उद्धव ने महाराष्ट्र में त्रि-भाषा नीति का विरोध किया
शफीक रंजन
- 18 Jul 2025, 10:18 PM
- Updated: 10:18 PM
मुंबई, 18 जुलाई (भाषा) शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को कहा कि वह महाराष्ट्र सरकार द्वारा राज्य में त्रि-भाषा नीति लागू करने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं करेंगे।
मानसून सत्र के अंतिम दिन विधान भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने बृहस्पतिवार को राज्य विधानमंडल परिसर में प्रतिद्वंद्वी दलों के दो विधायकों के समर्थकों के बीच हुई हाथापाई पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इस घटना ने महाराष्ट्र की छवि को धूमिल किया है।
मराठी तथा अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में हिंदी ‘‘थोपे जाने’’ के दावे पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम महाराष्ट्र में त्रि-भाषा नीति को जबरन लागू किए जाने को बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’
महाराष्ट्र विधानभवन में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक गोपीचंद पडलकर के समर्थकों के बीच एक दिन पहले हुई हाथापाई से जुड़े सवाल पर उद्धव ने कहा, ‘‘इस घटना के बाद देश में महाराष्ट्र की छवि धूमिल हुई है।’’
ठाकरे ने भाजपा नीत ‘महायुति’ सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों का आचरण राज्य की गरिमा को शर्मसार कर रहा है।
घटना की तुलना अन्य राज्यों की कानून-व्यवस्था से किए जाने के सवाल पर उद्धव ने कहा, ‘‘मैं ये नहीं कहूंगा कि इस तरह की झड़पें महाराष्ट्र में उप्र-बिहार की संस्कृति ला रही हैं। उन राज्यों में भी अच्छे लोग हैं। हमें कुछ बुरे तत्वों की वजह से पूरे राज्य की छवि खराब नहीं करनी चाहिए।’’
ठाकरे ने यह भी कहा कि कई वर्षों के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के साथ मंच साझा करना (पांच जुलाई को हिंदी-मराठी मुद्दे पर आयोजित रैली में) उनके दीर्घकालिक सहयोग का संकेत माना जाना चाहिए।
शिवसेना (उबाठा) प्रमुख ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते कृषि ऋण माफी की घोषणा की थी, लेकिन जब इसका क्रियान्वयन शुरू होने वाला था, तब उनकी अगुवाई वाली महाविकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार गिर गई।
इस मुद्दे पर देवेंद्र फडणवीस सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए ठाकरे ने पूछा कि क्या मंत्री और विभाग ऋण माफी के लिए कोई अध्ययन कर रहे हैं।
महाराष्ट्र पर बढ़ते कर्ज के बोझ पर चिंता जताते हुए ठाकरे ने कहा, ‘‘आपूर्ति की मांग पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। राज्य पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। लगभग 64,000 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में चुकाए जा रहे हैं।’’
मानसून सत्र के अंतिम दिन शिवसेना (उबाठा) नेता ने दावा किया, ‘‘जनता के मुद्दों पर कई सवाल थे, लेकिन मुख्यमंत्री का भाषण ऐसा था जैसे कोई बच्चा अपनी मां से आइसक्रीम मांग रहा हो।’’
भाषा शफीक