संसदीय समिति ने साइ की वित्तीय स्थिति और खेलो इंडिया में खर्च की कमी पर चिंता जताई
नमिता सुधीर
- 20 Aug 2025, 09:04 PM
- Updated: 09:04 PM
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) को ‘गंभीर रूप से’ कम वित्तपोषित और कम कर्मचारियों वाला घोषित करते हुए खेलों पर संसद की स्थायी समिति ने कहा कि भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन ‘संतोषजनक नहीं’ है और उन्होंने सरकार की खेलो इंडिया की मुख्य योजना में धन के उपयोग की कमी पर भी चिंता जताई।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि साइ की वित्तीय स्थिति देश के अंतरराष्ट्रीय पदक प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण है और उसने खेल मंत्रालय से सिर्फ आवंटन बढ़ाने के लिए ही नहीं बल्कि उन खेलों के प्रति लक्षित दृष्टिकोण अपनाने का भी आग्रह किया जिनमें भारत के अधिक पदक जीतने की संभावना है।
इसमें कहा गया है, ‘‘उन कुछ खेल स्पर्धाओं की पहचान करें जिनमें हमारे पदक जीतने की सबसे अच्छी संभावना है और उपलब्ध संसाधनों का अधिकांश हिस्सा ऐसे खेलों में प्रतिभाओं को निखारने में लगाएं ताकि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों तक पहुंच सकें और देश के लिए पदक जीत सकें। ’’
समिति में क्रिकेटर और आप के राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह, भाजपा के संबित पात्रा और बांसुरी स्वराज सहित अन्य लोग शामिल हैं। समिति ने साइ में कर्मचारियों की कमी और कम वित्त पोषण पर ‘गंभीर’ चिंता व्यक्त की।
इसके अनुसार, ‘‘समिति यह मानने को विवश है कि साइ का बजट बेहद कम है। देश भर में और अधिक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों की जरूरत है। साइ के लिए स्पष्ट रूप से अधिक बजटीय आवंटन की जरूरत है। ’’
इसमें कहा गया, ‘‘प्राधिकरण में स्वीकृत पदों में से लगभग 45 प्रतिशत वर्तमान में खाली हैं। यह तथ्य है कि कर्मचारियों की इस कमी को अनुबंध नियुक्ति के माध्यम से पूरा किया जा रहा है जो अधिक से अधिक एक तदर्थ व्यवस्था ही हो सकती है। ’’
समिति ने कहा, ‘‘कोचिंग और वैज्ञानिक संवर्ग में कर्मचारियों की भारी कमी वास्तव में बहुत चिंताजनक है क्योंकि यह खिलाड़ियों की कोचिंग को काफी हद तक कमजोर करती है और उनके पदक जीतने की संभावनाओं को खतरे में डालती है। ’’
समिति ने ‘छह जून को हुई अपनी बैठक में खेल सचिव और साइ प्रतिनिधियों के विचार सुने थे’।
समिति ने इन रिक्तियों को भरने के लिए भर्ती अभियान की सराहना की लेकिन खेल मंत्रालय से अगले छह महीनों में यह प्रक्रिया पूरी करने और ‘कार्रवाई रिपोर्ट’ प्रस्तुत करने को कहा।
खेल मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए समिति ने कहा कि ओलंपिक जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय खेल टूर्नामेंट में पदकों के मामले में जमीनी स्तर पर उपलब्धियां संतोषजनक नहीं हैं।
इसके अनुसार, ‘‘अंतरराष्ट्रीय खेल टूर्नामेंट में हालांकि पदकों की संख्या में पहले की तुलना में सुधार हुआ है, फिर भी हमें इस पर कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। यह बेहद दुखद है कि लगभग 1.4 अरब आबादी वाला देश होने के बावजूद हम 2024 के पिछले ओलंपिक और उससे पहले के ज्यादातर ओलंपिक में एक भी स्वर्ण पदक नहीं जीत पाए। ’’
इसमें कहा गया, ‘‘इस संबंध में नीतिगत स्तर पर कुछ कमी है। समिति इस बात की सराहना करती है कि देश में खेल पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में मंत्रालय और कॉर्पोरेट योगदान के प्रयासों के कुछ सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। ’’
समिति ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान सरकार की प्रमुख खेलो इंडिया योजना के लिए धनराशि को साइ के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों में स्थानांतरित कर दिया गया है।
समिति के अनुसार, ‘‘इस स्थानांतरण ने खेलो इंडिया योजना के लिए 38.79 करोड़ रुपये की बहुमूल्य धनराशि को वंचित कर दिया है। यह और भी चिंताजनक है क्योंकि इस योजना के तहत आवंटित 122.30 करोड़ रुपये की धनराशि भी भारत की संचित निधि में वापस कर दी गई है। ’’
इसके मुताबिक, ‘‘एक केंद्रीय योजना से दूसरी योजना में धनराशि स्थानांतरित करने की ऐसी प्रथा सही नहीं है क्योंकि यह केंद्रीय योजना के खराब आकलन, योजना और कार्यान्वयन को दर्शाती है। ’’
समिति ने बताया कि खेलो इंडिया योजना को कैबिनेट द्वारा 2021-22 से 2025-26 तक के लिए मंजूरी दी गई है। समिति ने सिफारिश की कि इसके बाद इस योजना को साइ के परिचालन ढांचे में शामिल किया जाए।
इसके अनुसार, ‘‘वर्तमान खेलो इंडिया योजना 31 मार्च 2026 तक चलेगी। समिति ने नोट किया है कि खेलो इंडिया योजना के समाप्त होने से विभाग को खेलो इंडिया योजना को साइ के संगठनात्मक ढांचे में स्थायी रूप से शामिल करने और खेलो इंडिया योजना के कार्यों को पूरा करने के लिए साइ के भीतर समर्पित कर्मचारी पदों का सृजन करने का अवसर मिलता है। ’’
समिति ने कहा, ‘‘इसके अनुसार समिति अनुशंसा करती है कि खेल विभाग के बजट को बनाए रखा जाए और साइ खेलो इंडिया की मौजूदा जिम्मेदारियों को संभाले जिसमें अन्य सरकारी एजेंसियों को धन का वितरण भी शामिल है। ’’
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि खेलो इंडिया योजना के तहत खेल के मैदानों के विकास के लिए 19.50 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई थी लेकिन ‘‘पात्र संस्थाओं से प्रस्ताव नहीं मिलने के कारण’’ खर्च नहीं की गई है।
इसमें कहा गया, ‘‘इस संबंध में समिति ‘पात्र संस्थाओं’ के साथ परामर्श शुरू करने की और इस घटक के प्रति उनके उत्साह की कमी का पता लगाने तथा अगर उनकी कोई चिंता हो तो उनका उचित समाधान सिफारिश करती है। समिति इस मामले में एक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने की भी सिफारिश करती है। ’’
भाषा नमिता