कोलकाता: उच्च न्यायालय ने 21 जुलाई को टीएमसी की शहीद दिवस रैली से पहले जुलूस निकालने की अनुमति दी
संतोष अविनाश
- 18 Jul 2025, 10:41 PM
- Updated: 10:41 PM
कोलकाता, 18 जुलाई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 21 जुलाई को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस की शहीद दिवस रैली से पहले जुलूस निकालने की शुक्रवार को अनुमति दे दी, लेकिन सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच यह जुलूस नहीं निकाला जा सकेगा।
अदालत ने निर्देश दिया कि कोलकाता पुलिस के अधिकार क्षेत्र में सभी जुलूस 21 जुलाई को सुबह 8 बजे तक ही निकाले जा सकेंगे और उसके बाद शहर के मध्य में एस्प्लेनेड स्थित विक्टोरिया हाउस के पास भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए एक घंटे का समय दिया जाएगा।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने निर्देश दिया कि सुबह 9 बजे से 11 बजे तक, पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि कलकत्ता उच्च न्यायालय की ओर जाने वाली सड़कों और कोलकाता के केंद्रीय व्यावसायिक जिले के पांच किलोमीटर के दायरे में यातायात जाम न हो।
अदालत ने निर्देश दिया कि इसके बाद सुबह 11 बजे से जुलूस निकाले जा सकेंगे। 21 जुलाई को यातायात बाधित न हो, यह सुनिश्चित करने का अनुरोध करने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कोलकाता पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति घोष ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ता की दलीलों के विरोध में 22 अगस्त तक हलफनामा दाखिल करने और याचिकाकर्ता को चार सितंबर तक जवाब देने का निर्देश दिया।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
याचिका पर सुनवाई के दौरान, अदालत ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के वकील ने कहा कि लगभग 10 लाख लोग एकत्रित होंगे।
इक्कीस जुलाई को लोगों की भारी भीड़ के संबंध में टीएमसी के वकील ने दावा किया कि याचिकाकर्ताओं ने राजनीतिक मकसद से वार्षिक शहीद दिवस कार्यक्रम को नुकसान पहुंचाने के लिए अदालत का रुख किया है।
पार्टी द्वारा हर साल शहीद दिवस रैली 1993 में कांग्रेस प्रदर्शनकारियों पर की गई पुलिस गोलीबारी की याद में आयोजित की जाती है।
महाधिवक्ता दत्ता ने दलीलों के दौरान अदालत के समक्ष कहा कि कोलकाता पुलिस आयुक्त ने एक अधिसूचना में कहा है कि रैली के मद्देनजर सुबह 4 बजे से रात 9 बजे तक कुछ सड़कों पर यातायात को नियंत्रित किया जाएगा और उसे रोका नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक कार्यक्रमों और प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति जैसे वीआईपी की आवाजाही के दौरान भी यातायात पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं।
पुलिस आयुक्त को एक सरकारी कर्मचारी मानते हुए अदालत ने कहा कि उन्हें ‘‘तर्कसंगत दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।’’
कोलकाता पुलिस को बहुत कुशल बताते हुए महाधिवक्ता ने दावा किया कि कोलकाता में यातायात की स्थिति मुंबई और बेंगलुरु से बेहतर है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने शहर में अन्य संगठनों को उनके कार्यक्रमों के लिए अनुमति देते समय दोहरे मापदंड अपनाए।
महाधिवक्ता ने याचिका की विचारणीयता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि याचिकाकर्ता का इस मामले में कोई अधिकार नहीं है।
भाषा संतोष