अपनी विरासत संजोकर नहीं रखने वाला देश अपना भविष्य भी गंवा देता है: मोदी
सिम्मी अविनाश
- 12 Mar 2024, 03:49 PM
- Updated: 03:49 PM
(तस्वीरों के साथ जारी)
अहमदाबाद, 12 मार्च (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के पास देश की विरासत को बचाने की ‘‘राजनीतिक इच्छाशक्ति’’ नहीं थी और जो देश अपनी विरासत को संजोकर नहीं रखता, उसका भविष्य भी अंधकारमय हो जाता है।
मोदी ने गुजरात के अहमदाबाद शहर के साबरमती में 1,200 करोड़ रुपये के गांधी आश्रम स्मारक ‘मास्टरप्लान’ की शुरुआत की और 12 मार्च, 1930 को महात्मा गांधी द्वारा निकाले गए प्रसिद्ध दांडी मार्च या नमक मार्च के 94 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक समारोह में पुनर्विकसित कोचरब आश्रम का भी उद्घाटन किया।
प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा, ‘‘जो देश अपनी विरासत को संजोकर नहीं रखता, वह अपना भविष्य भी खो देता है। साबरमती आश्रम न सिर्फ देश, बल्कि पूरी मानव जाति के लिए एक धरोहर है।’’
मोदी ने कहा, ‘‘साबरमती आश्रम न केवल हमारे स्वतंत्रता संग्राम, बल्कि विकसित भारत के लिए भी तीर्थस्थल बन गया है। आज बापू की सोच हमारे देश के उज्ज्वल भविष्य को एक स्पष्ट दिशा दे रही है।’’
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद बनी सरकारों के पास ‘‘देश के ऐसे धरोहर स्थलों को संजोकर रखने के लिए कोई सोच या राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी।’’
मोदी ने कहा, ‘‘इसका एक कारण भारत को विदेशी नजरिए से देखने की आदत थी और दूसरा कारण, तुष्टीकरण की मजबूरी थी, जिसके कारण भारत की महान विरासत नष्ट होती चली गई। अतिक्रमण, अस्वच्छता, अव्यवस्था इन सबने हमारी विरासत को हड़प लिया।’’
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का साबरमती आश्रम हमेशा से ही एक अप्रतिम ऊर्जा का जीवंत केंद्र रहा है।
मोदी ने कहा कि यह आश्रम कभी 120 एकड़ भूमि में फैला हुआ था, लेकिन समय के साथ यह घटकर पांच एकड़ तक सिमट गया और 63 इमारतों से घटकर अब 36 इमारतों में सीमित रह गया। उन्होंने कहा कि इन मौजूदा 36 इमारतों में से पर्यटक केवल तीन इमारतों में ही जा सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इस साबरमती आश्रम को संरक्षित करना सभी 140 करोड़ भारतीयों की जिम्मेदारी है, जिसे देखने के लिए, जानने के लिए, अनुभव करने के लिए दुनिया भर से लोग यहां आते हों।’’
मोदी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि पुरानी इमारतों को उनके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए और कोशिश की जाए कि नयी इमारत बनाने की जरूरत ही न पड़े, ताकि देश को निर्माण की पारंपरिक पद्धति के बरकरार रहने का अहसास हो सके।
उन्होंने कहा, ‘‘भविष्य में यहां आने वाली पीढ़ियां समझ सकेंगी कि कैसे साबरमती के संत ने चरखे की शक्ति से देश की आत्मा और मन को झकझोर दिया था, अंतरात्मा को जगाया था और आजादी के आंदोलन को गति देने का काम किया था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सदियों की गुलामी से पीड़ित देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देकर बापू ने नयी आशा और विश्वास भरा था।’’
मोदी ने कहा कि महात्मा गांधी ने ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भर भारत का सपना देखा था। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत पहल उसी से प्रेरित हैं।
उन्होंने कहा कि गुजरात में नौ लाख किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाई है, जिससे तीन लाख टन यूरिया की बचत हुई है, जो महात्मा गांधी का सपना था।
मोदी ने कहा कि खादी को बढ़ावा देना और गांवों को मजबूत करना भी इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। उन्होंने कहा कि इन गांवों में महिलाएं अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने कहा कि आज स्वयं सहायता समूहों में काम करने वाली एक करोड़ से ज्यादा महिलाएं ‘‘लखपति दीदी’’ बन चुकी हैं। उन्होंने कहा, ‘‘(अपनी सरकार के) तीसरे कार्यकाल में तीन करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाना मेरा सपना है।’’
मोदी ने कहा, ‘‘हमारे प्रयासों ने गरीबों को गरीबी से लड़ने की ताकत दी है। पिछले 10 साल में सरकार की नीतियों के कारण 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं और मुझे यकीन है कि बापू आज जहां भी होंगे, वहां से हमें इसके लिए आशीर्वाद दे रहे होंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अमृत काल में जब भारत नए कीर्तिमान रच रहा है, जमीन से लेकर अंतरिक्ष तक नयी ऊंचाइयों को छू रहा है और विकसित होने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है, तब महात्मा गांधी की यह तपोस्थली हमारे लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।’’
उन्होंने कहा कि बापू के सत्य और अहिंसा के आदर्श, राष्ट्र की आराधना का संकल्प, गरीबों और वंचितों की सेवा में ईश्वर की सेवा देखने का सपना साबरमती आश्रम के माध्यम से आज भी जीवित हैं।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने वाराणसी में काशी धाम को विकसित करने की इच्छाशक्ति दिखाई, जहां पिछले दो साल में दो करोड़ से अधिक श्रद्धालु आए।
उन्होंने कहा कि (अयोध्या में) राम मंदिर विस्तार परियोजना के लिए 200 एकड़ भूमि मुहैया कराई थी और भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद केवल 50 दिन में एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु वहां दर्शन करने गए।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण की द्वारका में भी विकास के अनेक कार्यों का लोकार्पण किया गया है।
भाषा सिम्मी