अतिक्रमण को लेकर अदालत के आदेशों की अवहेलना नहीं की जा सकतीः रेखा गुप्ता
शुभम प्रशांत
- 08 Jun 2025, 10:15 PM
- Updated: 10:15 PM
(फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को कहा कि अधिकारी अदालतों द्वारा जारी किये गये ध्वस्तीकरण आदेशों की अवहेलना नहीं कर सकते। साथ ही उन्होंने कहा कि विस्थापित निवासियों को आवास मुहैया कराया गया है।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी विपक्षी आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा दक्षिणी दिल्ली में बारापुला के निकट मद्रासी कैंप झुग्गी बस्ती को ढहाये जाने तथा शहर के अन्य भागों में इसी प्रकार के ध्वस्तीकरण अभियान की आलोचना के बीच आई है।
आप ने गुप्ता पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों को हटाया गया है, उन्हें सुदूर नरेला में बुनियादी सुविधाओं से रहित मकान दिए गए हैं।
वहीं पार्टी सांसद संजय सिंह और दिल्ली इकाई के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने रविवार को मद्रासी कैंप झुग्गी बस्ती के ध्वस्तीकरण स्थल का दौरा किया, जहां उन्होंने विस्थापित निवासियों से मुलाकात की और भाजपा पर अपना हमला तेज किया।
हैदरपुर क्षेत्र में एक झुग्गी बस्ती में जन सेवा शिविर के निर्माण के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में गुप्ता ने संवाददाताओं से कहा, "पिछले कुछ दिनों में अधिकारियों द्वारा मद्रासी कैंप आदि इलाकों में लगभग चार बार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है, जहां न्यायालय ने बारापुला नाले के पास अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे।"
उन्होंने कहा, “किसी भी झुग्गी बस्ती को उसके निवासियों को स्थायी आवास उपलब्ध कराए बिना नहीं तोड़ा जाएगा।”
उन्होंने कहा कि बारापुला नाले के पास अतिक्रमण के कारण इसकी चौड़ाई कम हो गई है, जिससे आसपास के इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि गाद निकालने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी।
उन्होंने कहा, "यदि न्यायालय ने मलिन बस्तियों के लिए कुछ आदेश दिया है तो न तो सरकार और न ही प्रशासन कुछ कर सकता है। अधिकांश अतिक्रमण विरोधी कार्रवाइयां न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में की जा रही हैं और उन अवैध कब्जों को निशाना बनाया जा रहा है जो यातायात में बाधा डाल रहे हैं या सार्वजनिक आवागमन बाधित कर रहे हैं।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "अदालत ने इस झुग्गी बस्ती को हटाने का आदेश दिया था ताकि नाले की सफाई के लिए मशीनें लगाई जा सकें। कोई भी अदालत के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकता। उस कैंप के निवासियों को मकान आवंटित कर दिए गए हैं।"
मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आतिशी ने कहा कि भाजपा का प्रमुख चुनावी वादा 'जहां झुग्गी, वहीं मकान' खोखला है।
सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा, "रेखा जी: क्या अदालत ने यह भी कहा था कि भाजपा अपना ‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’ का वादा पूरा ना करे? अगर झुग्गी तोड़नी थी तो आस-पास के इलाके में घर क्यों नहीं दिया? मद्रासी कैंप के ज्यादातर लोगों को मकान नहीं मिला। जिनको मिला - वो भी 40 किलोमीटर दूर नरेला के टूटे फूटे घर; जहां सड़क नहीं, काम नहीं, स्कूल नहीं, अस्पताल नहीं…"
भारद्वाज ने झुग्गियों की सुरक्षा के लिए सरकार के प्रयासों पर सवाल उठाया।
उन्होंने 'एक्स' कहा, "अदालत के आदेश के पीछे छिपना बंद करें। क्या आपने सुप्रीम कोर्ट में अपील करी? आप तो सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के ख़िलाफ़ भी संसद में क़ानून लाते हैं, यहां क्यों नहीं लाए ?"
भारद्वाज ने कहा, "इन लोगों की झुग्गियां तोड़ने से पहले उन्हें उसी स्थान पर घर क्यों नहीं दिए गए? मुख्यमंत्री ने इन लोगों से अभी तक मुलाकात क्यों नहीं की?"
इससे पहले मद्रासी कैंप झुग्गी बस्ती के दौरे के दौरान सिंह और भारद्वाज ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का झुग्गीवासियों से किया गया 'जहां झुग्गी, वहीं मकान' का वादा "अन्य कई वादों की तरह खोखला साबित हुआ है।"
आप ने भाजपा पर गरीबों के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक मंचों और संसद में इस मुद्दे को उठाना जारी रखने का वादा किया है।
मद्रासी कैंप निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के पास बारापुला नाले के किनारे स्थित झुग्गियों का एक समूह है, जो 60 वर्षों से लगभग 370 परिवारों का घर था।
भाषा
शुभम