मजबूत नेता और एजेंसियों जिनकी रक्षा की जिम्मेदारी उठाते हैं, उन्हें ही बनाते हैं शिकार : अदालत
प्रशांत नरेश
- 01 May 2024, 04:40 PM
- Updated: 04:40 PM
नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने धनशोधन मामले में एक आरोपी का इलाज करने वाले डॉक्टरों के बयान दर्ज करने के लिए सख्त पीएमएलए कानून का उपयोग करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की आलोचना करते हुए कहा कि इतिहास सिखाता है कि मजबूत नेता, कानून और एजेंसियां आम तौर पर जिनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं उन्हीं को पलटकर निशाना बनाते हैं।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने यह टिप्पणी अमित कत्याल द्वारा दाखिल एक आवेदन पर फैसला करते हुए की, जिसमें रेलवे नौकरी के बदले जमीन घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में चिकित्सा आधार पर पांच फरवरी को दी गई अंतरिम जमानत को बढ़ाने का अनुरोध किया गया था।
न्यायाधीश ने 30 अप्रैल को अंतरिम जमानत के विस्तार को यह देखते हुए अस्वीकार कर दिया कि कात्याल “स्पष्ट रूप से ठीक होने की राह पर हैं और जेल परिसर के भीतर निर्धारित जीवन शैली का पालन कर सकते हैं।”
न्यायाधीश ने हालांकि कहा कि कात्याल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास पाहवा ने उन डॉक्टरों के बयान दर्ज करने में ईडी द्वारा पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) की धारा 50 के उपयोग पर आपत्ति जताई थी, जिनसे आरोपी अंतरिम जमानत मिलने के बाद अपोलो अस्पताल, दिल्ली और मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम में इलाज करा रहा था।
न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी के साथ डॉक्टरों की साठगांठ के रत्ती भर भी आरोप के बिना ईडी के लिए एक सामान्य नागरिक को “धारा 50 की कड़ी प्रक्रिया” के अधीन करने का कोई औचित्य नहीं है।
न्यायाधीश ने कहा, “यदि इतिहास से कोई सबक सीखा जाए तो यही देखने को मिलेगा कि मजबूत नेता, कानून और एजेंसियां आम तौर पर उन्हीं नागरिकों को निशाना बनाती हैं जिनकी रक्षा का वे संकल्प लेते हैं। ऐसे कानूनों को हमेशा औसत नागरिकों के खिलाफ लागू करने का आरोप लगाया जाता है। कानून का पालन करने वाले निजी अस्पतालों के डॉक्टरों के खिलाफ ईडी द्वारा धारा 50 का उपयोग इस धारणा में एक समकालीन योगदान है।”
उन्होंने कहा कि सख्त कानूनों के इच्छित उद्देश्य की इस तरह की अनदेखी से जांच एजेंसियों द्वारा बचा जाना चाहिए और अदालतों द्वारा सचेत रूप से निगरानी की जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान पाहवा ने कहा कि यह प्रक्रिया न केवल धारा 50 के तहत अनुमेय कार्रवाई का उल्लंघन है, बल्कि चिकित्सा उपचार की गोपनीयता में भी घुसपैठ है जो एक मौलिक अधिकार है।
उन्होंने दावा किया कि ईडी द्वारा चिकित्सकों पर अपने अधिकार का भार डालने के लिए किए गए “ठोस प्रयास” के परिणामस्वरूप अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने आरोपी का इलाज करने में आनाकानी की। आखिरकार आरोपी का इलाज मेदांता अस्पताल में किया गया।
न्यायाधीश ने कहा कि पीएमएलए की धारा 50 के तहत ईडी की शक्तियां आरोपी के निजी (स्वास्थ्य सहित) मामलों या जीवन में उसके व्यवसाय तक विस्तारित नहीं होती हैं, जब तक कि इनका पीएमएलए की धारा 4 के साथ पढ़ी जाने वाली धारा 3 के तहत आरोपों के साथ भेदभावपूर्ण संबंध न हो।
न्यायाधीश ने कहा, यह निजी व्यक्तियों या डॉक्टर जैसे पेशेवरों द्वारा व्यावसायिक कार्यों या कर्तव्यों के प्रदर्शन तक विस्तारित नहीं है, जिन पर आरोपी से जुड़ी किसी भी गतिविधि में शामिल होने का कोई आरोप तक नहीं लगाया गया है।
अदालत ने आरोपियों का इलाज कर रहे अपोलो और मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों के बयान दर्ज करने के लिए ईडी द्वारा धारा 50 का उपयोग करने को “अनुचित” करार दिया।
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