केरल में प्रमुख चुनावी मुद्दा बना सीएए, एलडीएफ और यूडीएफ का विरोध प्रदर्शन
संतोष अमित
- 12 Mar 2024, 06:47 PM
- Updated: 06:47 PM
तिरुवनंतपुरम, 12 मार्च (भाषा) केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) से जुड़े नियमों को अधिसूचित किया जाना केरल में लोकसभा चुनाव के लिहाज से एक प्रमुख मुद्दा बन गया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने इसके खिलाफ कई जगह विरोध प्रदर्शन किया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसका पुरजोर बचाव करते हुए कहा है कि यह कानून मुस्लिमों को निशाना नहीं बनाता है।
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के संबंध में केंद्र की अधिसूचना के खिलाफ केरल के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, क्योंकि एलडीएफ और यूडीएफ दोनों ने फैसले की निंदा करने के लिए केंद्र सरकार के संस्थानों तक कई मार्च आयोजित किये।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा सीएए को विभाजनकारी बताकर इसकी निंदा करने और इसे राज्य में लागू नहीं करने का आश्वासन देने के एक दिन बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रकाश जावडेकर ने उनकी आलोचना की और आरोप लगाया कि विजयन जनता को गुमराह कर रहे हैं।
जावडेकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘श्री पिनराई, लोगों को मूर्ख मत बनाएं। सीएए किसी की नागरिकता रद्द करने के लिए नहीं बल्कि धार्मिक आधार पर प्रताड़ित होकर भारत आए शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए बनाया गया है। यह मुसलमानों के खिलाफ भेदभावपूर्ण नहीं है।’’
केरल भाजपा के प्रभारी जावडेकर ने कहा कि मुसलमानों को पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान में उनके धर्म के आधार पर प्रताड़ित नहीं किया जाता है।
केंद्र द्वारा विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 को लागू करने की घोषणा के तुरंत बाद विजयन ने कहा था कि उनकी सरकार ने बार-बार कहा है कि यह अधिनियम, जो मुस्लिम अल्पसंख्यकों को दूसरे दर्जे के नागरिकों के रूप में मानता है, केरल में लागू नहीं किया जाएगा।
इस बीच, इस मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधते हुए माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ ने मंगलवार को आरोप लगाया कि ‘‘सीएए के पीछे हिंदू राष्ट्र बनाने का आरएसएस का एजेंडा है।’’ एलडीएफ संयोजक ई पी जयराजन ने आरोप लगाया कि धार्मिक ध्रुवीकरण के उद्देश्य से चुनाव से पहले अधिसूचना जारी की गई।
केरल में चुनाव में वाम के पक्ष में मुस्लिमों का समर्थन जुटाने का प्रयास करते हुए जयराजन ने दावा किया कि कांग्रेस ने संसद में नागरिकता अधिनियम का विरोध नहीं किया। माकपा के वरिष्ठ नेता ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस सांसदों ने कुछ नहीं किया। यह सांप्रदायिकता का मौन समर्थन करने जैसा था।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मंशा देश में चल रहे शांतिपूर्ण माहौल को भंग करने और सत्ता पर कब्जा करने की है।
एलडीएफ पर पलटवार करते हुए यूडीएफ ने आरोप लगाया कि पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार, जो कहती है कि राज्य में सीएए लागू नहीं किया जाएगा, इस मुद्दे पर ईमानदारी नहीं है।
केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी डी सतीशन ने कहा, ‘वर्ष 2019 में राज्य में पुलिस ने सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से संबंधित 835 मामले दर्ज किए। गैर-आक्रामक मामलों को वापस लेने की मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद, कदम नहीं उठाये गए। यह सरकार के रुख पर सवाल उठाता है। मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि ये मामले वापस क्यों नहीं लिए गए।’’
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि एलडीएफ और यूडीएफ सीएए की आड़ में लोगों को बांट रहे हैं।
इस बीच माकपा की युवा शाखा ‘डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (डीवाईएफआई) ने उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर करके सीएए लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने के अपने इरादे की मंगलवार को घोषणा की।
डीवाईएफआई के अखिल भारतीय अध्यक्ष ए ए रहीम ने कहा कि यह संशोधन देश के संविधान के आधारभूत सिद्धांतों के लिए खतरा है।
भाषा संतोष