एमएसएमई से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग का पोर्टल बनाने का सुझाव
प्रेम रमण
- 13 Mar 2024, 07:25 PM
- Updated: 07:25 PM
नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) नीति आयोग ने ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा देने और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए वित्त तक आसान पहुंच बनाने के लिए निर्यातकों को एक ही जगह सभी सूचनाएं उपलब्ध कराने को लेकर एक पोर्टल बनाने की जरूरत बताई है।
आयोग ने 'एमएसएमई से निर्यात को प्रोत्साहन' शीर्षक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में निर्यातकों को जानकारी तक पहुंचने में मदद करने वाले कई पोर्टल हैं लेकिन इनमें से ज्यादातर पोर्टल अधूरी या पुरानी जानकारी ही देते हैं।
नीति आयोग के मुताबिक, एक ऐसा पोर्टल बनाने की जरूरत है जहां एमएसएमई से संबंधित सूचनाएं जुटाई जा सकेंगी। इस एकल पोर्टल का संचालन कृत्रिम मेधा (एआई) की मदद से किया जाए।
यह पोर्टल बाजार शुल्क, आवश्यक कागजी कार्रवाई, वित्त के स्रोत, सेवा प्रदाता, उपलब्ध प्रोत्साहन और संभावित ग्राहक से संबंधित सभी सवालों के जवाब देगा।
रिपोर्ट में ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए वार्षिक वित्तीय सुलह प्रक्रिया शुरू करने, अस्वीकार या रिटर्न पर आयात शुल्क में छूट देने, 1000 डॉलर तक के निर्यात के लिए सुलह शर्तों पर छूट देने और ई-कॉमर्स निर्यात के लिए एक ‘ग्रीन चैनल’ मंजूरी देने का भी सुझाव दिया गया है।
इसके मुताबिक, "ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा देने के लिए रिकॉर्ड में दर्ज निर्यातक ईओआर और विक्रेता एसओआर के बीच अंतर करना और किसी प्रतिशत सीमा के बगैर चालान मूल्य में कमी की मंजूरी देना जरूरी है।"
नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि एमएसएमई के लिए वित्त तक पहुंच नियमित रूप से प्रमुख बाधा रही है और निर्यात ऋण गारंटी (ईसीजीसी) को प्रोत्साहन देने से एमएसएमई के लिए कार्यशील पूंजी की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है।
इसमें कहा गया है, "ईसीजीसी योजनाओं की वर्तमान हिस्सेदारी केवल 10 प्रतिशत है और सरकार को इसे 50 प्रतिशत या उससे अधिक बढ़ाने के लिए एक प्रोत्साहन पैकेज देना चाहिए।"
उत्पादों के निर्यात को आसान बनाने पर आयोग ने एमएसएमई को एक अवधि के लिए कुछ अनुपालन जरूरतों से छूट देने का सुझाव भी दिया है। प्रोत्साहन के समयबद्ध वितरण के लिए एक प्रक्रिया भी शुरू करने को कहा है ताकि एमएसएमई की कार्यशील पूंजी अवरुद्ध न हो।
रिपोर्ट कहती है कि भारतीय एमएसएमई हस्तशिल्प, हथकरघा वस्त्र, आयुर्वेद और हर्बल उत्पाद, चमड़े के सामान, नकली आभूषण और लकड़ी के उत्पादों के निर्यात बाजारों में भाग ले सकते हैं और प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, "वैश्विक स्तर पर ये क्षेत्र 340 अरब डॉलर से अधिक का बड़ा बाजार बनाते हैं जबकि उनका घरेलू बाजार काफी छोटा है।"
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