कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन पर कोई बातचीत नहीं : शिवकुमार
प्रशांत नरेश
- 01 Jul 2025, 09:51 PM
- Updated: 09:51 PM
(तस्वीरों के साथ)
बेंगलुरु, एक जुलाई (भाषा) कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन पर कोई चर्चा नहीं हुई है और उन्होंने राज्य में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और पार्टी की सरकार के हाथ मजबूत करने पर जोर दिया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार ने पार्टी नेताओं और विधायकों से नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर मीडिया से बात नहीं करने को कहा।
उन्होंने रामनगर के विधायक एच.ए. इकबाल हुसैन को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है जो यह बयान दे रहे हैं कि शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनना चाहिए।
मुख्यमंत्री परिवर्तन के बारे में मीडिया के समक्ष हुसैन के सार्वजनिक बयानों से पार्टी में भ्रम और शर्मिंदगी पैदा होने का उल्लेख करते हुए उन्हें दिये गए नोटिस में कहा गया, “यह पार्टी अनुशासन का उल्लंघन भी है। आपके अनुशासनहीन बयानों को गंभीरता से लेते हुए, आपको कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और आपको यह नोटिस प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर अपने बयानों पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।”
हुसैन और एच.सी. बालकृष्ण (मगदी) सहित कुछ पार्टी विधायकों के इस दावे के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें फिर से शुरू हो गई हैं कि इस साल के अंत में शिवकुमार मुख्यमंत्री बनेंगे। हुसैन और बालाकृष्णन दोनों को शिवकुमार का करीबी माना जाता है।
शिवकुमार ने यहां संवाददाताओं को बताया, “बयानबाजी हो रही है। हम पार्टी में अनुशासन चाहते हैं। अनुशासन जरूरी है। नेतृत्व परिवर्तन का कोई मुद्दा नहीं है। इस पर कोई चर्चा या कुछ नहीं हो रहा है। कोई जल्दबाजी में नहीं है, 2028 हमारे लिए महत्वपूर्ण है।”
हुसैन ने दावा किया है कि शिवकुमार के पास दो से तीन महीने में मुख्यमंत्री बनने का मौका है।
शिवकुमार ने कहा कि पार्टी के किसी भी नेता या विधायक को ऐसे मामलों पर मीडिया से बात नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “किसी को भी प्रेस के सामने नहीं जाना चाहिए। मैं यह कह रहा हूं, प्रेस के सामने नहीं जाना चाहिए। मैं यह कह रहा हूं, चाहे वह इकबाल हुसैन हों या बी आर पाटिल या बालकृष्ण या कोई और, इसकी कोई जरूरत नहीं है।”
उन्होंने कहा, “सिद्धरमैया मुख्यमंत्री हैं, उनके और सरकार के हाथ मजबूत करना ही एकमात्र लक्ष्य है।”
राजनीतिक हलकों में, विशेषकर सत्तारूढ़ कांग्रेस में, इस वर्ष के अंत में मुख्यमंत्री बदलने की अटकलें लगाई जा रही हैं, जिसमें सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता-साझाकरण समझौते का हवाला दिया गया है। लेकिन पार्टी हाईकमान के कड़े निर्देशों के बाद ऐसी चर्चाएं कुछ समय के लिए थम गयी थीं।
मई 2023 में विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा थी और कांग्रेस शिवकुमार को मनाने में कामयाब रही तथा उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया।
उस समय कुछ खबरें थीं कि “क्रमिक मुख्यमंत्री फॉर्मूले” के आधार पर समझौता हो गया है, जिसके अनुसार शिवकुमार ढाई साल बाद मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन पार्टी द्वारा इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इससे पहले हुसैन ने रामनगर में पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया कि 100 से अधिक विधायक नेतृत्व में बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि कई विधायक भी बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। एक अच्छा प्रशासन और उन्हें (शिवकुमार) एक अवसर दिया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने पार्टी को संगठित करने के लिए कड़ी मेहनत की है और संघर्ष किया है। जब उन्हें केपीसीसी अध्यक्ष बनाया गया था, तब क्या स्थिति थी? अब क्या स्थिति है? यह कैसे मजबूत हुई है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? सभी जानते हैं। इसलिए सभी उनके साथ खड़े होंगे।”
केपीसीसी प्रमुख की चेतावनी के बावजूद, बाद में, कर्नाटक के प्रभारी एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला से मुलाकात के बाद, हुसैन ने कहा कि वह अपने पहले के बयान पर कायम हैं कि शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में आए और पार्टी में लोग आगे बढ़ें।”
उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने सुरजेवाला के समक्ष बदलाव की मांग रखी है और उन्हें उम्मीद है कि आलाकमान उनके पक्ष में निर्णय लेगा।
बालकृष्ण ने कहा कि उन्होंने मांग की है कि शिवकुमार को मौका दिया जाना चाहिए, लेकिन उन्होंने यह नहीं कहा है कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को कल या तुरंत बदल दिया जाए। समय सीमा आलाकमान द्वारा तय की जाएगी।
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