अत्याधुनिक ड्रोन के इस्तेमाल से यूक्रेन के अग्रिम मोर्चे पर घायलों की निकासी में आ रही कठिनाई
एपी आशीष संतोष
- 17 Aug 2025, 06:41 PM
- Updated: 06:41 PM
कीव, 17 अगस्त (एपी) पूर्वी यूक्रेन में अग्रिम मोर्चे पर सटीक निशाना साधने वाले ड्रोन के इस्तेमाल के कारण ज्यादा जवानों की मौत हो रही है या वे गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं और उन्हें चिकित्सा सेवा भी जल्द नहीं मिल पाती है।
रूस के हमले के शुरुआती महीनों में, घायलों को निकालने वाले वाहन अग्रिम पंक्ति तक पहुंच सकते थे, जिससे उन्हें बचाने का बेहतर मौका मिलता था। अब ‘फर्स्ट-पर्सन-व्यू’ (एफपीवी) ड्रोन के भारी इस्तेमाल ने अग्रिम पंक्ति से 20 किलोमीटर तक के क्षेत्रों को ‘जानलेवा क्षेत्र’ में बदल दिया है।
चिकित्सकों का कहना है कि अब एफपीवी से ही जवानों के घायल होने या जान गंवाने के ज़्यादातर मामले आते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के ड्रोन के जरिए सटीकता से हमला करने से पहले लक्ष्य को देखने की सुविधा मिलती है।
यूक्रेन की 59वीं ब्रिगेड की चिकित्सा इकाई के कमांडर बुहोर ने बताया कि एफपीवी के बढ़ते इस्तेमाल ने घायलों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना और भी मुश्किल बना दिया है। उन्होंने कहा, "सब कुछ कठिन होता जा रहा है। हमारे काम करने का तरीका बदल रहा है और सुरक्षा का स्तर भी बदल रहा है।"
ड्रोन से गिराए जाने वाले विस्फोटकों के प्रभाव से मामूली तौर पर कटने और जलने से लेकर गंभीर घाव, अंग भंग होना, कुछ भी हो सकता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि टुकड़े कहां लगे हैं और उनका आकार क्या है।
यह पूछे जाने पर कि क्या इन परिस्थितियों के कारण घायलों की मृत्यु दर में वृद्धि हुई है, उन्होंने कहा, "काफी हद तक। आप कुछ नहीं कर सकते। उन एफपीवी से सब कुछ जल जाता है- सब कुछ, यहां तक कि टैंक भी।"
यूक्रेन की 108वीं दा विंची वॉल्व्स बटालियन की "उल्फ" चिकित्सा सेवा की एनेस्थेसियोलॉजिस्ट डारिना बोइको ने कहा, "दूर तक पहुंच सकने वाले ड्रोन की वजह से, घायलों के लिए ही नहीं, बल्कि उन्हें बाहर निकालने वाले कर्मचारियों के लिए भी ख़तरा है।" बोइको ने कहा कि इसलिए अब मुख्य कठिनाई उनके परिवहन की है।
बुहोर ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान अब स्व-सहायता और स्व-निकासी पर बहुत अधिक जोर दिया जाता है, लेकिन ऐसे ‘जानलेवा क्षेत्र’ का अर्थ है सैनिक कई दिनों या हफ्तों तक एक ही स्थान पर फंसे रह सकते हैं- खासकर यदि घाव तत्काल जीवन के लिए खतरा न हो।
बुहोर 2022 के अंत से पोक्रोवस्क क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इस तरह के ड्रोन के इस्तेमाल के कारण सैनिकों को कई बार पीछे सुरक्षित स्थान तक हटने के लिए मजबूर होना पड़ता है। पिछले ढाई वर्षों में, बुहोर और उनकी टीम 17 बार मोर्चे की तैनाती स्थल से स्थानांतरित हो चुकी है।
एपी आशीष