जैन समुदाय को पर्यूषण पर्व संबंधी याचिका पर उच्च न्यायालय से नहीं मिली राहत
राजकुमार प्रशांत
- 20 Aug 2025, 07:36 PM
- Updated: 07:36 PM
मुंबई, 20 अगस्त (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को जैन समुदाय के सदस्यों को उनके पर्यूषण पर्व के दौरान शहर में 10 दिनों के लिए बूचड़खानों को बंद करने के अनुरोध पर कोई राहत देने से इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति संदीप मार्ने की पीठ ने कहा कि वह समुदाय की भावनाओं का सम्मान करती है, लेकिन सवाल यह है कि उसे (समुदाय को) बूचड़खानों को 10 दिनों तक बंद रखने की मांग करने का अधिकार कहां (किस वैधानिक प्रावधान) से मिलता है।
याचिकाओं में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आयुक्त द्वारा 14 अगस्त को पारित आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें बूचड़खानों को केवल दो दिनों के लिए बंद करने की अनुमति दी गई थी। आयुक्त ने तर्क दिया था कि शहर में जैन समुदाय की आबादी कम है।
जैन धर्म की दिगंबर शाखा 20 से 27 अगस्त तक और श्वेतांबर शाखा 21 से 28 अगस्त तक पर्यूषण पर्व मनायेगी।
उच्च न्यायालय ने कोई राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा कोई ठोस दलील नहीं दी गयी है।
उच्च न्यायालय ने पूछा, ‘‘हम आपकी भावनाओं का सम्मान करते हैं। लेकिन हमें बताइए कि आपको बूचड़खानों को 10 दिनों के लिए बंद करने का अधिकार कहां (किसी वैधानिक प्रावधान) से मिलता है।’’
बीएमसी ने अदालत को बताया कि वर्तमान में सरकार ने वर्ष में 16 दिन बूचड़खानों को बंद रखने की अधिसूचना जारी की है।
अदालत ने कहा कि याचिकाओं पर सुनवाई होगी और बीएमसी तथा राज्य सरकार को नोटिस जारी किया जाएगा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की।
याचिकाओं में दावा किया गया था कि पर्यूषण पर्व अहिंसा के महत्व को दर्शाता है और इसलिए इस पवित्र समय में बूचड़खाने खुले रहना जैन धर्म के लिए सही नहीं होगा।
महानगरपालिका ने उच्च न्यायालय को बताया कि बूचड़खाने दो दिन - 24 और 27 अगस्त - के लिए बंद रहेंगे।
उसने कहा कि इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकता क्योंकि शहर का देवनार बूचड़खाना केवल मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरे मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए है।
एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील प्रसाद ढकेफालकर ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि जैन समुदाय के लिए सम्राट अकबर को पर्यूषण के दौरान बूचड़खाने बंद रखने के लिए मनाना आसान था।
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