आरएसएस प्रमुख ने पहले आरक्षण का विरोध किया था, अब कहते हैं कि वह इसके खिलाफ नहीं हैं: राहुल
देवेंद्र नरेश
- 28 Apr 2024, 08:49 PM
- Updated: 08:49 PM
दमन, 28 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की ‘‘संघ हमेशा आरक्षण का समर्थन करता है’’ संबंधी टिप्पणी को लेकर रविवार को उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह संघ प्रमुख ही थे, जिन्होंने अतीत में आरक्षण को लेकर अपना विरोध व्यक्त किया था।
केंद्र शासित प्रदेश दमन तथा दीव और दादरा तथा नगर हवेली के दमन में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए गांधी ने यह भी दावा किया कि जिन लोगों ने आरक्षण का विरोध किया है, वे उनकी (आरएसएस की) पार्टी (भाजपा) में शामिल हो रहे हैं और पार्टी में उनका स्वागत किया जा रहा है।
गांधी ने आरोप लगाया कि संघ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने नेताओं को देश का ‘‘राजा’’ बनाने और ‘‘20-22 अरबपतियों’’ की मदद करने के लिए संविधान और विभिन्न संस्थानों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी जी और संघ देश पर पूर्ववर्ती साम्राज्यों की तरह शासन करना चाहते हैं।’’ उन्होंने कहा कि भाजपा और संघ ‘‘एक देश, एक भाषा और एक नेता’’ (व्यवस्था) चाहते हैं।
संघ प्रमुख भागवत ने आज दिन में हैदराबाद में कहा था कि संघ ने हमेशा संविधान के अनुसार आरक्षण का समर्थन किया है।
गांधी ने कहा, ‘‘संघ प्रमुख ने बयान दिया है कि संघ आरक्षण के खिलाफ नहीं है। ये वही (मोहन भागवत) थे जिन्होंने बयान दिया था कि वह आरक्षण के विरोध में हैं। जो लोग आरक्षण (नीति) के खिलाफ हैं, वे उनकी पार्टी (भाजपा) में शामिल हो रहे हैं। वे उन सभी का स्वागत करते हैं जो आरक्षण के खिलाफ हैं, और फिर वह (भागवत) कहते हैं कि वह आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं।’’
गांधी ने कांग्रेस और संघ-भाजपा के बीच लड़ाई को वैचारिक बताते हुए संविधान की ‘‘रक्षा’’ के लिए वोट मांगा।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘संविधान ने नींव के रूप में काम किया है और बीज से इन संस्थाओं ने जन्म लिया है। वे संविधान को नष्ट करना चाहते हैं, वे लोकतंत्र और विभिन्न संस्थानों को नष्ट करना चाहते हैं, और संघ-भाजपा (नेताओं) को देश का राजा बनाना चाहते हैं।’’
उन्होंने कहा कि बुनियादी स्तर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-भाजपा की विचारधारा संविधान को नष्ट करने की है, जबकि कांग्रेस की इसकी रक्षा करने की है।
गांधी ने कहा, ‘‘(दोनों विचारधाराओं के बीच) मूलभूत स्तर पर अंतर यह है कि हम संविधान की रक्षा कर रहे हैं। दूसरी ओर, संघ और भाजपा का लक्ष्य संविधान को नष्ट करना है।’’
उन्होंने यह भी कहा कि संविधान भारत को लोकतंत्र, वोट देने का अधिकार और करोड़ों लोगों को आरक्षण प्रदान करता है।
राजनीतिक विमर्श को कांग्रेस और भाजपा की दो विचारधाराओं के बीच टकराव बताते हुए गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा और संघ ‘‘एक देश, एक भाषा और एक नेता’’ (व्यवस्था) का प्रस्ताव दे रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘एक तरफ, कांग्रेस कहती है कि किसी स्थान की पहचान, संस्कृति, इतिहास और भाषा की रक्षा की जानी चाहिए, तो वहीं दूसरी ओर भाजपा और संघ का कहना है कि एक देश, एक भाषा और एक नेता होना चाहिए।’’
‘‘एक भाषा, एक नेता’’ सिद्धांत के औचित्य पर सवाल उठाते हुए, गांधी ने कहा कि यह स्वाभाविक है कि तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और गुजरात के लोग क्रमशः तमिल, बांग्ला और गुजराती भाषाएं बोलेंगे।
उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश दमन, दीव और दादरा और नगर हवेली के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्थापित एक ‘‘राजा’’ करार दिया, ‘‘जिन्हें लोगों को परेशान करने और घरों को ध्वस्त करने की खुली छूट दी गई है’’।
गांधी ने आरोप लगाया, ‘‘मोदी जी और संघ देश पर पूर्ववर्ती राजाओं की तरह शासन करना चाहते हैं। प्रफुल्ल पटेल को जनता से कोई लेना-देना नहीं है, उनका मानना है कि वह यहां के राजा हैं और जो चाहते हैं वही करना चाहते हैं। जो कुछ वह यहां कर रहे हैं, वही मोदी दिल्ली में कर रहे हैं।’’
कांग्रेस सांसद ने दावा किया, ‘‘प्रफुल्ल पटेल जो करना चाहते हैं, वही करते हैं और आपको तंग करते रहते हैं। यह सिर्फ यहीं नहीं हो रहा है, बल्कि ऐसा पूरे देश में चल रहा है।’’
गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर शीर्ष अरबपतियों का 16 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ करने का आरोप दोहराया।
उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र में सरकार बनने के बाद कांग्रेस महिलाओं के बैंक खातों में सालाना एक लाख रुपये जमा करके और शिक्षित बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देकर करोड़ों लोगों को लखपति बनाएगी।’’
कांग्रेस ने दमन और दीव लोकसभा क्षेत्र में मौजूदा भाजपा सांसद लालूभाई पटेल के खिलाफ केतन पटेल को मैदान में उतारा है।
भाषा
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