दमनकारी, लोकतंत्र पर सीधा हमला : वाम दलों ने संसद में पेश विधेयकों पर कहा
धीरज पवनेश
- 20 Aug 2025, 08:10 PM
- Updated: 08:10 PM
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) वामपंथी दलों ने बुधवार को कहा कि गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों को हटाने का प्रावधान करने वाले नए विधेयक लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर सीधा ‘‘हमला’’ हैं और उन्होंने इसका ‘‘पूरी ताकत से’’ विरोध करने का संकल्प लिया।
इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) महासचिव एमए बेबी ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘मोदी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को 30 दिनों की हिरासत में रखने के बाद पद से हटाने के तीन विधेयक उसके नव-फासीवादी चरित्र को उजागर करते हैं। हमारे लोकतंत्र पर यह सीधा हमला है और माकपा डटकर इसका विरोध करेगी। हम सभी लोकतांत्रिक ताकतों से इस दमनकारी कदम के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उच्च पदों पर अपराध से निपटने के नाम पर पेश किए गए ये विधेयक वास्तव में सरकार के असली इरादे को उजागर करते हैं क्योंकि आरएसएस-नियंत्रित मोदी सरकार का इतिहास निर्वाचित राज्य सरकारों को कमजोर करने का रहा है। ‘एसआईआर’ के साथ ही ये हमारे लोकतंत्र को कुचलने की एक जबरदस्त कोशिश का प्रतीक हैं। सभी लोकतांत्रिक ताकतों को इसका विरोध करना चाहिए।’’
माकपा के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने इन विधेयकों को ‘‘दमनकारी’’ बताया।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा कथित तौर पर ‘जनहित, कल्याण और सुशासन’ के नाम पर लाया गया नया विधेयक वास्तव में दमनकारी है और इसका उद्देश्य विपक्ष शासित राज्य सरकारों को अस्थिर करना है, साथ ही भारत की संघीय संरचना को कमजोर करना है।’’
ब्रिटास ने कहा, ‘‘बदले की राजनीति के इस दौर में, जहां विपक्षी नेताओं के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, इन प्रावधानों का दुरुपयोग गुप्त राजनीतिक मंशाओं के लिए किया जाएगा।’’
माकपा नेता ने कहा कि विधेयक में ‘‘संवैधानिक नैतिकता’’ का उल्लेख इसकी भावना के विपरीत है, क्योंकि यह उस स्थापित सिद्धांत से अलग है कि अयोग्यता और सजा अदालतों द्वारा दोषसिद्धि से जुड़ी होनी चाहिए, न कि केवल आरोपों या गिरफ्तारी से।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सिद्धांत जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए) की धारा 8 में स्पष्ट रूप से निहित है। आज के घातक राजनीतिक माहौल में, जहां व्यक्तियों पर आसानी से आरोप लगाए जा सकते हैं, उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है और लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है, इस कानून का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और लोकतांत्रिक मानदंडों को कमजोर करने के लिए किया जाएगा।’’
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्यसभा सदस्य पी.संदोष कुमार ने कहा कि तीनों विधेयक ‘‘प्रतिशोध की राजनीति के द्वार’’ खोल देंगे।
कुमार ने कहा, ‘‘ये विधेयक बदले की राजनीति के द्वार खोलने का एक हथियार हैं। भाजपा, जो राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग करती है, अब निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने की खुली छूट पा लेगी। किसी भी मुख्यमंत्री या मंत्री को गिरफ्तार किया जा सकता है और तुरंत हटाया जा सकता है, जिससे सत्तारूढ़ दल यह तय कर सकेगा कि राज्यों में कौन शासन करेगा। यह संघवाद और राजनीति में समान अवसर को समाप्त करता है।’’
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि ये विधेयक संघवाद के ‘‘अंत की शुरुआत’’ होंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से लेकर ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रणाली के लिए लगातार दबाव बनाने तक, चुनाव प्रणाली में सुनियोजित छेड़छाड़ को देखते हुए यह संशोधन भारत में संघवाद और संसदीय लोकतंत्र के अंत की शुरुआत साबित होंगे।’’
भट्टाचार्य ने एक बयान में कहा, ‘‘भाजपा की राजनीति और नीतियों का विरोध करने वाली हर राज्य सरकार अब स्थायी रूप से अस्थिर और निष्क्रिय हो जाएगी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)का हर सहयोगी भाजपा के साथ आने के लिए बेचैन रहेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ईडी, सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो), आयकर, एनआईए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का हथियार के तौर पर इस्तेमाल और संकीर्ण पक्षपातपूर्ण हितों के लिए राज्यपालों के संवैधानिक पद का दुरुपयोग, एक ऐसी प्रवृत्ति है जिसकी कई मौकों पर यहां तक कि उच्चतम न्यायालय द्वारा भी गंभीर रूप से निंदा की गई है, अब इस विधेयक के अधिनियमित होने से कानूनी वैधता प्राप्त कर लेगी।’’
सरकार ने बुधवार को लोकसभा में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया। इस विधेयक में प्रधानमंत्री, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रहने पर पद से हटाने का प्रावधान है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’ के अलावा ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’ पेश किया। बाद में उनके प्रस्ताव पर सदन ने तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया।
भाषा धीरज