मतदाताओं को वीवीपैट पर्चियां देना समस्या पैदा करेगा, अव्यावहारिक होगा : उच्चतम न्यायालय
सुभाष माधव
- 26 Apr 2024, 08:46 PM
- Updated: 08:46 PM
नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि मतदाताओं को ‘वीवीपैट’ पर्चियां देना समस्या पैदा करेगा और यह अव्यावहारिक है तथा यह इसके दुरूपयोग किये जाने एवं विवादों को बढ़ावा देगा।
न्यायालय ने सभी ‘वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल’ (वीवीपैट) पर्चियों की गिनती किये जाने का अनुरोध करने वाली याचिकाएं खारिज करते हुए यह कहा।
न्यायालय ने यह भी कहा कि 2019 से निर्वाचन आयोग ने केवल एक मामले को छोड़कर, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पांच मतदान केंद्रों पर पड़े वोट के ‘वीवीपैट’ पर्ची से मिलान नहीं हो पाने का एक भी मामला नहीं पाया है।
शीर्ष अदालत ने वह याचिका भी खारिज कर दी, जिसमें मतदाताओं को वीवीपैट मशीन से निकली पर्ची का सत्यापन करने और फिर इसे गिनती के लिए मतपेटी में डालने का अधिकार प्रदान करने का अनुरोध किया गया था।
न्यायालय ने स्वीकार किया कि यह सुनिश्चित करना मतदाताओं का मूल अधिकार है कि उनके द्वारा डाला गया वोट उसी उम्मीदवार को गया हो, जिसे उन्होंने वोट दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे वीवीपैट पर्चियों से शत-प्रतिशत मिलान करने या वीवीपैट पर्चियों का मिलान करने का अधिकार माना जाए।
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा, ‘‘ये दोनों अलग-अलग पहलू हैं। पहला पहलू (वोट देना) अपने आप में एक अधिकार है जबकि दूसरा पहलू (वीपीपैट पर्ची से मिलान किया जाना) इस अधिकार को सुरक्षित करने का अनुरोध है। मतदाताओं के अधिकार की सुरक्षा की जा सकती है और कई उपाय कर उसे सुरक्षित किया जा सकता है।’’
पीठ ने कहा कि मतदाताओं को वीवीपैट पर्चियां देना समस्या उत्पन्न करेगा और अव्यावहारिक होगा।
न्यायालय ने कहा, ‘‘यह दुरूपयोग, कदाचार और विवादों को बढ़ावा देगा।’’
वीवीपैट पर्चियों की गिनती मौजूदा पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने के विषय पर, पीठ ने कहा कि यह कई कारणों से इसके प्रति इच्छुक नहीं है।
न्यायालय ने कहा, ‘‘पहला, यह कि इससे गिनती करने में समय अधिक लगेगा और नतीजों की घोषणा में देर होगी। मतगणना कर्मियों की संख्या दोगुनी करनी पड़ेगी। मानव द्वारा गिनती करने में मानवीय त्रुटियां होने का जोखिम है। मतगणना में मानवीय हस्तक्षेप चुनाव नतीजों में गड़बड़ी के आरोपों को बढ़ावा देगा। साथ ही, डेटा और चुनाव नतीजे वीवीपैट यूनिट की संख्या बढ़ाने की जरूरत का संकेत नहीं देते हैं।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि 9.9 सेंटीमीटर लंबी और 5.6 सेंमी चौड़ी वीवीपैट पर्ची बहुत नाजुक और चिपचिपी होती है, जिससे मतगणना प्रक्रिया धीमी पड़ जाएगी।
हालांकि, इसने कहा कि मतदाता इन पर्चियों को वीवीपैट पर निर्धारित स्थान पर देख सकते हैं और आश्वस्त हो सकते हैं कि उनका वोट दर्ज हो गया है और इसकी गिनती होगी।
शीर्ष अदालत ने याचिकाओं के एक समूह पर अपना फैसला सुनाया। इन याचिकाओं में गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक याचिका भी शामिल थी जिसमें मतपत्रों से चुनाव कराने की पुरानी प्रणाली फिर से अपनाने के लिए निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया था।
पीठ ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग ने 41,629 ईवीएम-वीवीपैट के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के वीवीपैट सत्यापन किये हैं। चार करोड़ से अधिक वीवीपैट पर्चियों का उनके कंट्रोल यूनिट की इलेक्ट्रॉनिक संख्या से मिलान किया गया। इनके बेमेल होने का एक भी मामला, या वोट ऐसे उम्मीदवार को जाने जिसे वोट नहीं दिया गया हो, का एक भी मामला सामने नहीं आया।’’
न्यायालय ने कहा कि निर्वाचन संचालन नियम, 1961 के नियम 56 डी के तहत 2017 से निर्वाचन अधिकारियों को 100 मामलों में वीवीपैट पर्चियों की दोबारा गिनती करने की अनुमति दी गई।
पीठ ने कहा, ‘‘2019 के लोकसभा चुनाव में 20,687 वीवीपैट पर्चियों की मतगणना कर्मियों द्वारा गिनती की गई थी और एक मामले के सिवाय, कोई भी विसंगति नहीं पाई गई।’’
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