केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आपातकाल के पीड़ितों के बलिदान का सम्मान करने का संकल्प लिया
नोमान पवनेश
- 25 Jun 2025, 07:28 PM
- Updated: 07:28 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को आपातकाल का विरोध करने वाले लोगों के बलिदान का स्मरण और सम्मानित करने का संकल्प लिया। मंत्रिमंडल ने आपातकाल का विरोध करने वालों को श्रद्धांजलि देने के लिए कुछ क्षणों का मौन रखा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उन लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन रखा, जिनके संविधान प्रदत्त लोकतांत्रिक अधिकार छीने गए और जिन्हें अकल्पनीय यातनाओं का सामना करना पड़ा।
प्रस्ताव में कहा गया, “ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उन अनगिनत व्यक्तियों के बलिदान को स्मरण और सम्मानित करने का संकल्प लिया, जिन्होंने आपातकाल और भारतीय संविधान की भावना को कुचलने के प्रयासों का साहसपूर्वक विरोध किया। यह दमनचक्र 1974 में नवनिर्माण आंदोलन और संपूर्ण क्रांति अभियान को बलपूर्वक कुचलने के प्रयासों से शुरू हुआ था।”
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आपातकाल की ज्यादतियों के प्रति उनके अनुकरणीय साहस और वीरतापूर्ण प्रतिरोध को श्रद्धांजलि दी।"
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में ‘संविधान हत्या दिवस’ के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं - जो भारत के इतिहास का एक अविस्मरणीय अध्याय है और इसके तहत संविधान को कमजोर किया गया, भारत के गणतंत्र और लोकतांत्रिक भावना पर हमला किया गया, संघवाद को कमजोर किया गया और मौलिक अधिकारों, मानव स्वतंत्रता और गरिमा को निलंबित कर दिया गया।
वैष्णव ने कहा, "केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस बात की पुष्टि की कि भारत के लोग भारतीय संविधान और देश के लोकतांत्रिक लोकाचार की दृढ़ता में अटूट विश्वास रखते हैं।"
मंत्री ने कहा, "जैसे यह बुजुर्गों के लिए अहम है, वैसे ही युवाओं के लिए भी यह महत्वपूर्ण है कि वे उन लोगों से प्रेरणा लें जिन्होंने तानाशाही प्रवृत्तियों का विरोध किया और हमारे संविधान व लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा के लिए डटे रहे।”
वैष्णव ने कहा कि लोकतंत्र की जननी के रूप में भारत संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण, सुरक्षा और संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरण है।
वैष्णव ने कहा, "आइए, हम एक राष्ट्र के रूप में अपने संविधान और उसकी लोकतांत्रिक व संघीय भावना की रक्षा करने के संकल्प को फिर से दृढ़ करें।
भाषा नोमान