लोस चुनाव: माकपा के दिग्गज नेता के भाजपा में शामिल होने की योजना के आरोपों से वाम दल परेशान
सुरेश नेत्रपाल
- 26 Apr 2024, 07:28 PM
- Updated: 07:28 PM
कन्नूर/अलाप्पुझा, 26 अप्रैल (भाषा) केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता ई. पी. जयराजन की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की कथित योजना के बारे में राजनीतिक विरोधियों द्वारा लगाए गए आरोपों से शुक्रवार को राज्य में सत्तारूढ़ वाम दलों की परेशानी जारी रही। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने अपने सहयोगी (जयराजन) को आगाह किया कि वह अपने संबंधों को लेकर सतर्क रहें।
विजयन ने सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के संयोजक जयराजन को परोक्ष रूप से आगाह किया और एक स्थानीय कहावत का इस्तेमाल करते हुए कहा, ‘‘अगर भगवान शिव किसी पापी से जुड़ जाते हैं, तो शिव भी पापी बन जाएंगे।’’
मुख्यमंत्री का यह बयान भाजपा की ‘तेज-तर्रार’ नेता शोभा सुरेंद्रन द्वारा जयराजन को अपनी पार्टी में शामिल करने संबंधी प्रयास का जिक्र किए जाने और माकपा पर हमला बोले जाने के एक दिन बाद आया है।
दो दिन पहले शोभा ने आरोप लगाया था कि एक मध्यस्थ ने एक शीर्ष माकपा नेता की मदद करने की कोशिश की थी, जो भाजपा में शामिल होना चाहते थे तथा बृहस्पतिवार को उन्होंने दावा किया कि वह नेता ईपी जयराजन थे।
कन्नूर में पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में कुछ लोग ऐसे हैं जो हर दिन यह सोचते हुए उठते हैं कि किसे धोखा देना है।
विजयन ने भाजपा और जयराजन के बीच कथित मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले टी जी नंदकुमार का नाम लिए बिना कहा कि ऐसे लोगों के साथ किसी भी तरह की दोस्ती या परिचय से आमतौर पर बचना चाहिए।
विजयन ने कहा कि उनका अनुभव यह रहा है कि जयराजन का संबंध हमेशा सभी के साथ अच्छा रहता है तथा आमतौर पर ऐसे मामलों में वह सतर्क नहीं रहते हैं।
उन्होंने राज्य के राजनीतिक हलकों में ‘‘दलाल’’ के नाम से जाने जाने वाले नंदकुमार का प्रत्यक्ष जिक्र किए बिना कहा कि इस तरह एक व्यक्ति जिसकी राज्य में सबसे संदिग्ध पृष्ठभूमि है, इन सभी घटनाक्रमों का गवाह बनकर सामने आया।
विजयन ने कहा कि उन्हें लवलीन मामले में उस व्यक्ति विशेष का संबंध स्पष्ट रूप से पता है, जिसकी लड़ाई वह वर्षों से उच्चतम न्यायालय में लड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों से दोस्ती या परिचय भी अस्वीकार्य है।
जयराजन के भाजपा नेता प्रकाश जावडे़कर से मुलाकात की बात स्वीकारने की मीडिया में प्रकाशित खबरों से संबंधित सवाल का जवाब देते हुए विजयन ने कहा कि ऐसी मुलाकातों में कुछ भी गलत नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने खुद जावडे़कर से बात की थी।
जयराजन की दशकों लंबी राजनीतिक यात्रा की सराहना करते हुए विजयन ने कहा कि एक कम्युनिस्ट नेता के रूप में उन्होंने (जयराजन ने) अपने जीवन में कई परिस्थितियों का सामना किया, जो सभी वामपंथी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने वाला रहा है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा विवाद न केवल जयराजन, बल्कि माकपा और एलडीएफ को निशाना बनाकर किया गया एक राजनीतिक हमला है।
विजयन ने यह भी उम्मीद जताई कि राज्य के लोग इस तरह के प्रचार पर विश्वास नहीं करेंगे।
जावडे़कर के साथ जयराजन की कथित मुलाकात के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए माकपा के प्रदेश सचिव एम वी गोविंदन ने कहा कि लोग किसी से भी मिल सकते हैं।
उन्होंने कन्नूर में संवाददाताओं से कहा कि यह केवल वामपंथ पर हमला करने का तरीका और माकपा के खिलाफ एक 'राजनीतिक साजिश' है।
गोविंदन ने कहा, ‘‘राजनीतिक नेताओं के रूप में, हम कई लोगों से मिलते रहते हैं। हाल ही में, मैंने एम एम हसन और भाजपा नेता कृष्णदास से मुलाकात की। हम वहां एक टेलीविजन बहस में हिस्सा लेने गए थे। हमारे बीच दोस्ती है, लेकिन हमारे बीच मजबूत राजनीतिक मतभेद हैं। यह व्यक्तिगत संबंध नहीं, बल्कि राजनीति है, जो मायने रखती है।’’
‘‘सत्ता के दलाल’’ के बारे में एक सवाल पर गोविंदन ने कहा कि उन्होंने बिचौलिये के बयानों पर कभी प्रतिक्रिया नहीं दी, क्योंकि इसकी जरूरत नहीं है।
गोविंदन ने कहा, ‘‘इस तरह की धोखाधड़ी पर प्रतिक्रिया देने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन उन्होंने कुछ चीजों का दावा किया है, और उनकी जांच होनी चाहिए। मैंने कहा कि उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता, लेकिन उन्होंने जिन सभी मामलों का दावा किया है, उनकी जांच की जानी चाहिए।’’
इस बीच, कांग्रेस के प्रदेश प्रमुख के. सुधाकरन ने इस मामले पर जयराजन और माकपा की आलोचना जारी रखी और पूछा कि क्या कोई व्यक्ति बिना किसी संबंध के किसी से मिलने जाएगा।
सुधाकरन ने कहा, ‘‘मुझे इसकी परवाह नहीं है कि जयराजन भाजपा में जाते हैं या नहीं। हम उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित नहीं हैं। जयराजन को किनारे करने के लिए उस पार्टी के अंदर किसी तरह की साजिश थी। इसलिए वह दूर रह रहे थे।’’
विवाद के संबंध में मुख्यमंत्री के बयानों के बारे में पूछे जाने पर वरिष्ठ भाजपा नेता और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) उम्मीदवार शोभा सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि विजयन ने ही हमेशा संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले लोगों के साथ संबंध बनाए रखे।
उन्होंने विजयन पर राज्य में कम्युनिस्ट पार्टी की 'बदहाली' का कारण बनने का भी आरोप लगाया।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने मुख्यमंत्री विजयन के इस बयान पर सवाल उठाया कि जयराजन और जावडे़कर के बीच बैठक में कुछ भी गलत नहीं है।
सतीशन ने परवूर में मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा, ‘‘इसका मतलब यह है कि जयराजन ने मुख्यमंत्री की अनुमति से जावडे़कर से मुलाकात की थी? एलडीएफ संयोजक को भाजपा प्रदेश प्रभारी से क्या बात करनी थी?’’
मुख्यमंत्री के यह स्वीकार करने पर कि वह खुद भी जावडे़कर से कई बार मिले हैं, नेता प्रतिपक्ष सतीशन ने जानना चाहा कि किस कारण से उन्होंने (विजयन ने) उस भाजपा नेता से मुलाकात की जो अब केंद्रीय मंत्री नहीं हैं।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने भी इसी तरह के विचार साझा किए और आश्चर्य जताया कि कभी मुख्यमंत्री के करीबी विश्वासपात्र रहे जयराजन क्या उनकी (विजयन की) जानकारी के बिना जावडे़कर के साथ चर्चा करेंगे।
उन्होंने कहा, "जयराजन भाजपा और माकपा के बीच एक पुल की तरह काम कर रहे हैं। हम शुरू से ही दोनों दलों के बीच गुप्त समझ के बारे में बात कर रहे हैं। वर्तमान घटनाक्रम इसका प्रमाण है।"
हालांकि, माकपा नेता एवं लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास ने कहा कि वामपंथी नेता और कार्यकर्ता वे होते हैं, जो आखिरी सांस तक भाजपा-विरोधी भावना रखते हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के प्रदेश सचिव बिनय विश्वम ने वामपंथी नेताओं को खुद को संदिग्ध व्यक्तियों और संगठनों से दूर रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
कांग्रेस प्रदेश प्रमुख के. सुधाकरन और सत्तारूढ़ एलडीएफ संयोजक ईपी जयराजन ने बृहस्पतिवार को एक-दूसरे पर भाजपा में शामिल होने की योजना बनाने का आरोप लगाया।
भाषा सुरेश