केरल में कुलपतियों की नियुक्ति: न्यायालय ने पूर्व न्यायाधीश धूलिया को समिति का प्रमुख नियुक्त किया
सुरेश दिलीप
- 18 Aug 2025, 10:31 PM
- Updated: 10:31 PM
नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने केरल के दो तकनीकी विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर राज्यपाल एवं राज्य सरकार के बीच जारी ‘‘गतिरोध’’ को समाप्त करने के लिए सोमवार को शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया, जो उम्मीदवारों की सूची बनाएगी।
न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि खोज-सह-चयन समिति, एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और केरल डिजिटल विज्ञान नवाचार एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के लिए तीन-तीन नामों की सूची जल्द से जल्द तैयार करेगी।
पीठ ने कहा, ‘‘हमारा दृढ़ विश्वास है कि इस गतिरोध को जल्द से जल्द दूर किया जाना चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में, हमने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुधांशु धूलिया को दोनों विश्वविद्यालयों के लिए खोज-सह-चयन समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है।’’
न्यायमूर्ति धूलिया नौ अगस्त को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।
न्यायालय ने न्यायमूर्ति धूलिया को दोनों विश्वविद्यालयों के लिए एक अलग या संयुक्त समिति गठित करने के लिए अधिकृत किया, जिसमें पांच सदस्य होंगे, जिनमें केरल के राज्यपाल और राज्य सरकार द्वारा अनुशंसित दो-दो सदस्य शामिल होंगे।
पीठ ने उच्चतम न्यायालय की एक अन्य पीठ द्वारा पारित आदेशों का हवाला दिया, जिसने पश्चिम बंगाल के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति से संबंधित इसी तरह के विवाद को सुलझाने के लिए भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश यू यू ललित को खोज-सह-चयन समिति का प्रमुख नियुक्त किया था।
शीर्ष न्यायालय ने कहा कि न्यायमूर्ति धूलिया दो सप्ताह के भीतर समिति का गठन करेंगे और केरल सरकार का शिक्षा विभाग चार सप्ताह के भीतर जनता से कुलपति पद के लिए नाम आमंत्रित करते हुए एक विज्ञापन जारी करेगा।
पीठ ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा संभावित उम्मीदवारों के नामों की जांच की जानी चाहिए और खोज-सह-चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए, जो प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए तीन नामों की एक सूची तैयार करेगी।
शीर्ष अदालत ने 30 जुलाई को केरल सरकार (वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता) और राज्यपाल की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से दोनों विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति के विवाद को सुलझाने के लिए ‘‘सद्भावपूर्वक कोई व्यवस्था बनाने’’ को कहा था।
भाषा सुरेश