना फैसला वापस ले।
हालांकि, भाजपा जम्मू-कश्मीर प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने सरकार के फैसले का स्वागत किया और इसे युवाओं को अलगाववादी विचारों से बचाने के लिए एक "बेहद ज़रूरी हस्तक्षेप" बताया।
ठाकुर ने कहा कि यह अधिग्रहण राष्ट्र हित में है, क्योंकि इससे हज़ारों छात्रों के लिए एक सकारात्मक और सुरक्षित शिक्षण वातावरण सुनिश्चित होगा।
भाषा राजकुमार