राज्यसभा में उठा अवैध डेयरियों से जुड़ा मुद्दा, आधुनिक गौशालाएं बनाए जाने की हुई मांग
अविनाश प्रशांत
- 20 Aug 2025, 10:31 PM
- Updated: 10:31 PM
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) सदस्य स्वाति मालिवाल ने अवैध डेयरियों से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए नयी आधुनिक गौशालाएं बनाए जाने की मांग की।
उन्होंने विशेष उल्लेख के जरिए यह मुद्दा उठाया और कहा कि बड़े शहरों में अवैध डेयरियां एक गंभीर समस्या बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि कई अवैध डेयरियां मुनाफे के लिए गायों पर अत्याचार कर रही हैं और दूध निकालने के बाद इन गायों और भैंसों को दिनभर सड़कों पर छोड़ दिया जाता है।
आप सदस्य ने कहा कि भोजन और पानी के अभाव में ऐसी गायें कचरा खाती हैं और थककर सड़कों पर बैठ जाती हैं जिससे दुर्घटनाएं होती हैं। उन्होंने कहा कि 2023 से 2025 के बीच दिल्ली में ऐसी 2,500 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुई।
उन्होंने कहा कि डेयरियों में गायों के स्वास्थ्य, टीकाकरण और पोषण की कोई व्यवस्था नहीं होती है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में सैकड़ों अवैध डेयरियां बिना लाइसेंस और नियंत्रण के चल रही हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए और आधुनिक गौशालाएं बनाई जाएं, जहां गायों को सुरक्षा, सेवा और सम्मान मिल सके।
आप के ही अशोक कुमार मित्तल ने दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल द्वारा 5जी सेवा की शुरुआत अब तक नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि देश में 5जी की शुरुआत अक्टूबर, 2022 में ‘‘डिजिटल इंडिया’’ के सपने के साथ हुई थी लेकिन ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में 5जी अब भी एक सपना ही है।
उन्होंने कहा कि सबसे चिंताजनक स्थिति बीएसएनएल की है, जो सरकार की अपनी कंपनी है। उन्होंने कहा कि जिओ और एयरटेल ने 2022 में ही यह सेवा शुरू कर दी थी लेकिन आज तक बीएसएनएल ने 5जी सेवा शुरू ही नहीं की। उन्होंने कहा कि पहले दिसंबर 2023 तक सेवा शुरू करने की बात की गयी थी, फिर जून, 2024 और उसके बाद जुलाई, 2025। लेकिन यह सेवा अब तक शुरू नहीं हुई है।
भाजपा के दिनेश शर्मा ने विद्यालयों के पाठ्यक्रम में पौराणिक और शास्त्रीय विषयों को अनिवार्य रूप से शामिल किए जाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में बच्चे हमारे समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर से दूर होते जा रहे हैं तथा तकनीकी विकास और आधुनिक शिक्षा के कारण, बच्चों में पौराणिक कथाओं, शास्त्रों और हमारे महान विचारों की जानकारी का अभाव होता जा रहा है।
शर्मा ने कहा कि शास्त्रों में निहित ज्ञान और पौराणिक कथाओं में निहित नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का स्थान बच्चों के जीवन में विशेष महत्व रखता है। ये ज्ञान न केवल उनकी नैतिकता और चरित्र निर्माण में सहायक होते हैं, बल्कि हमारे समाज की मूल परम्पराओं और सांस्कृतिक पहचान को भी संरक्षित रखते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, यह आवश्यक है कि हमारे सरकारी और निजी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में पौराणिक और शास्त्रीय विषयों को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जाए। महाभारत, रामायण, गीता और अन्य शास्त्रों में निहित शिक्षाएं बच्चों को नैतिक मूल्यों, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा दे सकती हैं।’’
भाषा अविनाश