ईवीएम पर न्यायालय का फैसला कांग्रेस के लिए करारा तमाचा, उसे माफी मांगनी चाहिए: प्रधानमंत्री मोदी
अविनाश पवनेश
- 26 Apr 2024, 10:30 PM
- Updated: 10:30 PM
नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से डाले गए मतों के पूर्ण सत्यापन की मांग वाली याचिकाएं उच्चतम न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने के आलोक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि यह फैसला कांग्रेस नीत विपक्ष के लिए "करारा तमाचा" है और ईवीएम को लेकर अविश्वास पैदा करने के लिए "माफी" मांगनी चाहिए।
अधिकतर विपक्षी दलों ने फैसले पर टिप्पणी नहीं की, वहीं कांग्रेस ने कहा कि वह चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बढ़ाने के लिए ‘वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल’ (वीवीपैट) के अधिक उपयोग पर जोर देती रहेगी।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने चुनावों में ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इसने निर्वाचन आयोग को बदनाम करने की कोशिश करने वाली कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी पार्टियों को बेनकाब कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के अररिया और मुंगेर में चुनावी सभाओं में कहा कि यह कांग्रेस-नीत ‘इंडिया’ गठबंधन को करारा तमाचा है और उसे ईवीएम के खिलाफ अविश्वास पैदा करने के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।
मोदी ने आरोप लगाया, ‘‘राजद-कांग्रेस और ‘‘इंडी’’ गठबंधन को न देश के संविधान और न ही लोकतंत्र की परवाह है। ये वे लोग हैं जिन्होंने 10 साल तक मतपत्रों के बहाने गरीबों का अधिकार छीना... बिहार के लोग साक्षी हैं कैसे राजद-कांग्रेस के शासन में चुनाव में बूथ और मतपत्र लूट लिए जाते थे। इतना ही नहीं गरीबों को वोट डालने के लिए घर से बाहर भी निकलने नहीं दिया जाता था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘देश के गरीबों और ईमानदार मतदाताओं को जब ईवीएम की ताकत मिली तो यह उन लोगों को बर्दाश्त नहीं हुआ जो चुनाव के दिन वोट लूटने का खेल खेलते थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उसके हर नेता ने ईवीएम को लेकर जनता के मन में संदेह पैदा करने का पाप किया है।’’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘‘वीवीपैट पर जिन याचिकाओं को आज उच्चतम न्यायालय ने खारिज किया, उनमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक पक्ष नहीं थी। हमने दो न्यायाधीशों की पीठ के फैसले पर विचार किया है और चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बढ़ाने के लिए वीवीपैट के अधिक से अधिक उपयोग पर हमारा राजनीतिक अभियान जारी रहेगा।’’
विपक्ष पर प्रधानमंत्री मोदी के हमले के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी ईवीएम के खिलाफ इसी तरह का संदेह व्यक्त किया था।
खेड़ा ने कहा, " क्या श्री आडवाणी 2009 में देश को गुमराह कर रहे थे? जब उन्होंने ईवीएम के खिलाफ जीवीएल नरसिम्हा की पुस्तक का विमोचन किया था, जब श्री आडवाणी ईवीएम के खिलाफ प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे, तो क्या वह देश को गुमराह कर रहे थे?
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री को बुनियादी होमवर्क करना चाहिए। उन्हें नेहरू जी पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, आडवाणी जी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। वह गैरजिम्मेदाराना ढंग से टिप्पणी करना बंद कर देंगे।''
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा, "चुनाव के दो चरण पूरे हो चुके हैं, अब हमारी नजर तीसरे चरण के मतदान पर है... मैं केवल एक ही बात कहना चाहूंगा, ‘इंडिया’ गठबंधन, समाजवादी पार्टी को विजयी बनाएं और ईवीएम हटाएं..."
इससे पहले, उच्चतम न्यायालय ने ईवीएम के जरिये डाले गए मतों का वीवीपैट के साथ पूर्ण मिलान कराने संबंधी याचिकाएं शुक्रवार को खारिज कर दी और कहा कि तंत्र के किसी भी पहलू पर ‘‘आंख मूंद कर अविश्वास करना’’ अवांछित संशय पैदा कर सकता है।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने मामले में सहमति वाले दो फैसले सुनाये और इस मामले से जुड़ी वे सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। इन याचिकाओं में मतपत्रों से चुनाव कराने की प्रकिया को फिर से उपयोग में लाने संबंधी याचिका भी शामिल थी।
भाषा अविनाश