सीएए के खिलाफ एलडीएफ, यूडीएफ का प्रदर्शन तेज, केरल सरकार कानूनी लड़ाई लड़ने पर मंथन कर रही
संतोष सुरेश
- 12 Mar 2024, 10:42 PM
- Updated: 10:42 PM
तिरुवनंतपुरम, 12 मार्च (भाषा) केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) से जुड़े नियमों को अधिसूचित किये जाने को लेकर केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने जगह-जगह विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिये हैं और राज्य सरकार सीएए लागू करने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने पर भी मंथन कर रही है।
हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसका पुरजोर बचाव करते हुए कहा है कि यह कानून मुस्लिमों को निशाना नहीं बनाता है।
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित केरल सरकार ने कहा कि वह सीएए से जुड़ी अधिसूचना को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख करने पर विचार कर रही है।
केरल के कानून मंत्री पी राजीव ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘राज्य सरकार ने सीएए के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में एक मुकदमा दायर किया है। हम वर्तमान में मूल्यांकन कर रहे हैं कि क्या केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना को चुनौती देने के लिए मौजूदा मुकदमे में संशोधन किया जाए या अलग से मामला दायर किया जाए।’’ उन्होंने कहा, ''इस मामले में कुछ ही दिनों में फैसला आ जाएगा।’’
यह कदम केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा सीएए को विभाजनकारी बताने और इसे राज्य में लागू नहीं करने का आश्वासन दिये जाने के एक दिन बाद आया है।
सीएए के लिए अधिसूचना का जारी किया जाना केरल में लोकसभा चुनाव से पहले एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है, जहां मुस्लिम आबादी काफी अधिक है। एलडीएफ और यूडीएफ, दोनों ने इसका जोरदार विरोध किया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावडेकर ने विजयन की आलोचना की और आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री जनता को गुमराह कर रहे हैं।
जावडेकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘श्री पिनराई, लोगों को मूर्ख ना बनाएं। सीएए किसी की नागरिकता रद्द करने के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होकर भारत आए शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए बनाया गया है। यह मुसलमानों के खिलाफ भेदभावपूर्ण नहीं है।’’
केरल भाजपा के प्रभारी जावडेकर ने कहा कि मुसलमानों को पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान में उनके धर्म के आधार पर प्रताड़ित नहीं किया जाता है।
भाजपा के दावे पर पलटवार करते हुए माकपा के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने आरोप लगाया कि सीएए एक सांप्रदायिक एजेंडा है। गोविंदन ने कहा, ‘‘हमारे पड़ोसी देश में भी मुसलमानों पर अत्याचार होता है। बर्मा में रोहिंग्या मुसलमानों के मामले पर केंद्र ने विचार नहीं किया है।’’
गोविंदन ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘वाम दल ने सीएए के खिलाफ बहुत कड़ा रुख अपनाया है और हमने कहा है कि इसे केरल में लागू नहीं किया जाएगा।’’
इस मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधते हुए माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने मंगलवार को आरोप लगाया कि ‘‘सीएए के पीछे हिंदू राष्ट्र बनाने का आरएसएस का एजेंडा है।’’ एलडीएफ संयोजक ई पी जयराजन ने आरोप लगाया कि धार्मिक ध्रुवीकरण के उद्देश्य से चुनाव से पहले अधिसूचना जारी की गई।
केरल में चुनाव में वाम मोर्चा के पक्ष में मुस्लिमों का समर्थन जुटाने का प्रयास करते हुए जयराजन ने दावा किया कि कांग्रेस ने संसद में नागरिकता अधिनियम का विरोध नहीं किया।
माकपा के वरिष्ठ नेता ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस सांसदों ने कुछ नहीं किया। यह सांप्रदायिकता का मौन समर्थन करने जैसा था।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मंशा देश में चल रहे शांतिपूर्ण माहौल को भंग करने और सत्ता पर कब्जा करने की है।
एलडीएफ पर पलटवार करते हुए यूडीएफ ने आरोप लगाया कि पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार इस मुद्दे पर ईमानदारी नहीं है कि राज्य में सीएए लागू नहीं किया जाएगा।
केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी डी सतीशन ने कहा, ‘‘वर्ष 2019 में राज्य में पुलिस ने सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से संबंधित 835 मामले दर्ज किए। गैर-आक्रामक मामलों को वापस लेने की मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद, कदम नहीं उठाये गए। यह सरकार के रुख पर सवाल उठाता है। मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि ये मामले वापस क्यों नहीं लिये गए।’’
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि एलडीएफ और यूडीएफ सीएए की आड़ में लोगों को बांट रहे हैं।
इस बीच माकपा की युवा शाखा ‘डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (डीवाईएफआई) ने उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर करके सीएए लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने के अपने इरादे की मंगलवार को घोषणा की।
डीवाईएफआई के अखिल भारतीय अध्यक्ष ए ए रहीम ने कहा कि यह संशोधन देश के संविधान के आधारभूत सिद्धांतों के लिए खतरा है।
सीएए के संबंध में केंद्र की अधिसूचना के खिलाफ केरल के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, क्योंकि एलडीएफ और यूडीएफ दोनों ने फैसले की निंदा करने के लिए केंद्र सरकार के संस्थानों की ओर मार्च आयोजित किया है।
युवा कांग्रेस ने इस कानून को लागू करने के विरोध में यहां राजभवन की ओर एक मार्च का आयोजन किया।
भाषा संतोष