बंगाल के प्रवासी श्रमिकों के लिए राज्यपाल ने सुधारों का प्रस्ताव किया
सिम्मी धीरज
- 19 Aug 2025, 08:28 PM
- Updated: 08:28 PM
(सुदीप्तो चौधरी)
कोलकाता, 19 अगस्त (भाषा) पश्चिम बंगाल के बाहर कथित रूप से प्रताड़ित किए जा रहे राज्य के प्रवासी मजदूरों के पुनर्वास के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा एक योजना की घोषणा किए जाने के एक दिन बाद, राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने इन श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए कुछ सिफारिशें पेश की हैं। राजभवन के एक उच्च पदस्थ सूत्र ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
सूत्र ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों को भेजी गई ये सिफारिशें उन राज्यों में शोषण की कथित घटनाओं, सामाजिक सुरक्षा के अभाव और कई बंगाली प्रवासी कामगारों के खराब जीवन स्तर को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आई हैं जहां वे काम करते हैं।
उन्होंने बताया कि बोस ने केंद्र को भेजी अपनी सिफारिशों में ‘पश्चिम बंगाल प्रवासी श्रमिक पंजीकरण पोर्टल’बनाने, अन्य राज्यों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने और प्रमुख प्रवासी केंद्रों में श्रम कल्याण अधिकारियों (एलडब्ल्यूओ) की नियुक्ति किए जाने पर जोर दिया है।
राज्यपाल द्वारा की गई सिफारिशों की एक प्रति ‘पीटीआई’ (प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया) के पास है।
अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘उन्होंने प्रवासी मजदूरों के लिए किफायती छात्रावास बनाए जाने, ‘एक परिवार एक राशन कार्ड’ योजना के स्थान पर ‘एक नागरिक एक राशन कार्ड’ योजना शुरू किए जाने और उन जिलों में ‘कौशल प्रशिक्षण केंद्र’ स्थापित करने की सिफारिश की है जहां बड़ी संख्या में प्रवासी जाते हैं।’’
बोस ने अनौपचारिक रूप से अर्जित कौशल के प्रमाणन की सुविधा, चौबीसों घंटे बहुभाषी हेल्पलाइन, कानूनी सहायता एवं मध्यस्थता सेवाओं की स्थापना और ‘प्लेसमेंट (नौकरी दिलाने में मदद करने वाली) एजेंसियों’ की विशेष निगरानी किए जाने की मांग की है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘प्रस्तावित पश्चिम बंगाल प्रवासी श्रमिक पंजीकरण पोर्टल एक बहुभाषी, आधार से जुड़ा मंच होगा जिसे प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण और उन पर नजर रखने के लिए बनाया जाएगा। पंजीकरण के बाद, प्रत्येक श्रमिक को भौतिक और डिजिटल दोनों स्वरूपों में एक ‘प्रवासी श्रमिक कार्ड’ प्राप्त होगा, जो राज्यों में एक पहचान दस्तावेज के रूप में काम करेगा।’’
उन्होंने बताया कि यह कार्ड स्वास्थ्य सेवा, सूक्ष्म बीमा और बैंकिंग जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुंच प्रदान करेगा, जिससे श्रमिकों की अनौपचारिक या शोषणकारी नेटवर्क पर निर्भरता कम होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘बंगाल सरकार और महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, गुजरात एवं दिल्ली जैसे राज्यों के बीच औपचारिक समझौता ज्ञापनों संबंधी राज्यपाल का प्रस्ताव न्यूनतम वेतन की व्यवस्था करेगा तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा और शिकायत निवारण जैसे क्षेत्रों में जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।’’
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बोस की सिफारिशों की व्यापक प्रकृति पश्चिम बंगाल में प्रवासी श्रमिक नीति की अवधारणा में एक उल्लेखनीय बदलाव का प्रतीक है।
नौकरशाह ने कहा, ‘‘हालांकि इसका कार्यान्वयन राज्य और केंद्र सरकार के हाथों में है लेकिन अगर इन प्रस्तावों को अपनाया जाता है तो ये भारत के उन अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श बन सकते हैं जहां से प्रवासी अन्य राज्यों में जाते हैं।’’
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रवासी मजदूरों के पुनर्वास के लिए सोमवार को ‘श्रमश्री’ योजना की घोषणा की थी और आरोप लगाया था कि वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों में ‘पूर्व नियोजित हमलों’ का सामना कर रहे हैं।
बनर्जी ने कहा था कि इस योजना के तहत, बंगाल लौटने के इच्छुक प्रवासी मजदूरों को 12 महीने के लिए या रोजगार मिलने तक 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
भाषा सिम्मी