बीजद, कांग्रेस ने ओडिशा में एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की
नोमान खारी
- 20 Aug 2025, 04:03 PM
- Updated: 04:03 PM
भुवनेश्वर, 20 अगस्त (भाषा) ओडिशा में बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में पूर्ण पारदर्शिता की बुधवार को मांग की। यह प्रक्रिया राज्य में 20 वर्षों के अंतराल के बाद अगले महीने शुरू होगी।
दोनों दलों ने यह भी घोषणा की कि यदि ओडिशा में ‘‘बिहार जैसी कवायद’’ की गई तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे।
बिहार में निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पहले चरण के तहत तैयार की गई मसौदा मतदाता सूची में 65 लाख से अधिक फार्म ‘‘शामिल नहीं’’ किए गए, जिससे कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगभग 7.9 करोड़ घटकर 7.24 करोड़ रह गई।
ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) आरएस गोपालन ने कहा कि राज्य के सभी राजनीतिक दलों को एसआईआर के बारे में सूचित कर दिया गया है और सितंबर में इसे शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि संशोधन के तहत राज्य भर में मतदान केन्द्रों की संख्या 38,000 से बढ़कर 45,000 हो जाएगी, जिससे बेहतर पहुंच और मतदाता सुविधा सुनिश्चित होगी।
गोपालन ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘ओडिशा में मतदाता सूची का अंतिम गहन पुनरीक्षण 2002 में किया गया था।’’
बीजद प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने कहा, ‘‘अगर एसआईआर निष्पक्ष रूप से की जाती है, तो हमें इस पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन बिहार जैसी कवायद सभी को अलग तरह से सोचने पर मजबूर कर देगी। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए।’’
उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करना भारत निर्वाचन आयोग का काम है, लेकिन एक राजनीतिक दल ‘‘सबसे अधिक उत्साहित’’ है।
मोहंती ने कहा, ‘‘हमारे नेता नवीन पटनायक इस मामले पर सही समय पर फैसला लेंगे। मूल तथ्य यह है कि सभी वास्तविक मतदाताओं को अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने का अवसर मिलना चाहिए।’’
बीजद विधायक एवं पूर्व मंत्री पी. के. देब ने दावा किया कि यदि एसआईआर की आड़ में मतदाताओं के नाम सूची से हटाने का प्रयास किया गया तो पार्टी चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि ऐसा कथित तौर पर बिहार में किया गया है।
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओपीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि पार्टी को संदेह है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ‘‘एसआईआर कवायद का उपयोग करके ओडिशा में ‘वोट चोरी’ करने की साजिश रच रही है।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘सरकार की मंशा तब उजागर हो गई जब उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को बिहार में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से बाहर किए गए मतदाताओं का ब्योरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया और उस पर सूची प्रकाशित करने के लिए दबाव बनाया।’’
दास ने आरोप लगाया, ‘‘कांग्रेस चाहती है कि पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल किया जाए और अपात्रों को बाहर रखा जाए। लेकिन भाजपा का प्रवक्ता बन चुके निर्वाचन आयोग की कार्यशैली और कदम संतोषजनक नहीं हैं।’’
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ओडिशा में मतदाता सूची में ‘‘छेड़छाड़’’ की गई तो राज्यव्यापी आंदोलन होगा।
भाषा
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