स्वास्थ्य क्षेत्र बेसहारा, आयुष्मान भारत बीमा योजना सही से तैयार नहीं की गई : आईएमए प्रमुख
सुभाष माधव
- 30 Apr 2024, 08:33 PM
- Updated: 08:33 PM
(पायल बनर्जी)
नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) स्वास्थ्य को ‘‘बेसहारा’’ करार देते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रमुख डॉ आर वी अशोकन ने कहा है कि कोविड संकट के बाद कोई सबक नहीं सीखा गया और हर किसी के ‘‘सबकुछ ठीक है’’ मान लेने के चलते राजनीतिक दलों के लिए यह एक शीर्ष प्राथमिकता नहीं है।
अशोकन ने पीटीआई के संपादकों के साथ बातचीत में सरकार की आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना को ‘‘सही से तैयार नहीं किया गया और वित्त की कमी वाला’’ बताया तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की मांग की।
उन्होंने कहा, ‘‘स्वास्थ्य बेसहारा है। यहां तक कि कोविड महामारी के बाद भी कोई व्यक्ति स्वास्थ्य के बारे में बात नहीं करना चाहता, जबकि उस समय असल में इसे आंतरिक सुरक्षा का विषय माना जा रहा था। हमने कोई सबक नहीं सीखा है। हम ‘सब कुछ ठीक’ है मानते रहेंगे।’’
अशोकन ने मौजूदा चुनाव के दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र पर ध्यान दिये जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘दुख की बात है कि स्वास्थ्य राजनीतिक दलों की शीर्ष प्राथमिकताओं में नहीं है।’’
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य (एबी-पीएमजेएवाई) योजना पर विस्तार से बात करते हुए अशोकन ने कहा कि योजना का ‘‘व्यापक दृष्टिकोण’’ था और इससे काफी उम्मीदें थीं।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इसे सही से तैयार नहीं किया गया। और पर्याप्त वित्त नहीं मिलने के कारण यह ध्वस्त होने के कगार पर है। मैं यह इसलिए कह रहा हूं कि इसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री ने गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के लोगों के लिए की थी लेकिन शायद इसे नीति आयोग और नौकरशाहों ने तैयार किया था।’’
आईएमए प्रमुख ने कहा, ‘‘सरकारी अस्पतालों में इलाज पहले से नि:शुल्क है। ऐसे में, मरीजों को नया क्या मिल रहा? चाहे यह सरकारी अस्पतालों के जरिये दिया जाए या आयुष्मान भारत के मार्फत, मरीज को कुछ भी नया नहीं मिल रहा...।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें इस योजना को संचालित करने के लिए सालाना कम से कम 1.6 लाख करोड़ रुपये चाहिए। यह 6,800 करोड़ रुपये से शुरू हुआ था। और अब यह 12,000 करोड़ रुपये है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो कुछ भी निवेश किया गया है वह अपर्याप्त है। लोग जीडीपी का करीब 3.9 प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च करते हैं। केंद्र और राज्य सरकारें साथ मिलकर जीडीपी का 1.1 प्रतिशत से 1.3 प्रतिशत खर्च करती हैं।’’
आईएमए प्रमुख ने अब भंग किये जा चुके योजना आयोग द्वारा भारत के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज पर 2011 की उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समूह की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को सभी नागरिकों के लिए एक बुनियादी पैकेज सुनिश्चित करना होगा, चाहे वह गरीब हो या अमीर।
उन्होंने कहा, ‘‘और नीति आयोग द्वारा स्वास्थ्य बीमा पर 2021 की रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 प्रतिशत भारतीय अपने लिए भुगतान कर सकते हैं, 25 प्रतिशत का ख्याल आयुष्मान भारत योजना द्वारा रखा जाएगा और बाकी, जो लगभग 90 करोड़ हैं, उन्हें निजी स्वास्थ्य बीमा के सहारे छोड़ा जा रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘योजना आयोग के दस्तावेज के 10 साल बाद हमें बीमा उद्योग के सहारे छोड़ना स्वीकार्य नहीं है।’’
ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) से तुलना करते हुए अशोकन ने कहा कि इस मामले में भारत अलग है।
उन्होंने कहा, “यहां भारत में आप अधिकांश स्थानों पर किसी चिकित्सक से परामर्श ले सकते हैं...ऐसा पश्चिम में नहीं है... और आप वहां डॉक्टर से बहुत आसानी से नहीं मिल सकते। वर्तमान में, हमने बहुत कम लागत में यह कर दिखाया है। हमारा यह कहना है कि जो हमारे पास है उसे न गंवाएं।’’
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