कुणाल घोष को तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बंगाल महासचिव पद से हटाया गया
अविनाश माधव
- 01 May 2024, 08:44 PM
- Updated: 08:44 PM
कोलकाता, एक मई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी के रुख से अलग बयान देने के लिए बुधवार को कुणाल घोष को पार्टी के पश्चिम बंगाल महासचिव पद से हटा दिया। तृणमूल ने यह कदम कोलकाता उत्तर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार तापस रॉय के साथ उनके मंच साझा करने और उनकी प्रशंसा करने के कुछ घंटों बाद उठाया।
घोष पार्टी में नयी पीढ़ी के नेताओं को अधिक महत्व दिए जाने पर जोर देते रहे हैं और उन्होंने मार्च में पार्टी प्रवक्ता एवं राज्य महासचिव पद से इस्तीफा देने की इच्छा व्यक्त की थी।
इसके बाद पार्टी ने प्रवक्ता पद से उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया लेकिन उन्हें महासचिव पद पर बने रहने को कहा।
तृणमूल ने एक बयान में कहा, “कुणाल घोष ऐसे विचार व्यक्त कर रहे हैं जो पार्टी के रुख से मेल नहीं खाते हैं…... श्री घोष को पहले पार्टी प्रवक्ता पद से मुक्त कर दिया गया था। अब उन्हें राज्य संगठन के महासचिव पद से हटा दिया गया है।”
राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन द्वारा हस्ताक्षरित एक बयान में मीडिया संगठनों से कहा गया है कि वे घोष के विचारों को पार्टी के रुख से नहीं मिलाएं और ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
बयान में कहा गया है, "यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि ये उनके निजी विचार हैं... केवल एआईटीसी (अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस) मुख्यालय से जारी बयानों को ही पार्टी का आधिकारिक रुख माना जाना चाहिए।"
पार्टी प्रवक्ता पद से हटाए जाने के बावजूद घोष मौजूदा लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान पार्टी मुख्यालय से लगातार संवाददाता सम्मेलन करते रहे हैं।
तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि मार्च में उन्हें राज्य प्रवक्ता के पद से हटाया जाना एक चेतावनी थी और राज्य महासचिव पद से हटाया जाना अंतिम कार्रवाई है।
इससे पहले घोष ने कोलकाता उत्तर लोकसभा क्षेत्र से तृणमूल उम्मीदवार सुदीप बंदोपाध्याय की रैली में हिस्सा नहीं लिया। घोष एक रक्तदान कार्यक्रम में शामिल हुए जहां भाजपा उम्मीदवार तापस भी मौजूद थे।
घोष ने कार्यक्रम में कहा, ‘‘तापस रॉय एक सच्चे नेता हैं। उनके दरवाजे पार्टी कार्यकर्ताओं और लोगों के लिए हमेशा खुले हैं। मैं उन्हें कई दशकों से जानता हूं। दुर्भाग्य से हमारे रास्ते अब अलग-अलग हैं... मैं आशावान हूं कि चुनाव स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होंगे तथा इस सीट को बचाये रखने के लिए किसी अनैतिक तरीके का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। लोगों को स्वतंत्र रूप से वोट डालने दें।’’
तृणमूल कांग्रेस के चार बार के विधायक रॉय मार्च में तब भाजपा में चले गये थे जब तृणमूल ने अपने निवर्तमान सांसद सुदीप बंदोपाध्याय को कोलकाता उत्तर से फिर प्रत्याशी बना दिया। बाद में भाजपा ने रॉय को बंदोपाध्याय के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा।
घोष को उनके पद से हटाए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए रॉय ने कहा, "वे किसे निलंबित करेंगे या निष्कासित करेंगे, यह उनका आंतरिक मामला है। मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना है। लेकिन यह साबित करता है कि तृणमूल राजनीति में शिष्टाचार में विश्वास नहीं करती है।"
भाषा अविनाश