वाम-कांग्रेस के अंदर तृणमूल-भाजपा के एजेंटों ने बंगाल में संयुक्त मोर्चा को विफल किया : नौशाद
प्रशांत रंजन
- 28 Apr 2024, 06:36 PM
- Updated: 06:36 PM
(सौगत मुखोपाध्याय)
कोलकाता, 28 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल में कभी वाम दलों और कांग्रेस गठबंधन के साथ रहे इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के अध्यक्ष नौशाद सिद्दीकी का कहना है कि संभव है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और तृणमूल कांग्रेस के एजेंटों ने उनके पूर्ववर्ती गठबंधन सहयोगियों के गुट में प्रवेश किया हो और उसे नाकाम कर दिया।
सिद्दीकी ने कहा कि इस गठबंधन के कमजोर होने से राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर तृणमूल कांग्रेस-भाजपा के संयुक्त प्रभुत्व का प्रभावी प्रतिरोध भी कम हो गया।
बंगाल विधानसभा में एकमात्र गैर-भाजपाई विपक्षी विधायक सिद्दीकी ने 2021 के राज्य चुनावों में वाम-कांग्रेस-आईएसएफ संयुक्त मोर्चे के हिस्से के रूप में भांगर सीट से चुनाव जीता था। यह क्षेत्र सियासी हिंसा के लिये भी चर्चा में रहा है। उन चुनावों में वामपंथियों और कांग्रेस दोनों के खाते में एक भी सीट नहीं आई थी।
यह गठबंधन 2024 के आम चुनावों से पहले टूट गया और आईएसएफ ने राज्य की 42 सीटों में से 17 पर अपने उम्मीदवार उतार दिए। यहां पार्टी को वाम व कांग्रेस के अलावा प्रदेश में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि चुनाव के अंत तक, आईएसएफ राज्य के प्रमुख ‘वोट कटवा’ के रूप में उभर सकता है। यह शब्द आम बोलचाल में उन पार्टियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिनको मिले वोटों से उनकी जीत नहीं हो सकती है लेकिन चुनावी संतुलन दो मुख्य उम्मीदवारों में से किसी एक के पक्ष में झुक सकता है।
सिद्दीकी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “हम यह सोचकर चुनाव मैदान में नहीं उतरे हैं कि चुनाव में हमारी भागीदारी से किसे फायदा होगा या किसे नुकसान होगा। हम सभी 17 सीटों पर जीत के लिए लड़ रहे हैं और महसूस करते हैं कि यह तभी हो सकता है जब हम मतदाताओं को उस वैकल्पिक राजनीति के बारे में समझा सकें जिसका हम प्रचार करते हैं। अन्यथा हम एक भी सीट नहीं जीतेंगे।”
उन्होंने कहा, “लेकिन दूरदर्शी नजरिये से देखें तो, ऐसा लगता है कि आरएसएस और तृणमूल विचारधारा वाले दोनों तत्व अब यहां माकपा और कांग्रेस के भीतर दखल दे रहे हैं, जो लोग नहीं चाहते थे कि हमारा गठबंधन जारी रहे क्योंकि भाजपा और तृणमूल दोनों संयुक्त मोर्चा की बढ़ती ताकत से चिंतित हैं।”
सिद्दीकी ने खुलासा किया कि वाम दलों के साथ सीट समायोजन वार्ता के दौरान, आईएसएफ ने शुरू में 14 सीटें मांगी थीं और बाद में घटकर सिर्फ सात रह गईं।
उन्होंने कहा, “वे क्योंकि तीन-चार सीटों से आगे नहीं बढ़े, इसलिए हमें वह रवैया अपमानजनक और हमारे आत्म-सम्मान पर आघात लगा। हमने कभी गठबंधन नहीं तोड़ा, बल्कि अंत तक इसे बनाए रखने की कोशिश की। वामपंथियों के हमारे साथ होने से भाजपा और तृणमूल का विरोध करना आसान हो जाता। यह कार्य अब और अधिक श्रमसाध्य हो गया है।”
भाषा प्रशांत