भारत चावल पर सब्सिडी नहीं, इसका बिक्री मूल्य इसकी लागत से अधिक: पिनराई विजयन
राजेश राजेश रमण प्रेम
- 13 Mar 2024, 08:42 PM
- Updated: 08:42 PM
तिरुवनंतपुरम, 13 मार्च (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने बुधवार को केंद्र सरकार पर 'भारत चावल' की बिक्री लागत से अधिक कीमत पर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी नजर सिर्फ मुनाफा कमाने पर है।
विजयन ने केरल सरकार की तरफ से 'सबरी के चावल' को पेश करने के बाद कहा कि राज्य-संचालित 'सप्लाईको' के जरिये इस चावल की बिक्री की जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने भारत चावल पर कोई सब्सिडी नहीं दी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस चावल को 18.59 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर खरीदा और फिर जनता को 29 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेच रही है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 'भारत' ब्रांड के तहत बेचे जा रहे चावल को ही केरल में सप्लाईको की दुकानों के जरिये 24 रुपये प्रति किलोग्राम और राशन की दुकानों पर 10.9 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचा जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘ कुल मिलाकर, केंद्र लाभ की इच्छा के साथ-साथ राजनीतिक लाभ के लिए भारत चावल को बेच रहा है।’’
उन्होंने कहा कि सबरी के चावल को राज्य सरकार 40 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदती है और फिर इसे सप्लाईको के माध्यम से रियायती दरों पर बेचेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह राज्य सरकार लोगों के लाभ के लिए खाद्यान्न आपूर्ति के मामले में प्रभावी बाजार हस्तक्षेप कर रही है। राज्य सरकार लोगों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए चावल बेच रही है। यह दोनों सरकारों के दृष्टिकोण में अंतर को दर्शाता है।’’
केंद्र सरकार ने फरवरी के पहले सप्ताह में भारत ब्रांड के तहत चावल की बिक्री शुरु की थी। यह चावल भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ लिमिटेड (नाफेड), भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) और खुदरा बिक्री श्रृंखला- केन्द्रीय भंडार को प्रदान किया जाता है।
ये एजेंसियां चावल को पांच किलो और 10 किलो के बैग में पैक करती हैं और 'भारत' ब्रांड के तहत अपनी खुदरा दुकानों के माध्यम से बेचती हैं।
केंद्र सरकार ने खुली बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के माध्यम से समान दर पर थोक उपयोगकर्ताओं को चावल की बिक्री पर फीकी प्रतिक्रिया मिलने के बाद एफसीआई चावल की खुदरा बिक्री का सहारा लिया है।
भाषा राजेश राजेश रमण