कांग्रेस एजेएल को फिर से सक्रिय करने का प्रयास कर रही : राहुल के वकील चीमा ने अदालत को बताया
धीरज माधव
- 05 Jul 2025, 06:27 PM
- Updated: 06:27 PM
नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) नेशनल हेराल्ड धनशोधन मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता आर एस चीमा ने शनिवार को दलील दी कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की संपत्ति बेचने की कोशिश नहीं कर रही है, बल्कि उस संस्था को बचाने का प्रयास कर रही है, जो स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा था।
चीमा ने विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने के समक्ष प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)द्वारा लगाए गए आरोपों के खिलाफ अपनी दलीले पेश करते हुए प्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक मार्क ट्वेन और उर्दू कवि वसीम बरेलवी को उद्धृत किया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी, दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस, साथ ही सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और एक निजी कंपनी यंग इंडियन पर, नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करने वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों का धोखाधड़ी से अधिग्रहण करने की साजिश और धन शोधन करने का आरोप लगाया है।
चीमा ने सवाल किया, ‘‘क्या मेरे मित्र (ईडी के वकील) मुझे बता सकते हैं कि वे एजेएल के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (एमओए) को रखने में क्यों झिझक रहे थे? एजेएल की स्थापना 1937 में जवाहरलाल नेहरू, जे. बी. कृपलानी, रफी अहमद किदवई और अन्य लोगों द्वारा की गई थी।
मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (एमओए), कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत किसी कंपनी के गठन के लिए आवश्यक है।
चीमा ने कहा, ‘‘एजेएल के एमओए में कहा गया था कि एजेएल की नीति कांग्रेस की नीति होगी। एजेएल को कभी मुनाफा नहीं हुआ। आजादी के बाद की अवधि में यह कभी भी व्यावसायिक संस्था नहीं रही।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) एक ऐसी संस्था को पुनः सक्रिय करने का प्रयास कर रहे थे जो स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत का हिस्सा है। समस्या एजेएल को दिए गए ऋण की वसूली नहीं थी; समस्या इसे पुन: सक्रिय करने की थी, यह सुनिश्चित करने की थी कि यह फिर से पटरी पर आ जाए। एआईसीसी बिक्री में लाभ नहीं देख रही थी। ऐसा कहना सही दृष्टिकोण नहीं है।’’
वरिष्ठ अधिवक्ता ने विभिन्न आरोपों का हवाला देते हुए और आपत्तियां उठाते हुए उर्दू शायर वसीम बरेलवी की यह पंक्तियां उद्धृत कीं, ‘‘वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीके से, मैं यकीन न करता, तो क्या करता?’’। उनके इस उद्धरण से खचाखच भरी अदालत में हंसी छूट गई।
चीमा ने कहा कि वर्तमान मामले में, अदालत को उस स्थिति पर प्रतिक्रिया देनी थी, जहां ईडी ने सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत पर संज्ञान लिया और उस पर कार्रवाई की।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘‘उन्होंने शब्द का प्रयोग किया है। एक पैसा भी खर्च नहीं किया गया।’’उन्होंने कहा कि एजेएल ही वाणिज्यिक स्थलों के विकास में लगी हुई है और किराये की भी हकदार है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के खिलाफ आरोपों के संबंध में चीमा ने कहा कि ईडी ने इस तथ्य को उजागर नहीं किया है कि एआईसीसी एक विशाल पार्टी है जिसमें बड़ी संख्या में सदस्य हैं।
उन्होंने कहा कि इस आरोप का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है कि 2008 में एजेएल ने समाचार पत्र का प्रकाशन बंद कर दिया था और इसके बजाय एक रियल एस्टेट कंपनी के रूप में काम करना शुरू कर दिया था।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि ईडी ने गलत तरीके से यह मानकर राहुल गांधी के खिलाफ ‘अनुचित अनुमान’ लगाया कि 2010 में एआईसीसी के महासचिव के रूप में वह ही इसके मामलों के प्रभारी थे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के संविधान के अनुसार किसी भी महासचिव को इसके मामलों का प्रभारी नहीं बनाया जा सकता। चीमा ने पार्टी संविधान का हवाला देते हुए कहा कि एक समय में एआईसीसी के कई महासचिव होते थे।
चीमा ने कहा कि इसी प्रकार जब एजेएल को ऋण दिया गया, तब तत्कालीन एआईसीसी अध्यक्ष सोनिया गांधी को एआईसीसी का ‘‘प्रभारी व्यक्ति’’ समझ लिया गया।
राहुल गांधी का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता ने ईडी के इस आरोप पर भी आपत्ति जताई कि यंग इंडियन एक गैर-लाभकारी कंपनी होने के बावजूद धर्मार्थ गतिविधियों में शामिल नहीं है।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘धर्मार्थ की अवधारणा क्या है? भोजन और भिक्षा देना ही वे दान समझते हैं। इसके अलावा कुछ नहीं?’’
वरिष्ठ अधिवक्ता ने एजेएल की संपत्तियों के हड़पे जाने के आरोप पर कहा, ‘‘ यह सरासर झूठ हैं। हमें यह पता चल गया है। हम किस मामले को देख रहे हैं?... 750 करोड़, 2000 करोड़, 5000 करोड़, ईडी ने आरोप लगाया है। मार्क ट्वेन के शब्दों में: झूठ। सरासर झूठ, आंकड़े। मैं बात समाप्त करता हूं।’’
अन्य आरोपियों के खिलाफ सोमवार को बहस जारी रहेगी।
ईडी का आरोप है कि गांधी परिवार के पास यंग इंडियन में 76 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी, जिसने 90 करोड़ रुपये के ऋण के बदले में धोखाधड़ी से एजेएल की संपत्ति ‘हड़प’ ली।
इससे पहले शुक्रवार को सोनिया गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी दलीलें पूरी कीं थी।
ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू द्वारा तीन जुलाई को मामले में दायर आरोपपत्र पर अपनी दलीलें देते हुए कहा कि गांधी परिवार यंग इंडियन के ‘लाभ प्राप्त करने वाले मालिक’ हैं और अन्य शेयरधारकों की मृत्यु के बाद उन्होंने पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया है।
ईडी ने गांधी परिवार और अन्य के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 3 (धन शोधन) और 4 (धन शोधन के लिए सजा) के तहत आरोप पत्र दायर किया।
ईडी के आरोपपत्र में दुबे, पित्रोदा, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को भी नामजद किया गया है।
भाषा धीरज