पिता को खोने के एक साल बाद, दिल्ली में दुकान में आग लगने से परिवार में एकमात्र कमाऊ लड़की की हुई मौत
प्रशांत सुरेश
- 19 Aug 2025, 09:21 PM
- Updated: 09:21 PM
(सौम्या शुक्ला)
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) पिता को खोने के लगभग एक साल बाद पायल के परिवार पर उसकी मौत के साथ ही एक बार फिर विपत्ति आ पड़ी। अब इस परिवार को एकमात्र कमाऊ सदस्य (पायल) के अंतिम संस्कार के लिए धन जुटाने में भी कठिनाई हो रही है।
पायल राजा गार्डन अग्निकांड में दम घुटने से जान गंवाने वाले चार लोगों में शामिल थी। बीस-वर्षीय पायल के परिवार में लगभग बिस्तर पर पड़ी रहने वाली मां, पूरी तरह उस पर निर्भर तीन भाई-बहन और एक विवाहित बड़ी बहन हैं।
पश्चिमी दिल्ली के महाजन इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रथम तल स्थित गोदाम में सोमवार अपराह्न आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई।
पायल के अलावा, तीन और लोगों, आयुषी (22), अमनदीप कौर (22) और रवि (28) की दम घुटने से मौत हो गई। पांचवें, संदीप शर्मा (25) का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
जब आग लगी, तब दुकान के सभी पांच कर्मचारी इमारत की दूसरी मंजिल पर एक कमरे में दोपहर का भोजन कर रहे थे।
पायल लगभग दो महीने से दुकान पर काम कर रही थी।
पायल के मामा विजय कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि परिवार को अभी तक भांजी का शव नहीं मिला है।
उन्होंने कहा, “हमें बताया गया कि पायल दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। हमें उसकी गंभीरता का अंदाजा नहीं था। बाद में पता चला कि शॉर्ट-सर्किट की वजह से आग लग गई थी और धुआं इतना घना था कि पायल की दम घुटने से मौत हो गई। उन्होंने अभी तक हमें शव नहीं दिखाया है।”
कुमार ने कहा, “उसका परिवार गरीब है और उसके पिता का निधन हुए एक साल से भी कम समय हुआ है। जिसके बाद उनका भरण-पोषण करने वाला कोई नहीं है। उनके पास पायल का अंतिम संस्कार करने के लिए भी पैसे नहीं हैं।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि दुकान का मालिक एक बार भी पीड़ित परिवार से मिलने नहीं आया।
उन्होंने कहा, “घटना तो हो ही चुकी है। अब कम से कम मुआवजा तो दे ही सकते हैं। यह उनकी लापरवाही की वजह से हुआ है। हम गरीब लोग हैं, हमारा कोई साथ नहीं देता। हमारी मांग है कि आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए और परिवार को मुआवजा दिया जाए।”
पायल की मां प्रेरणा ने कहा कि उन्होंने अभी तक अपनी बेटी का शव नहीं देखा है।
उन्होंने कहा, “उन्होंने हमें एक जगह से दूसरी जगह घुमाया, लेकिन अभी तक हमें बेटी का शव नहीं दिखाया है। हमें घटना के बारे में शाम साढ़े छह बजे पता चला। हमारी पूरी ज़िंदगी तबाह हो गई है।”
इस बीच हादसे में जान गंवाने वाली एक अन्य लड़की अमनदीप कौर अपनी स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए धन बचाना चाहती थी।
उसके रिश्तेदार बलजीत (45) ने दुकान पर अकाउंटेंट का काम करने वाली अमनप्रीत को एक “प्रतिभाशाली छात्रा” बताया।
उन्होंने कहा, “बीकॉम में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद यह उसकी पहली नौकरी थी। उनके सपने बड़े थे और वह स्नातकोत्तर करना चाहती थी।”
अमनदीप कौर के परिवार में उसकी बड़ी बहन (25) है, जो नौकरी करती है, एक भाई (17) है, जो 11वीं कक्षा में पढ़ता है, तथा उसकी 48 वर्षीय मां हैं। उसके 50-वर्षीय पिता की करोल बाग में मुद्रा विनिमय की दुकान है।
बलजीत ने आग के लिए दुकान मालिकों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
वहीं आयुषी के एक रिश्तेदार ने दावा किया कि उसने खराब प्रबंधन वाली इमारत के बारे में चिंता जताई थी, जिसमें बुनियादी सुरक्षा मानदंडों का अभाव था और वह दिवाली तक नौकरी छोड़ना चाहती थी।
उन्होंने कहा, “आयुषी पिछले डेढ़ साल से दुकान में काम कर रही थी और उसने मालिक को इस तरह की घटना होने की आशंका के बारे में बताया था, लेकिन उन्होंने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया।”
आयुषी के पिता वेल्डर का काम करते हैं और उसका एक छोटा भाई और बहन हैं।
जैसे ही आग बिना खिड़की वाली दूसरी मंजिल तक फैली, वह गैस से भरा एक चैंबर बन गयी। आग से बाहर निकलने का कोई रास्ता न होने के कारण पांचों कर्मचारी फंस गए।
भाषा
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